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हरियाणा के खिलाड़ियों की सुरक्षा पर सवाल: फाइलों में घूम रहे खेल मंत्री के आदेश; छह माह बाद भी समाधान लापता

कुलदीप शुक्ला, चंडीगढ़ Published by: Naveen Updated Sun, 07 Jun 2026 08:27 AM IST
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सार

बहादुरगढ़ में जिस कोर्ट पर अमन गंभीर की मौत हुई थी, वहां आज भी नया पोल नहीं लगा है। टूटा हुआ ढांचा मैदान में पड़ा है और शहर में खिलाड़ियों के पास अभ्यास के लिए कोई सरकारी बास्केटबॉल कोर्ट उपलब्ध नहीं है।

Questions raised over safety of Haryana's athletes: Sports Minister's orders stuck in bureaucratic red tape
हरियाणा के खेल मंत्री गौरव गौतम। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

हरियाणा में दो बास्केटबॉल खिलाड़ियों की मौत के बाद खेल विभाग और सरकार ने सुरक्षा व्यवस्था दुरुस्त करने के बड़े-बड़े दावे किए थे। जर्जर पोल हटाने के आदेश हुए, बैठकों का दौर चला और 114 करोड़ रुपये से खेल ढांचे को मजबूत करने की योजना बनाई गई। लेकिन छह महीने बाद भी हालात यह हैं कि कई जिलों में पुराने पोल तो हटा दिए गए, मगर नए पोल नहीं लगाए गए। नतीजा यह है कि खिलाड़ी आज भी अभ्यास के लिए भटकने को मजबूर हैं।



23 नवंबर 2025 को बहादुरगढ़ के शहीद ब्रिगेडियर होशियार सिंह स्टेडियम में अभ्यास के दौरान बास्केटबॉल पोल गिरने से खिलाड़ी अमन गंभीर घायल हो गए थे। अगले दिन उनकी मौत हो गई। इससे पहले रोहतक जिले के लाखनमाजरा में भी जर्जर पोल गिरने से अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी हार्दिक राठी की जान चली गई थी। लगातार दो हादसों के बाद खेल मंत्री गौरव गौतम ने उच्चस्तरीय बैठक बुलाकर राज्यभर में जर्जर खेल उपकरण बदलने और सुरक्षा मानकों की समीक्षा के निर्देश दिए थे।
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इसके बाद कई जिलों में कार्रवाई हुई। झज्जर जिले के 17 राजीव गांधी खेल स्टेडियमों से जर्जर पोल हटा दिए गए। सोनीपत में 17 पोल हटाए गए, जबकि रोहतक के 13 राजीव खेल स्टेडियमों से भी पुराने पोल उखाड़ दिए गए। यानी तीन जिलों में ही 47 से अधिक पोल हटाए जा चुके हैं। लेकिन विडंबना यह है कि इनकी जगह नए पोल आज तक नहीं लगाए गए।
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बहादुरगढ़ में जिस कोर्ट पर अमन गंभीर की मौत हुई थी, वहां आज भी नया पोल नहीं लगा है। टूटा हुआ ढांचा मैदान में पड़ा है और शहर में खिलाड़ियों के पास अभ्यास के लिए कोई सरकारी बास्केटबॉल कोर्ट उपलब्ध नहीं है। सोनीपत में खिलाड़ी निजी अकादमियों और स्कूलों का सहारा ले रहे हैं, जबकि झज्जर और रोहतक में भी खिलाड़ी सुविधाओं के अभाव से जूझ रहे हैं।

नारनौल में नए पोल लगाने का प्रस्ताव मुख्यालय भेजा गया है और विभाग निर्देशों का इंतजार कर रहा है। वहीं रेवाड़ी और जींद में अधिकारियों का दावा है कि वहां के पोल सुरक्षित हैं, इसलिए उन्हें नहीं बदला गया।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब हादसों ने खिलाड़ियों की जान ले ली और खतरा साबित हो चुका था, तब समाधान के लिए छह महीने का इंतजार क्यों? खेल विभाग ने सुरक्षा के नाम पर पोल तो हटवा दिए, लेकिन सुरक्षित विकल्प उपलब्ध कराने में नाकाम रहा। खिलाड़ियों के लिए यह इंतजार अब सवाल बन चुका है कि आखिर उनकी सुरक्षा और सुविधाएं सरकारी प्राथमिकता में कब आएंगी।

अधिकारी के अनुसार
खेल विभाग को 114 करोड़ रुपये की राशि से खेल इंफ्रास्ट्रक्चर को दुरुस्त करने की जिम्मेदारी दी गई है। पोल सहित सभी खेल उपकरणों को लेकर प्रक्रिया जारी है। इसके लिए कमेटी बनाई गई है और जिम्मेदारियां तय की गई हैं। -गौरव गौतम, खेल मंत्री, हरियाणा।

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