{"_id":"69a5fc2c43970fcf72048c8c","slug":"storyteller-balijit-was-honored-with-the-prem-prakash-memorial-award-chandigarh-news-c-16-pkl1049-961712-2026-03-03","type":"story","status":"publish","title_hn":"Chandigarh News: कथाकार बलीजीत को प्रेम प्रकाश स्मृति पुरस्कार से सम्मानित किया गया","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Chandigarh News: कथाकार बलीजीत को प्रेम प्रकाश स्मृति पुरस्कार से सम्मानित किया गया
विज्ञापन
विज्ञापन
चंडीगढ़। सेक्टर-16 के पंजाब कला भवन में सोमवार को पुरस्कार वितरण समारोह हुआ। यह आयोजन ब्रिटिश कोलंबिया के पंजाबी साहित्यिक सभ्याचारक विचार मंच और कहानी धारा संस्था जालंधर की ओर से और पंजाब कला परिषद के सहयोग से हुआ। कार्यक्रम में नवनीत सिंह और बूटा राम मसानी को पाठक पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया। प्रसिद्ध कथाकार बलीजीत को प्रेम प्रकाश स्मृति पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
सबसे पहले पुरस्कार प्रबंधक एवं कथाकार भगवंत रसूलपुरी ने आए हुए मेहमानों का स्वागत किया। अमरजीत चहल ने पुरस्कार प्रदान करने की विधि और रूपरेखा के बारे में जानकारी दी। कहा कि यह सम्मान पढ़ने की रुचि को प्रोत्साहित करने के लिए दिए जा रहे हैं ताकि अधिक से अधिक पाठक तैयार किए जा सकें।
मशहूर आलोचक डॉ. सुखदेव सिंह सिरसा ने कहा कि गांवों में पुस्तक संस्कृति लगातार घट रही है। उन्होंने कहा कि साहित्यिक सभाओं का साहित्य के प्रति योगदान पहले के समय की सभाओं की तुलना में बहुत कम हो गया है। पहले सभाओं में किताबों और रचनाओं पर गंभीर चर्चा होती थी। उन्होंने किताबों से दूरी के लिए प्रकाशकों और प्रोफेसरों को भी जिम्मेदार ठहराया।
इस अवसर पर डॉ. गुरपाल सिंह संधू, डॉ. सुखदेव सिंह सिरसा, अमरजीत चहल, परमजीत मान, मोहन गिल, जसवीर माहल, गुल चौहान आदि उपस्थित थे।
Trending Videos
सबसे पहले पुरस्कार प्रबंधक एवं कथाकार भगवंत रसूलपुरी ने आए हुए मेहमानों का स्वागत किया। अमरजीत चहल ने पुरस्कार प्रदान करने की विधि और रूपरेखा के बारे में जानकारी दी। कहा कि यह सम्मान पढ़ने की रुचि को प्रोत्साहित करने के लिए दिए जा रहे हैं ताकि अधिक से अधिक पाठक तैयार किए जा सकें।
विज्ञापन
विज्ञापन
मशहूर आलोचक डॉ. सुखदेव सिंह सिरसा ने कहा कि गांवों में पुस्तक संस्कृति लगातार घट रही है। उन्होंने कहा कि साहित्यिक सभाओं का साहित्य के प्रति योगदान पहले के समय की सभाओं की तुलना में बहुत कम हो गया है। पहले सभाओं में किताबों और रचनाओं पर गंभीर चर्चा होती थी। उन्होंने किताबों से दूरी के लिए प्रकाशकों और प्रोफेसरों को भी जिम्मेदार ठहराया।
इस अवसर पर डॉ. गुरपाल सिंह संधू, डॉ. सुखदेव सिंह सिरसा, अमरजीत चहल, परमजीत मान, मोहन गिल, जसवीर माहल, गुल चौहान आदि उपस्थित थे।