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Chandigarh News: घग्गर दरिया में बह रहा जहरीला पानी, इलाक़े की धरती और स्वास्थ्य को खतरा
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मानसा। मानसा जिले के सरदूलगढ़ में गुजरते घग्गर दरिया का पानी अब लोगों के लिए चिंता का विषय बन गया है। यह पानी पहले क्षेत्र के लिए वरदान माना जाता था, लेकिन अब यह भूमि और स्वास्थ्य के लिए संकट बन चुका है। घग्गर में बहने वाला जहरीला पानी न केवल पानी के स्रोत को दूषित कर रहा है, बल्कि इससे आसपास के 40 गांवों के लोग भी स्वास्थ्य समस्याओं का सामना कर रहे हैं।
घग्गर दरिया जो हिमाचल प्रदेश से लेकर हरियाणा तक फैला हुआ है, में फैक्ट्रियों और उद्योगों द्वारा गिराए गए गंदे पानी के कारण कैंसर, पीलिया और अन्य गंभीर बीमारियों का खतरा उत्पन्न हो गया है। घग्गर बचाओ संघर्ष समिति ने चेतावनी दी है कि अगर इस पर नियंत्रण नहीं पाया गया तो आने वाले समय में यह समस्या और भी गंभीर हो सकती है। समिति के नेता डॉ. बिक्करजीत सिंह साधुवाला ने कहा कि घग्गर में फैक्टरियों द्वारा छोड़ा गया जहरीला पानी अब इलाके के लोगों के लिए घातक साबित हो रहा है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि प्रशासन और सरकार इस गंभीर समस्या से आंखें मूंदे हुए हैं। जानकारों का कहना है कि घग्गर के पानी में जिस तरह से जहरीला पानी छोड़ा जा रहा है, उससे न केवल मनुष्यों के लिए, बल्कि पशु, पक्षी और वनस्पति भी प्रभावित हो रहे हैं।
सरकारों में इस मुद्दे पर कोई ठोस कदम नहीं उठाए: सोढ़ी
शिरोमणि अकाली दल के जिला अध्यक्ष जतिंद्र सिंह सोढ़ी ने बताया कि इस समस्या को रोकने के लिए मरहूम मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल के नेतृत्व में एक एसआईअी का गठन किया गया था जो घग्गर के पानी की स्थिति पर निगरानी रखता था लेकिन हाल की सरकारों में इस मुद्दे पर कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए।
कुछ हद तक नियंत्रण पाया गया: गुरप्रीत सिंह
आम आदमी पार्टी के विधायक गुरप्रीत सिंह बनांवाली ने भी इस समस्या पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि पिछले तीन सालों में सरकार ने इस समस्या को लेकर कुछ सख्त फैसले लिए थे, जिससे घग्गर में गंदा पानी आने पर कुछ हद तक नियंत्रण पाया गया था। हालांकि अभी भी इस मुद्दे पर लगातार कार्रवाई की जरूरत है।
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घग्गर दरिया जो हिमाचल प्रदेश से लेकर हरियाणा तक फैला हुआ है, में फैक्ट्रियों और उद्योगों द्वारा गिराए गए गंदे पानी के कारण कैंसर, पीलिया और अन्य गंभीर बीमारियों का खतरा उत्पन्न हो गया है। घग्गर बचाओ संघर्ष समिति ने चेतावनी दी है कि अगर इस पर नियंत्रण नहीं पाया गया तो आने वाले समय में यह समस्या और भी गंभीर हो सकती है। समिति के नेता डॉ. बिक्करजीत सिंह साधुवाला ने कहा कि घग्गर में फैक्टरियों द्वारा छोड़ा गया जहरीला पानी अब इलाके के लोगों के लिए घातक साबित हो रहा है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि प्रशासन और सरकार इस गंभीर समस्या से आंखें मूंदे हुए हैं। जानकारों का कहना है कि घग्गर के पानी में जिस तरह से जहरीला पानी छोड़ा जा रहा है, उससे न केवल मनुष्यों के लिए, बल्कि पशु, पक्षी और वनस्पति भी प्रभावित हो रहे हैं।
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सरकारों में इस मुद्दे पर कोई ठोस कदम नहीं उठाए: सोढ़ी
शिरोमणि अकाली दल के जिला अध्यक्ष जतिंद्र सिंह सोढ़ी ने बताया कि इस समस्या को रोकने के लिए मरहूम मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल के नेतृत्व में एक एसआईअी का गठन किया गया था जो घग्गर के पानी की स्थिति पर निगरानी रखता था लेकिन हाल की सरकारों में इस मुद्दे पर कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए।
कुछ हद तक नियंत्रण पाया गया: गुरप्रीत सिंह
आम आदमी पार्टी के विधायक गुरप्रीत सिंह बनांवाली ने भी इस समस्या पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि पिछले तीन सालों में सरकार ने इस समस्या को लेकर कुछ सख्त फैसले लिए थे, जिससे घग्गर में गंदा पानी आने पर कुछ हद तक नियंत्रण पाया गया था। हालांकि अभी भी इस मुद्दे पर लगातार कार्रवाई की जरूरत है।
