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सिस्टम पर उठे सवाल: बलरामपुर के भईसापाठ में सड़क गायब, बीमार महिला को झलगी में लादकर अस्पताल पहुंचे ग्रामीण
Tue, 11 Aug 2026 10:52 AM IST
अंबिकापुर ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बलरामपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बलरामपुर
Published by: अंबिकापुर ब्यूरो
Updated Tue, 11 Aug 2026 10:52 AM IST
सार
विकास के दावों के बीच भईसापाठ से ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था की ऐसी तस्वीर सामने आई है, जो व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती है। 50 वर्षीय महिला की तबीयत बिगड़ने पर एंबुलेंस गांव तक नहीं पहुंच सकी। ग्रामीणों ने उन्हें झलगी में उठाकर अस्पताल पहुंचाया।
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झलगी में मरीज को ले जाते ग्रामीण
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
सरकार गांव-गांव बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं और सड़क कनेक्टिविटी उपलब्ध कराने के दावे कर रही है लेकिन बलरामपुर जिले के कुसमी जनपद पंचायत क्षेत्र के भईसापाठ से सामने आई तस्वीर इन दावों की जमीनी हकीकत पर सवाल खड़े करती है। यहां एक बीमार महिला को अस्पताल तक पहुंचाने के लिए ग्रामीणों को झलगी का सहारा लेकर करीब दो किलोमीटर तक पैदल चलना पड़ा। बताया जा रहा है कि सड़क की सुविधा नहीं होने के कारण एंबुलेंस समेत कोई भी वाहन बस्ती तक नहीं पहुंच सका।
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अचानक बिगड़ी महिला की तबीयत
जानकारी के अनुसार करीब 50 वर्षीय रदनी की सोमवार सुबह अचानक तबीयत बिगड़ गई। परिजनों ने उन्हें अस्पताल ले जाने की तैयारी की लेकिन बस्ती तक पहुंचने के लिए पक्की और सुगम सड़क नहीं होने के कारण एंबुलेंस या कोई अन्य वाहन गांव तक नहीं पहुंच सका। ऐसे में ग्रामीणों ने मजबूरी में झलगी का सहारा लिया। दो ग्रामीणों ने महिला को झलगी में उठाकर करीब दो किलोमीटर तक पैदल सफर तय किया और उन्हें अस्पताल पहुंचाया।
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ग्रामीण क्षेत्रों में किसी व्यक्ति के अचानक गंभीर रूप से बीमार पड़ने पर समय पर चिकित्सा सुविधा और अस्पताल तक पहुंचना सबसे जरूरी होता है। लेकिन यदि सड़क की स्थिति ऐसी हो कि एंबुलेंस तक गांव में पहुंचना मुश्किल हो जाए और मरीज को ग्रामीणों के कंधों के सहारे ले जाना पड़े, तो स्वास्थ्य और सड़क सुविधाओं को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है। भईसापाठ से सामने आई यह तस्वीर केवल एक मरीज को झलगी में ले जाने का मामला नहीं है, बल्कि दुर्गम ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क और स्वास्थ्य सुविधाओं की जमीनी स्थिति को भी सामने लाती है।
आपात स्थिति में बढ़ सकता है खतरा
ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क और स्वास्थ्य सुविधाओं का सीधा संबंध लोगों की सुरक्षा और जीवन से है। गंभीर बीमारी या आपात स्थिति में अस्पताल पहुंचने में होने वाली देरी मरीज के लिए जोखिम बढ़ा सकती है। ऐसे में केवल योजनाओं और सुविधाओं के दावों के बजाय जमीनी स्तर पर बेहतर सड़क कनेक्टिविटी और स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करना जरूरी है।
अब देखना होगा कि जिला प्रशासन, पंचायत के जिम्मेदार जनप्रतिनिधि और स्थानीय नेता भईसापाठ की इस समस्या को कितनी गंभीरता से लेते हैं और ग्रामीणों को आवागमन तथा स्वास्थ्य सुविधाओं की बेहतर पहुंच उपलब्ध कराने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।