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Chandigarh News: सुखना झील की होगी सफाई, 2 लाख वर्गमीटर क्षेत्र से हटेंगे लोटस प्लांट और कचरा
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चंडीगढ़। सुखना झील की सफाई के लिए प्रशासन ने तैयारी कर ली है। करीब 2 लाख वर्गमीटर क्षेत्र में सफाई अभियान चलाया जाएगा। इसमें झील में फैले लोटस प्लांट (कमल के पौधे), जलीय खरपतवार (वीड्स) और कचरे को हटाने का कार्य किया जाएगा। इसका करीब 30 लाख रुपये का टेंडर भी जारी कर दिया गया है।
प्रशासन के अनुसार वीड्स और कचरा हटाने के लिए प्रति वर्गमीटर 13.30 रुपये की दर तय की गई है। इस हिसाब से मुख्य सफाई कार्य पर लगभग 26 लाख रुपये खर्च होंगे जबकि निकाले गए कचरे को निर्धारित स्थान तक ले जाने और उसके निपटान पर अतिरिक्त 3 से 4 लाख रुपये खर्च किए जाएंगे।
लंबे समय से सुखना झील जलीय खरपतवार और गंदगी की समस्या से जूझ रही है। लोटस प्लांट और अन्य वीड्स तेजी से फैलकर न केवल झील की सुंदरता को प्रभावित कर रहे हैं बल्कि जल प्रवाह और पारिस्थितिकी तंत्र पर भी असर डाल रहे हैं। कई हिस्सों में पानी का स्तर घटने से स्थिति और चिंताजनक हो गई है।
इस बीच, सामाजिक संगठनों और पर्यावरण प्रेमियों ने मांग उठाई है कि सफाई अभियान को केवल ठेके तक सीमित न रखा जाए। आरटीआई एक्टिविस्ट आरके गर्ग का कहना है कि शहर में बड़ी संख्या में एनजीओ और युवा समूह सक्रिय हैं जिन्हें इस अभियान से जोड़कर न केवल खर्च कम किया जा सकता है बल्कि लोगों में जिम्मेदारी की भावना भी बढ़ेगी। सुखना झील के घटते जलस्तर को लेकर सुप्रीम कोर्ट भी सख्त टिप्पणी कर चुका है। विशेषज्ञों का मानना है कि स्थायी समाधान के लिए नियमित मॉनिटरिंग, गाद निकासी, जल प्रवाह प्रबंधन और प्रदूषण स्रोतों पर नियंत्रण जरूरी है।
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प्रशासन के अनुसार वीड्स और कचरा हटाने के लिए प्रति वर्गमीटर 13.30 रुपये की दर तय की गई है। इस हिसाब से मुख्य सफाई कार्य पर लगभग 26 लाख रुपये खर्च होंगे जबकि निकाले गए कचरे को निर्धारित स्थान तक ले जाने और उसके निपटान पर अतिरिक्त 3 से 4 लाख रुपये खर्च किए जाएंगे।
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लंबे समय से सुखना झील जलीय खरपतवार और गंदगी की समस्या से जूझ रही है। लोटस प्लांट और अन्य वीड्स तेजी से फैलकर न केवल झील की सुंदरता को प्रभावित कर रहे हैं बल्कि जल प्रवाह और पारिस्थितिकी तंत्र पर भी असर डाल रहे हैं। कई हिस्सों में पानी का स्तर घटने से स्थिति और चिंताजनक हो गई है।
इस बीच, सामाजिक संगठनों और पर्यावरण प्रेमियों ने मांग उठाई है कि सफाई अभियान को केवल ठेके तक सीमित न रखा जाए। आरटीआई एक्टिविस्ट आरके गर्ग का कहना है कि शहर में बड़ी संख्या में एनजीओ और युवा समूह सक्रिय हैं जिन्हें इस अभियान से जोड़कर न केवल खर्च कम किया जा सकता है बल्कि लोगों में जिम्मेदारी की भावना भी बढ़ेगी। सुखना झील के घटते जलस्तर को लेकर सुप्रीम कोर्ट भी सख्त टिप्पणी कर चुका है। विशेषज्ञों का मानना है कि स्थायी समाधान के लिए नियमित मॉनिटरिंग, गाद निकासी, जल प्रवाह प्रबंधन और प्रदूषण स्रोतों पर नियंत्रण जरूरी है।
