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Politics: क्या पंजाब में भाजपा का चक्रव्यूह भेद पाएगी आप? दांव पर चुनाव; सीएम मान ने कह दी ये बात
मोहित धुपड़, चंडीगढ़
Published by: शाहिल शर्मा
Updated Thu, 30 Apr 2026 06:00 AM IST
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सार
अब साल 2027 के लिए चुनौती इसलिए बड़ी दिख रही है क्योंकि साल 2022 के चुनावी रणनीतिकारों में से दो बड़े नेता एवं राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा और संदीप पाठक पार्टी छोड़कर भाजपा में शामिल हो चुके हैं।
भाजपा और आप
- फोटो : संवाद
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विस्तार
राज्यसभा सांसदों के दल बदल के साथ ही भाजपा ने पंजाब में अपना कूटनीतिक चक्रव्यूह रच दिया है। यह कोई हैरत की बात नहीं हैं, क्योंकि साल 2022 के विधानसभा चुनाव से पहले भी भाजपा ने इसी रणनीति से काम करते हुए शिरोमणि अकाली दल (शिअद) और कांग्रेस के कई आला नेताओं को अपने पाले में किया था। उस वक्त कांग्रेस सत्ता में थी इसलिए भाजपा का निशाना कांग्रेस थी मगर अबकी बार व्यूह रचना सत्तारूढ़ आप के लिए है।
इसी कूटनीतिक चक्रव्यूह से उभर कर सत्ता वापसी सरकार के लिए बड़ी चुनौती बन गई है। इसके लिए पार्टी को नए सिरे से चुनावी रणनीति तैयार कर मैदान में उतरेगी। इसकी बड़ी जिम्मेदारी पंजाब के प्रभारी मनीष सिसोदिया, सीएम भगवंत मान और पार्टी के प्रदेशाध्यक्ष अमर अरोड़ा के कंधों पर होगी। पंजाब में पार्टी का संगठन मजबूत है और साल 2022 में प्रचार का तरीका भी आक्रामक रहा था। सूबे में चुनाव लड़ने के लिए अच्छा फंड भी मिला था और विदेशों में बैठे एनआरआई पंजाबियों ने खुलकर समर्थन किया था।
अब साल 2027 के लिए चुनौती इसलिए बड़ी दिख रही है क्योंकि साल 2022 के चुनावी रणनीतिकारों में से दो बड़े नेता एवं राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा और संदीप पाठक पार्टी छोड़कर भाजपा में शामिल हो चुके हैं। आप के सिपाही से भाजपाई बनने वाले सात राज्यसभा सांसदों में से छह पंजाब कोटे के हैं इसलिए इसका भी विपरित असर आप पर पड़ना लाजिमी है।
दल बदल को जनादेश से जोड़ेंगे सीएम
मुख्यमंत्री ने प्रदेश के सभी पार्टी पदाधिकारियों व पर्यवेक्षकों से आह्वान करते हुए कहा कि वे आप सरकार का विकास संबंधी रिपोर्ट कार्ड लेकर मतदाताओं के बीच जाएं क्योंकि उन्हें विकास से ही मतलब है। उधर सीएम ने भी बागी सांसदों के दल बदल को जनादेश से जोड़ने का फैसला लिया है। मतदाताओं के बीच जाकर सीएम उन्हें बताएंगे कि उन लोगों ने विधायक चुने थे और उनके द्वारा चुने विधायकों ने ही सांसदों को चुनकर राज्यसभा में भेजा था। इसलिए आप सांसदों का भाजपा में चले जाना जनादेश का अपमान है।
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इसी कूटनीतिक चक्रव्यूह से उभर कर सत्ता वापसी सरकार के लिए बड़ी चुनौती बन गई है। इसके लिए पार्टी को नए सिरे से चुनावी रणनीति तैयार कर मैदान में उतरेगी। इसकी बड़ी जिम्मेदारी पंजाब के प्रभारी मनीष सिसोदिया, सीएम भगवंत मान और पार्टी के प्रदेशाध्यक्ष अमर अरोड़ा के कंधों पर होगी। पंजाब में पार्टी का संगठन मजबूत है और साल 2022 में प्रचार का तरीका भी आक्रामक रहा था। सूबे में चुनाव लड़ने के लिए अच्छा फंड भी मिला था और विदेशों में बैठे एनआरआई पंजाबियों ने खुलकर समर्थन किया था।
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अब साल 2027 के लिए चुनौती इसलिए बड़ी दिख रही है क्योंकि साल 2022 के चुनावी रणनीतिकारों में से दो बड़े नेता एवं राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा और संदीप पाठक पार्टी छोड़कर भाजपा में शामिल हो चुके हैं। आप के सिपाही से भाजपाई बनने वाले सात राज्यसभा सांसदों में से छह पंजाब कोटे के हैं इसलिए इसका भी विपरित असर आप पर पड़ना लाजिमी है।
दल बदल को जनादेश से जोड़ेंगे सीएम
मुख्यमंत्री ने प्रदेश के सभी पार्टी पदाधिकारियों व पर्यवेक्षकों से आह्वान करते हुए कहा कि वे आप सरकार का विकास संबंधी रिपोर्ट कार्ड लेकर मतदाताओं के बीच जाएं क्योंकि उन्हें विकास से ही मतलब है। उधर सीएम ने भी बागी सांसदों के दल बदल को जनादेश से जोड़ने का फैसला लिया है। मतदाताओं के बीच जाकर सीएम उन्हें बताएंगे कि उन लोगों ने विधायक चुने थे और उनके द्वारा चुने विधायकों ने ही सांसदों को चुनकर राज्यसभा में भेजा था। इसलिए आप सांसदों का भाजपा में चले जाना जनादेश का अपमान है।
कार्यकर्ताओं को यूं समझा रहे सीएम
इस उठापटक से न तो पार्टी कार्यकर्ता व नेता भटकें और न ही मकसद। इसके लिए पार्टी हाईकमान बहुत गंभीर है। इस घटनाक्रम के बाद सीएम कार्यकर्ताओं से रूबरू होकर उन्हें यह कहकर समझा रहे हैं कि आप एक समुद्र है और यदि कोई उसमें से एक गड़वी (लोटा) पानी भर ले तो समुद्र को फर्क नहीं पड़ता
बल्कि गड़वी की औकात मालूम चल जाती है कि उसे कितना पानी चाहिए था। चार-छह नेताओं के जाने से पार्टी का कुछ नहीं बिगड़ता लिहाजा हौसला बनाएं रखें और चुनाव से पहले सरकार के विकास कार्य घर-घर तक पहुंचाएं।
घेराबंदी का तोड़ जरूरी
आप की निगाहें साल 2027 के चुनाव जीतकर सत्ता वापसी पर है मगर भाजपा फिलहाल आप समेत अन्य दलों के लिए भी कसमसाहट पैदा कर रही है। आप ने सभी दलों के नेताओं को भाजपाई बनने के लिए खुला न्योता दे दिया है। आप को यदि अपना लक्ष्य हासिल करना है तो अपनों को संभालते हुए इस घेराबंदी को तोड़ना होगा क्योंकि यदि पार्टी बिखरती है और संगठन कमजोर होता है तो आप की चुनौती और बढ़ जाएगी।
गद्दारों के जाने पर बधाइयां मिल रहीं : सीएम
आप बहुत ही अनुशासित पार्टी है। भाजपा अपने मंसूबों में कभी कामयाब नहीं हो पाएगी क्योंकि पंजाबी यदि किसी के साथ खड़े हो जाएं तो उन्हें हिलाना आसान नहीं होता। इस घटनाक्रम के बाद तो मुझे कार्यकर्ताओं, नेताओं, मंत्रियों और विधायकों से गद्दारों के पार्टी छोड़ने की बधाइयां मिल रही हैं। कार्यकर्ताओं का जोश मेरा हौसला बढ़ा रहा है। -भगवंत सिंह मान, मुख्यमंत्री, पंजाब
इस उठापटक से न तो पार्टी कार्यकर्ता व नेता भटकें और न ही मकसद। इसके लिए पार्टी हाईकमान बहुत गंभीर है। इस घटनाक्रम के बाद सीएम कार्यकर्ताओं से रूबरू होकर उन्हें यह कहकर समझा रहे हैं कि आप एक समुद्र है और यदि कोई उसमें से एक गड़वी (लोटा) पानी भर ले तो समुद्र को फर्क नहीं पड़ता
बल्कि गड़वी की औकात मालूम चल जाती है कि उसे कितना पानी चाहिए था। चार-छह नेताओं के जाने से पार्टी का कुछ नहीं बिगड़ता लिहाजा हौसला बनाएं रखें और चुनाव से पहले सरकार के विकास कार्य घर-घर तक पहुंचाएं।
घेराबंदी का तोड़ जरूरी
आप की निगाहें साल 2027 के चुनाव जीतकर सत्ता वापसी पर है मगर भाजपा फिलहाल आप समेत अन्य दलों के लिए भी कसमसाहट पैदा कर रही है। आप ने सभी दलों के नेताओं को भाजपाई बनने के लिए खुला न्योता दे दिया है। आप को यदि अपना लक्ष्य हासिल करना है तो अपनों को संभालते हुए इस घेराबंदी को तोड़ना होगा क्योंकि यदि पार्टी बिखरती है और संगठन कमजोर होता है तो आप की चुनौती और बढ़ जाएगी।
गद्दारों के जाने पर बधाइयां मिल रहीं : सीएम
आप बहुत ही अनुशासित पार्टी है। भाजपा अपने मंसूबों में कभी कामयाब नहीं हो पाएगी क्योंकि पंजाबी यदि किसी के साथ खड़े हो जाएं तो उन्हें हिलाना आसान नहीं होता। इस घटनाक्रम के बाद तो मुझे कार्यकर्ताओं, नेताओं, मंत्रियों और विधायकों से गद्दारों के पार्टी छोड़ने की बधाइयां मिल रही हैं। कार्यकर्ताओं का जोश मेरा हौसला बढ़ा रहा है। -भगवंत सिंह मान, मुख्यमंत्री, पंजाब
