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अब रायगढ़ में मिली अफीम की खेती: भूपेश बघेल बोले- सीएम, गृहमंत्री की चुप्पी बता रही इस खेल का असली सरगना कौन?

अमर उजाला नेटवर्क, रायगढ़ Published by: Lalit Kumar Singh Updated Fri, 20 Mar 2026 04:54 PM IST
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सार

Opium Farming in CG: छत्तीसगढ़ में नशे की खेती का खुलासा थमने का नाम नहीं ले रहा है। एक के बाद एक जहरीली खेती का खुलासा हो रहा है। 

Bhupesh baghel on Opium Farming in tamnar Raigarh cg
ग्रॉफिक्स: अमर उजाला डिजिटल - फोटो : CG News
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विस्तार

Opium Farming in CG: छत्तीसगढ़ में नशे की खेती का खुलासा थमने का नाम नहीं ले रहा है। एक के बाद एक जहरीली खेती का खुलासा हो रहा है। मामले में जमकर सियासत हो रही है। प्रदेश के दुर्ग, बलरामपुर के बाद अब रायगढ़ के तमानार में अफीम की खेती मिली है। इस संबंध में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने राज्य सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि बीजेपी सरकार में गैरकानूनी गतिविधियों को बढ़ावा मिल रहा है। प्रदेश के युवाओं को नशे की ओर धकेला जा रहा है।
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उन्होंने कहा कि ट्वीट कर कहा कि भाजपा सरकार के संरक्षण में प्रदेशभर में अफीम की खेती का पर्दाफ़ाश जारी है। अब रायगढ़ के तमनार थाना क्षेत्र के आमाघाट में अफीम की खेती पकड़ी गई है। जिस तरीके से प्रदेश में सूखे नशे के कारोबार को अंजाम दिया जा रहा है, यह घातक है। मुख्यमंत्री और गृहमंत्री की चुप्पी बताती है कि इस खेल का असली “सरगना” कौन है?
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पूर्व सीएम बघेल ने दावा करते हुए कहा कि मुझे जानकारी मिली थी कि धमतरी जिले के नगरी-सिहावा क्षेत्र में भी अफीम की खेती की जा रही है। एक भाजपा नेता के बड़े फार्महाउस में करीब 20 एकड़ जमीन के बीच अफीम उगाई जा रही थी। जैसे ही उन्होंने इस मामले को उठाया, संबंधित जगह पर अफीम की फसल को बुलडोजर चला दिया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा से जुड़े लोग पूरे प्रदेश को नशे में डुबाने की कोशिश कर रहे हैं।




तमनार में अफीम की खेती का भंडाफोड़
रायगढ़ के तमनार में 20 मार्च को अफीम की खेती की जानकारी मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंचकर कार्रवाई में जुटी है। यहां के ग्राम आमाघाट गांव में पुलिस ने कार्रवाई करते हुए अवैध अफीम की खेती का भंडाफोड़ किया है। बताया जाता है कि उक्त खेत आमाघाट निवासी एक किसान का है,जिसमें तरबूज, ककड़ी और अन्य सब्जियों की खेती भी की जा रही थी। चोरी-छिपे लगभग 70 डिसमिल में अफीम उगाया गया था। पुलिस आरोपी मार्शल सांगा निवासी झारखंड को हिरासत में लेकर पूछताछ कर रही है। 


यह भी पढ़ें:  Raigarh : अफीम की खेती का खुलासा, 70 डिसमिल में हो रही थी खेती, एक आरोपी को पुलिस ने किया गिरफ्तार



हिरासत में लेकर आरोपी से पूछताछ
मामले में एसएसपी शशिमोहन सिंह ने बताया कि पुलिस को सूचना मिली कि आमघाट इलाके में गोपनीय तरीके से अफीम की खेती की जा रही है। तमनार और पूंजीपथरा में पुलिस कल शाम से ही मुखबिर लगाकर पतासाजी की जा रही थी। रात में मार्शल सांगा जो कि सुषमा खलखो का रिश्तेदार है। मार्सल सांगा झारखंड रहने वाला है और पिछले कुछ साल से यहां आकर रह रहा है। अपने अन्य साथियों के साथ यहां अफीम की खेती कर रहा था। कल रात से आरोपी मार्सल सांगा को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। जिस जमीन पर अफीम की खेती हो रही है वह निजी है या शासकीय है, इसकी भी जांच की जा रही है। इस मामले में और कितने आरोपी है वह जांच के बाद ही पता चलेगा।


जानें अब तक कहां-कहां मिली ये जहरीली खेती- 

दुर्ग में बीजेपी नेता के खेत में पकड़ी गई नशे की खेती
बता दें कि सबसे पहले प्रदेश के दुर्ग जिले में करीब पांच एकड़ में अफीम की खेती पकड़ी गई थी, जहां समोदा गांव में बीजेपी नेता विनायक ताम्रकार के खेत में अवैध अफीम की खेती हो रही थी। इस मामले में बड़ी लापरवाही सामने आने के बाद कलेक्टर ने ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी एकता साहू को निलंबित कर दिया गया है। वहीं पुलिस ने अब तक चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इनमें विकास बिश्नोई (जोधपुर, राजस्थान), विनायक ताम्रकार (तेमरापारा, दुर्ग) और मनीष उर्फ गोलू ठाकुर (समोदा), छोटू राम शामिल हैं। जांच में सामने आया कि अफीम की खेती के लिए बीज उपलब्ध कराने में छोटू राम की अहम भूमिका थी, जिसे राजस्थान से गिरफ्तार कर लिया गया है।

बलरामपुर में दो स्थानों पर मिली जहरीली खेती
दुर्ग के बाद बलरामपुर जिले के दो स्थानों पर अफीम की खेती पकड़ी गई थी। झारखंड सीमा से लगे करोंधा थाना क्षेत्र के चंदाडांडी गांव और कुसमी थाना क्षेत्र के त्रिपुरी गांव में करीब तीन एकड़ जमीन पर अवैध अफीम की खेती की जा रही थी। पुलिस ने अफीम की खेती करने के मामले में किसान सहादुर नगेशिया और टुईला राम को अरेस्ट किया है। टुईला राम ने पुलिस को बताया कि उसके पास खेत नहीं है। उसने गांव के ही रहने वाले रोपना से छह हजार रुपये सालाना देने के शर्त पर खेत को लीज पर लिया था। उसने खेत पर मक्के की फसल लगाई लेकिन उसे फायदा नहीं हुआ। इसके बाद दोनों किसानों का संपर्क झारखंड के चतरा जिले के रहने वाले भूपेंद्र उरांव से हुआ। उसने कहा था कि मसालों की खेती करने से फायदा होगा। 

मामले में भूपेंद्र उरांव ने कहा कि अगर मैं खेत में मसाले की खेती कराऊंगा कतो मुनाफे में कुछ हिस्सा लूंगा, जिसके बाद दोनों किसान तैयार हो गए। भूपेन्द्र ने अफीम की फसल दो किस्तों में बोई गई थी। पहले सहादुर नगेशिया के खेत में अफीम की फसल लगाई गई। यहां अफीम के डोडों पर छह से सात चीरे लगे थे। जिसका मतलब है कि बड़ी मात्रा में अफीम निकाली जा चुकी है। उसके बाद टुईला राम के खेत में अफीम लगाई गई। इसके खेत में अभी फसल में डोडे लगे हुए हैं और कुछ पौधों में डोडे लग रहे हैं। कई डोडों में चीरा भी लगाया गया था। दोनों किसानों ने बताया कि झारखंड के चार से पांच लोग फसल की पहरेदारी सहित अन्य काम करते थे। खेतों में काम भी वही लोग करते थे। पुलिस के पहुंचने से पहले ही वे मौके से फरार हो गए।
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