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CG: छत्तीसगढ़ में स्मार्ट मीटर से जनता त्रस्त; बढ़ी बिजली बिल से परेशान, बोली- यूपी की तरह वापस ले लो सरकार!

Tue, 28 Jul 2026 10:01 PM IST
Lalit Kumar Singh Lalit Kumar Singh
Updated Tue, 28 Jul 2026 10:01 PM IST
सार

Smart Meters Protest in CG: राजधानी रायपुर समेत प्रदेश के कई जिलों में इस मामले को लेकर कई सामाजिक संगठन धरना प्रदर्शन कर रहे हैं। इन प्रदर्शनों को कांग्रेस ने हाईजैक कर अपना खुला समर्थन दे रही है। दूसरी ओर बीजेपी नेता लोगों को पूरी तरह से समझा नहीं पा रहे हैं। वे सफाई देने में ही लगे हुए हैं। 

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CG News: People demand to state government withdraw smart meters
ग्रॉफिक्स: अमर उजाला डिजिटल - फोटो : Amar Ujala Digital

विस्तार

Smart Meters Protest in CG: छत्तीसगढ़ में स्मार्ट मीटर को लेकर प्रदेश की सियासत गरमाई हुई है। कांग्रेस और आम आदमी पार्टी जहां इस जनहित से जुड़े मुद्दे को लेकर सत्तापक्ष यानी बीजेपी को घेरने में लगी हैं। राज्य सरकार पर लगातार हमलावर हैं। राजधानी रायपुर समेत प्रदेश के कई जिलों में इस मामले को लेकर कई सामाजिक संगठन धरना प्रदर्शन कर रहे हैं। इन प्रदर्शनों को कांग्रेस ने हाईजैक कर अपना खुला समर्थन दे रही है।
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दूसरी ओर बीजेपी नेता लोगों को पूरी तरह से समझा नहीं पा रहे हैं। वे सफाई देने में ही लगे हुए हैं। कुछ लोगों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि कई बीजेपी नेताओं के घर भी हजारों और लाखों में बिजली बिल आई है। इस वजह से वो भी परेशान हैं पर सरकार में होने से अपने दर्द को बयां नहीं कर पा रहे हैं। 
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सबसे बड़ी परेशानी आम जतना को हो रही हैं। आम जनता स्मार्ट मीटर लगने से भारी त्रस्त है। जब से लोगों के घरों में स्मार्ट मीटर लगे हैं, तब से बहुत ज्यादा बिजली बिल आ रही है। कहीं एक गुना,दो गुना,तो कहीं तीन गुना बिजली बिल आ रही है। बिजली बिल वृद्धि को लेकर लोग बेहद परेशान हैं। बढ़ी हुई बिलजी बिल को लेकर लोग इस कदर आक्रोशित हैं कि वे स्मार्ट मीटर के नाम पर चिढ़ रहे हैं और इसे कबाड़ में फेंकने की बात भी कर रहे हैं। लोगों ने राज्य सरकार से मामले में हस्तक्षेप कर बिजली विभाग से स्मार्ट मीटर वापस लेने के लिये आदेश जारी करने की मांग की है। 







इनका कहना है
स्मार्ट मीटर लगने पर बढ़ी बिजली बिल से प्रभावित लोगों ने अमर उजाला से खास चर्चा में कहा कि हर महीने बिजली बिल बढ़ी हुई आ रही है। उनके घर का बजट बिगड़ रहा है। इससे लोग मानसिक रूप से काफी परेशान हैं। लोगों ने सरकार से स्मार्ट मीटर वापस लेने की मांग की है। यूपी की तर्ज पर स्मार्ट मीटर वापस लेने की मांग की है। लोगों का कहना है कि छत्तीसगढ़ सरकार यूपी सरकार की तरह स्मार्ट मीटर वापस लें। इसे लेकर जल्द आदेश जारी करें ताकि लोगों को भारी भरकम बिजली बिल से निजात मिल सके। वहीं लोगों से जो बढ़ी हुई बिजली बिल पेमेंट करवाया गया है, उसे सरकार यूपी की तरह लोगों के खाते में किश्तों में  भुगतान करवायें। लोगों ने यह भी कहा कि बिजली कंपनी यदि ऐसा नहीं कर सकती, तो उनके पुराने मीटर ही उनके घरों में दोबारा लगा दिये जाये, ताकि पुराने जैसे बिजली बिल आती रहे और उन्हें समस्या न हो। 


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प्रदेश में चल रहा विरोध प्रदर्शन 
स्मार्ट मीटर को लेकर लेकर प्रदेशभर में विरोध प्रदर्शन चल रहा है। कांग्रेस सभी जिला मुख्यालयों में प्रदर्शन कर रही है। आम आदमी पार्टी भी मोर्चा खोल चुकी हैं। कई सामाजिक संगठन सड़क पर उतर चुके हैं। दूसरी ओर बिजली मीटर रीडरों ने भी राजधानी रायपुर के डंगनिया में पिछले दिनों विरोध किये थे और अन्य जगहों पर भी कर रहे हैं। प्रदेश में स्मार्ट बिजली व्यवस्था लागू होने से कई साल से कार्यरत मीटर रीडरों के सामने रोजी-रोटी की समस्या खड़ी हो गई है। कई जिलों में महीनों से मानदेय भुगतान लंबित है। 







स्मार्ट मीटर से लोगों का जीना हराम: भूपेश बघेल
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने स्मार्ट मीटर को लेकर कहा कि स्मार्ट मीटर से लोगों का जीना हराम हो गया है। उन्होंने दावा किया कि स्मार्ट मीटर लगाना ऐच्छिक है। इसे लगाना अनिवार्य नहीं है। राज्य सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि प्रदेश में 'अंधेर नगरी, चौपट राजा' जैसी स्थिति हो गई है। पूरे सिस्टम में आरएसएस के लोग बैठे हुए हैं। बीजेपी की नीयत ठीक नहीं है। यदि किसी योजना को लागू करने वाला व्यक्ति ही गलत है तो उसका लाभ लोगों तक नहीं पहुंच सकता।







अड़ियल रवैया छोड़े सरकार: धनजंय सिंह ठाकुर
प्रदेश कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता धनजंय सिंह ठाकुर ने कहा कि स्मार्ट मीटर से स्मार्ट तरीके से जनता की जेब खाली की जा रही है। स्मार्ट मीटर को जनता अब खुद उखाड़ कर फेंकने लगी है। स्मार्ट मीटर के कारण लोगों को लाखों का बिल भेजा रहा है। जिनके घरों में स्मार्ट मीटर लगने के पहले 300 रुपये, 400 रु महीना का बिल आता था, उन्हें अब 2500 से.4000 रुपये तक बिल भेजा जा रहा है। कई उपभोक्ताओं को हजारों एवं लाखों का बिल थमाया गया है। रायपुर के एक उपभोक्ता को 9 लाख 3 हजार 817 रुपये का बिल दिया गया है। बिजली के बिल को लेकर जनता भारी तनाव में हैं। ऐसे में सरकार को अड़ियल रवैया त्याग कर जनता की आवाज सुननी चाहिये। मीटर टेस्टिंग में भी स्मार्ट मीटर फैल हो गया है। स्मार्ट मीटर और सामान्य मीटर की रिडिंग में भारी अंतर पकड़ी गई है।


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बिजली विभाग का दावा: स्मार्ट मीटर से नहीं बढ़ती बिजली की खपत
दूसरी ओर बिजली विभाग का दावा है कि स्मार्ट मीटर से बिजली की खपत नहीं बढ़ती है। एक सर्वे में खपत का आधार स्मार्ट मीटर नहीं, बल्कि उपभोक्ताओं की वास्तविक खपत बताया गया है। तीन शहरों के सर्वे में मिले नतीजों को लेकर यह हवाला दिया गया है। छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी (CSPDCL) ने  स्मार्ट मीटर को लेकर फैलाये जा रहे अफवाहों के बीच प्रदेश के कई लोकल कार्यालयों में स्मार्ट मीटर लगे घरेलू उपभोक्ताओं की बिजली खपत का तीन माह का तुलनात्मक अध्ययन कराया है। मई, जून और जुलाई 2026 की खपत के विश्लेषण में यह सामने आया कि अधिकांश उपभोक्ताओं की बिजली खपत जुलाई में कम हुई है। रायपुर शहर क्षेत्र के 3 लाख 11 हजार 374 घरेलू स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं के अध्ययन में 1 जून से 26 जून 2026 के दौरान कुल बिजली खपत लगभग 10.85 करोड़ यूनिट दर्ज की गई थी, जबकि 1 जुलाई से 26 जुलाई 2026 के दौरान यह घटकर लगभग 7.77 करोड़ यूनिट रह गई। यानी कुल 28 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई। यदि 400 यूनिट से ज्यादा खपत करने वाले उपभोक्ताओं की बात करें, तो 1 लाख 21 हजार 135 उपभोक्ताओ के बिलों के विश्लेषण से मालूम हुआ है कि उनकी खपत में करीब 44 प्रतिशत की कमी आई है। इस खपत का आधार स्मार्ट मीटर नहीं बल्कि उपभोक्ताओं की वास्तविक खपत बताया गया है। ऐसे उपभोक्ता जिनके घर में स्मार्ट मीटर नहीं लगे थे, उनकी खपत में भी अप्रैल-मई-जून में पिछले वर्ष की तुलना में वृद्धि दर्ज हुई है। विभाग ने इस संबंध में उदाहरण भी पेश किये हैं।  



स्मार्ट मीटर को लेकर क्या हुआ था यूपी में ?
स्मार्ट मीटर को लेकर उत्तर प्रदेश में मचे बवाल पर यूपी की सरकार ने स्मार्ट प्रीपेड मीटर वापस लेने का फरमान जारी किया था। इसके बाद वहां स्मार्ट मीटर वापस लिये गये थे। लोगों से लिये गये एक्स्ट्रा रुपयों को सरकार ने उपभोक्ताओं के खाते में वापस डालने के लिये आदेश जारी किया था। इस पर लोगों ने राहत की सांस ली थी। लोगों ने बड़े पैमाने पर स्मार्ट मीटर को तोड़कर प्रदर्शन किया था। उत्तर प्रदेश सरकार ने प्रीपेड स्मार्ट मीटर की अनिवार्यता खत्म कर दी है और सभी स्मार्ट मीटरों को पोस्टपेड मोड में बदलने का फैसला लिया है। तकनीकी समस्याओं और बिलिंग में गड़बड़ी की लगातार आ रही शिकायतों के बाद यह बड़ा फैसला लिया गया है। 







आ रही थी ये दिक्कतें
स्मार्ट मीटर अचानक बिजली कटना, रिचार्ज करने के बाद भी बिजली चालू होने में देरी होना और भारी-भरकम बिल आना आम बात हो गई थी। इन्हीं परेशानियों को दूर करने के लिए, राज्य सरकार ने अनिवार्य प्रीपेड सिस्टम को खत्म कर दिया है और सभी यूजर्स को वापस पुराने और सुविधाजनक पोस्टपेड बिलिंग सिस्टम पर शिफ्ट कर दिया है।

जानें कैसे काम करता है स्मार्ट मीटर?
स्मार्ट मीटर असल में बिजली मापने की एक आधुनिक और डिजिटल मशीन है, जो आपके घर में होने वाली बिजली की खपत का हिसाब 'रियल-टाइम' में रखती है। यह पुराने जमाने के एनालॉग मीटरों से काफी अलग और एडवांस है, क्योंकि इसमें रीडिंग लेने के लिए किसी कर्मचारी को आपके घर आने की जरूरत नहीं पड़ती। यह मीटर खुद ही सारा डेटा सीधे बिजली विभाग के सर्वर पर भेज देता है। इस तकनीक का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इससे बिल बिल्कुल सटीक बनता है, जिससे गलत रीडिंग या 'मैनुअल एरर' जैसी इंसानी गलतियों की गुंजाइश खत्म हो जाती है। इसके अलावा स्मार्ट मीटर की एक बड़ी खासियत यह भी है कि बिजली विभाग इसे दफ्तर में बैठकर दूर से ही कंट्रोल कर सकता है। इससे लोड मैनेजमेंट और बिजली की निगरानी करना पहले के मुकाबले कहीं ज्यादा आसान और पारदर्शी हो गया है।

क्या है प्रीपेड सिस्टम?
प्रीपेड सिस्टम बिल्कुल आपके स्मार्टफोन के प्रीपेड सिम की तरह काम करता है। इसमें यूजर्स को बिजली के लिए एडवांस में पैसे डालने होते थे। जैसे ही मीटर का बैलेंस खत्म होता था, आपके घर की पावर सप्लाई अपने आप कट जाती थी। इसे बकाया बिलों की समस्या को खत्म करने के लिए लाया गया था, लेकिन खराब तकनीक और सही से लागू न होने के कारण यह एक फेल प्रोजेक्ट साबित हुआ।


 
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