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रोबोटिक किडनी ट्रांसप्लांट से बदलेगा भविष्य : प्रो. प्रांजल मोदी
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चंडीगढ़। भविष्य में रोबोटिक किडनी ट्रांसप्लांट सर्जरी इस क्षेत्र में बड़ा बदलाव ला सकती है। यह बात प्रो. प्रांजल मोदी ने वीरवार को पीजीआई में आयोजित ट्रांसप्लांट सर्जरी की सातवीं ओरैशन और भारतीय ट्रांसप्लांट सर्जनों की दूसरी वार्षिक कॉन्फ्रेंस के दौरान कही।
इस मौके पर प्रो. मोदी ने सिविल अस्पताल से ट्रांसप्लांट यूनिवर्सिटी तक का सफर विषय पर अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि अहमदाबाद के सिविल अस्पताल को आधुनिक ट्रांसप्लांट सेंटर में विकसित किया गया, जहां किडनी, लिवर और पैंक्रियाज ट्रांसप्लांट सफलतापूर्वक किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि ट्रांसप्लांट किसी एक व्यक्ति का काम नहीं, बल्कि पूरी टीम के सहयोग से संभव होता है।
पीजीआई के निदेशक प्रो. विवेक लाल ने कहा कि इस तरह के आयोजन देश में मेडिकल क्षेत्र को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाते हैं। वहीं, रीनल ट्रांसप्लांट सर्जरी विभाग के प्रमुख प्रो. आशीष शर्मा ने प्रो. मोदी के कार्यों को युवाओं के लिए प्रेरणादायक बताया। कॉन्फ्रेंस में अंगदान, डायलिसिस और जीवन के अंतिम चरण से जुड़े विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई, जिसमें करीब 180 विशेषज्ञों ने भाग लिया। विशेषज्ञों ने अधिक से अधिक लोगों को अंगदान के लिए प्रेरित करने पर बल दिया। प्रो. काजल जैन ने ब्रेन डेथ सर्टिफिकेट और अंगदान से जुड़ी चुनौतियों पर प्रकाश डाला।
दो परिवारों ने बेटों के अंगदान की कहानी साझा
कार्यक्रम का सबसे भावुक पल तब आया, जब दो परिवारों ने अपने बेटों के अंगदान की कहानी साझा की। उन्होंने बताया कि डॉक्टरों की संवेदनशील बातचीत ने उन्हें इस कठिन समय में यह निर्णय लेने का साहस दिया। कार्यक्रम ने स्पष्ट संदेश दिया कि सही जानकारी से ही देश में अंगदान और ट्रांसप्लांट सिस्टम मजबूत हो सकता है।
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इस मौके पर प्रो. मोदी ने सिविल अस्पताल से ट्रांसप्लांट यूनिवर्सिटी तक का सफर विषय पर अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि अहमदाबाद के सिविल अस्पताल को आधुनिक ट्रांसप्लांट सेंटर में विकसित किया गया, जहां किडनी, लिवर और पैंक्रियाज ट्रांसप्लांट सफलतापूर्वक किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि ट्रांसप्लांट किसी एक व्यक्ति का काम नहीं, बल्कि पूरी टीम के सहयोग से संभव होता है।
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पीजीआई के निदेशक प्रो. विवेक लाल ने कहा कि इस तरह के आयोजन देश में मेडिकल क्षेत्र को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाते हैं। वहीं, रीनल ट्रांसप्लांट सर्जरी विभाग के प्रमुख प्रो. आशीष शर्मा ने प्रो. मोदी के कार्यों को युवाओं के लिए प्रेरणादायक बताया। कॉन्फ्रेंस में अंगदान, डायलिसिस और जीवन के अंतिम चरण से जुड़े विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई, जिसमें करीब 180 विशेषज्ञों ने भाग लिया। विशेषज्ञों ने अधिक से अधिक लोगों को अंगदान के लिए प्रेरित करने पर बल दिया। प्रो. काजल जैन ने ब्रेन डेथ सर्टिफिकेट और अंगदान से जुड़ी चुनौतियों पर प्रकाश डाला।
दो परिवारों ने बेटों के अंगदान की कहानी साझा
कार्यक्रम का सबसे भावुक पल तब आया, जब दो परिवारों ने अपने बेटों के अंगदान की कहानी साझा की। उन्होंने बताया कि डॉक्टरों की संवेदनशील बातचीत ने उन्हें इस कठिन समय में यह निर्णय लेने का साहस दिया। कार्यक्रम ने स्पष्ट संदेश दिया कि सही जानकारी से ही देश में अंगदान और ट्रांसप्लांट सिस्टम मजबूत हो सकता है।