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CG News: सरगुजा के पहाड़ी गांवों में मलेरिया की दस्तक, 39 मरीज मिले; स्वास्थ्य विभाग का सघन जांच अभियान जारी
Sat, 08 Aug 2026 12:32 PM IST
अंबिकापुर ब्यूरो
अमर उजाला नेटवर्क, अंबिकापुर
अमर उजाला नेटवर्क, अंबिकापुर
Published by: अंबिकापुर ब्यूरो
Updated Sat, 08 Aug 2026 12:32 PM IST
सार
उदयपुर क्षेत्र के कई दूरस्थ गांवों में मलेरिया के 39 मरीज मिलने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने जांच और निगरानी अभियान तेज किया है। 6 अगस्त को 75 लोगों की जांच में केवल एक संक्रमित मिला। सीएमएचओ ने मौजूदा स्थिति को नियंत्रण में बताया है।
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प्रभावित क्षेत्र में घूम-घूमकर जांच करती स्वास्थ्य विभाग की टीम।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
छत्तीसगढ़ के पहाड़ी और दूरस्थ गांवों में मलेरिया संक्रमण के मामलों ने स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ाई है। अब तक 39 मरीजों में मलेरिया की पुष्टि हुई है, हालांकि हालिया जांच में संक्रमण के मामलों में कमी सामने आई है। विभाग की टीमें प्रभावित गांवों में घर-घर सर्वे और जांच कर रही हैं।
सरगुजा जिले के उदयपुर विकासखंड के दूरस्थ और पहाड़ी इलाकों में मलेरिया संक्रमण के मामले सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने निगरानी और जांच अभियान तेज कर दिया है। क्षेत्र के अलग-अलग गांवों में अब तक 39 लोगों में मलेरिया की पुष्टि हुई है। हालांकि, हालिया जांच में संक्रमण के मामलों में कमी सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने स्थिति नियंत्रण में होने का दावा किया है।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार उदयपुर क्षेत्र के पीजीवीटी ग्राम मतरिंगा, खर्रानगर, मुसरडांड, मुकना पहाड़, बारोपहाड़, बकोई और सेमीघोघरा में मलेरिया के मामले सामने आए हैं। 26 जुलाई को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र उदयपुर की ओर से भेजी गई रिपोर्ट में 31 मरीजों के संक्रमित होने की जानकारी दी गई थी। इसके बाद हुई जांच में यह संख्या बढ़कर 39 हो गई। जांच में सभी संक्रमित मरीजों में प्लाज्मोडियम फाल्सीपेरम (PF) मलेरिया की पुष्टि हुई है। संक्रमितों में छोटे बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक शामिल हैं। क्षेत्र में सबसे अधिक मामले मतरिंगा, मुसरडांड और खर्रानगर में सामने आए हैं।
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मलेरिया के मामलों को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग की टीमें प्रभावित गांवों में लगातार सर्वे कर रही हैं। स्वास्थ्यकर्मी घर-घर जाकर बुखार और मलेरिया के लक्षण वाले लोगों की पहचान कर रहे हैं। संदिग्ध मरीजों की मौके पर ही आरडीटी किट से जांच की जा रही है, ताकि संक्रमण की पुष्टि होने पर तत्काल उपचार शुरू किया जा सके। संक्रमित मरीजों के घरों में मच्छरदानी का वितरण भी किया जा रहा है। विभाग के मुताबिक पॉजिटिव पाए गए मरीजों का निर्धारित उपचार प्रोटोकॉल के तहत इलाज शुरू किया गया है और उनकी स्वास्थ्य स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।
सीएमएचओ सरगुजा पीएस मार्को ने बताया कि करीब एक महीने के दौरान प्रभावित क्षेत्र में 39 मलेरिया मरीज मिले हैं। हालांकि, 6 अगस्त को स्वास्थ्य विभाग की टीम ने प्रभावित क्षेत्र में 75 लोगों के सैंपल लिए थे, जिनमें केवल एक व्यक्ति की रिपोर्ट पॉजिटिव आई। सीएमएचओ ने कहा कि फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है। स्वास्थ्य विभाग की आरएचओ टीमें प्रभावित क्षेत्रों में लगातार भ्रमण कर रही हैं और जांच-पड़ताल का सिलसिला जारी है।
स्थिति की निगरानी के लिए सीएमएचओ पीएस मार्को, एसडीएम रामराज सिंह, मलेरिया सुपरवाइजर श्रवण श्रीवास सहित स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी-कर्मचारी प्रभावित गांवों का दौरा कर रहे हैं। ग्रामीणों को मच्छरों से बचाव के उपाय अपनाने, बुखार होने पर तत्काल जांच कराने और चिकित्सकीय सलाह के अनुसार दवा लेने की समझाइश दी जा रही है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार क्षेत्र में मलेरिया संक्रमण के मामले 6 मई से सामने आने शुरू हुए थे। इसके बाद अलग-अलग गांवों में लगातार जांच कर मरीजों की पहचान की गई। विभाग का कहना है कि संवेदनशील क्षेत्रों में सर्वे, जांच, उपचार और निगरानी का अभियान आगे भी जारी रहेगा।
दूरस्थ और पहाड़ी क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं की सीमित पहुंच को देखते हुए विभाग ने इन गांवों को विशेष निगरानी में रखा है। स्वास्थ्य अमले का फोकस समय पर जांच, संक्रमित मरीजों के उपचार और मच्छरों से बचाव के उपायों पर है। विभाग का कहना है कि हालिया सैंपलिंग में संक्रमण की दर कम मिली है, जिससे फिलहाल स्थिति में सुधार के संकेत हैं।
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सरगुजा जिले के उदयपुर विकासखंड के दूरस्थ और पहाड़ी इलाकों में मलेरिया संक्रमण के मामले सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने निगरानी और जांच अभियान तेज कर दिया है। क्षेत्र के अलग-अलग गांवों में अब तक 39 लोगों में मलेरिया की पुष्टि हुई है। हालांकि, हालिया जांच में संक्रमण के मामलों में कमी सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने स्थिति नियंत्रण में होने का दावा किया है।
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स्वास्थ्य विभाग के अनुसार उदयपुर क्षेत्र के पीजीवीटी ग्राम मतरिंगा, खर्रानगर, मुसरडांड, मुकना पहाड़, बारोपहाड़, बकोई और सेमीघोघरा में मलेरिया के मामले सामने आए हैं। 26 जुलाई को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र उदयपुर की ओर से भेजी गई रिपोर्ट में 31 मरीजों के संक्रमित होने की जानकारी दी गई थी। इसके बाद हुई जांच में यह संख्या बढ़कर 39 हो गई। जांच में सभी संक्रमित मरीजों में प्लाज्मोडियम फाल्सीपेरम (PF) मलेरिया की पुष्टि हुई है। संक्रमितों में छोटे बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक शामिल हैं। क्षेत्र में सबसे अधिक मामले मतरिंगा, मुसरडांड और खर्रानगर में सामने आए हैं।
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मलेरिया के मामलों को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग की टीमें प्रभावित गांवों में लगातार सर्वे कर रही हैं। स्वास्थ्यकर्मी घर-घर जाकर बुखार और मलेरिया के लक्षण वाले लोगों की पहचान कर रहे हैं। संदिग्ध मरीजों की मौके पर ही आरडीटी किट से जांच की जा रही है, ताकि संक्रमण की पुष्टि होने पर तत्काल उपचार शुरू किया जा सके। संक्रमित मरीजों के घरों में मच्छरदानी का वितरण भी किया जा रहा है। विभाग के मुताबिक पॉजिटिव पाए गए मरीजों का निर्धारित उपचार प्रोटोकॉल के तहत इलाज शुरू किया गया है और उनकी स्वास्थ्य स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।
सीएमएचओ सरगुजा पीएस मार्को ने बताया कि करीब एक महीने के दौरान प्रभावित क्षेत्र में 39 मलेरिया मरीज मिले हैं। हालांकि, 6 अगस्त को स्वास्थ्य विभाग की टीम ने प्रभावित क्षेत्र में 75 लोगों के सैंपल लिए थे, जिनमें केवल एक व्यक्ति की रिपोर्ट पॉजिटिव आई। सीएमएचओ ने कहा कि फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है। स्वास्थ्य विभाग की आरएचओ टीमें प्रभावित क्षेत्रों में लगातार भ्रमण कर रही हैं और जांच-पड़ताल का सिलसिला जारी है।
स्थिति की निगरानी के लिए सीएमएचओ पीएस मार्को, एसडीएम रामराज सिंह, मलेरिया सुपरवाइजर श्रवण श्रीवास सहित स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी-कर्मचारी प्रभावित गांवों का दौरा कर रहे हैं। ग्रामीणों को मच्छरों से बचाव के उपाय अपनाने, बुखार होने पर तत्काल जांच कराने और चिकित्सकीय सलाह के अनुसार दवा लेने की समझाइश दी जा रही है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार क्षेत्र में मलेरिया संक्रमण के मामले 6 मई से सामने आने शुरू हुए थे। इसके बाद अलग-अलग गांवों में लगातार जांच कर मरीजों की पहचान की गई। विभाग का कहना है कि संवेदनशील क्षेत्रों में सर्वे, जांच, उपचार और निगरानी का अभियान आगे भी जारी रहेगा।
दूरस्थ और पहाड़ी क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं की सीमित पहुंच को देखते हुए विभाग ने इन गांवों को विशेष निगरानी में रखा है। स्वास्थ्य अमले का फोकस समय पर जांच, संक्रमित मरीजों के उपचार और मच्छरों से बचाव के उपायों पर है। विभाग का कहना है कि हालिया सैंपलिंग में संक्रमण की दर कम मिली है, जिससे फिलहाल स्थिति में सुधार के संकेत हैं।