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CG: राष्ट्रपति भवन के विशेष अतिथि बने बस्तर के मांझी-चालकी: बस्तर पंडुम-2026 के विजेताओं का हुआ विशेष सम्मान
Thu, 30 Jul 2026 06:43 PM IST
अमन कोशले
अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर
अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर
Published by: अमन कोशले
Updated Thu, 30 Jul 2026 06:43 PM IST
सार
सीएम के नेतृत्व में बस्तर पंडुम-2026 के विजेता प्रतिभागियों, परंपरागत जनजातीय नेतृत्व व्यवस्था के प्रतिनिधियों, पद्मश्री सम्मानित विभूतियों एवं विभिन्न क्षेत्रों के प्रतिनिधियों सहित 209 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल का राष्ट्रपति भवन में स्वागत किया गया।
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राष्ट्रपति ने स्वयं अतिथियों को भोजन परोसकर किया उनका सम्मान
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
बस्तर की समृद्ध जनजातीय संस्कृति और लोक परंपराओं को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिली है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में बस्तर पंडुम-2026 के विजेता कलाकारों, मांझी-चालकी, पद्म सम्मानित विभूतियों और विभिन्न क्षेत्रों के प्रतिनिधियों सहित 209 सदस्यीय दल ने राष्ट्रपति भवन का दौरा किया। इस दौरान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने सभी अतिथियों के सम्मान में विशेष भोज का आयोजन किया और स्वयं भोजन परोसकर उनका स्वागत किया।
राष्ट्रपति ने प्रतिनिधिमंडल से बातचीत करते हुए बस्तर की जनजातीय संस्कृति, लोककला, पारंपरिक सामाजिक व्यवस्था और बस्तर पंडुम के बारे में जानकारी ली। उन्होंने कहा कि बस्तर की सांस्कृतिक विरासत देश की अमूल्य धरोहर है और इसका संरक्षण सभी की जिम्मेदारी है।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के आग्रह पर राष्ट्रपति ने भविष्य में बस्तर दशहरा और बस्तर पंडुम में शामिल होने की इच्छा भी जताई। उन्होंने कहा कि बस्तर दशहरा से उनका विशेष भावनात्मक जुड़ाव है। राष्ट्रपति ने यह भी बताया कि उनके पिता भी मांझी थे, इसलिए जनजातीय समाज की परंपरागत व्यवस्था से उनका गहरा संबंध रहा है।
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राष्ट्रपति ने कहा कि बस्तर पंडुम जैसे आयोजन जनजातीय संस्कृति, लोककला और परंपराओं को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिला रहे हैं। ऐसे आयोजन युवाओं को अपनी संस्कृति से जोड़ने के साथ पर्यटन, रोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी बढ़ावा देते हैं।
उन्होंने कहा कि सरकार के प्रयासों और स्थानीय लोगों की भागीदारी से बस्तर अब शांति, विकास और समृद्धि की दिशा में आगे बढ़ रहा है। शिक्षा, सड़क, बिजली और अन्य बुनियादी सुविधाओं का विस्तार इस बदलाव का प्रमाण है। राष्ट्रपति ने मांझी और चालकी की भूमिका की भी सराहना करते हुए उन्हें समाज और प्रशासन के बीच मजबूत कड़ी बताया।
इस अवसर पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि उन्होंने पहली बार राष्ट्रपति भवन में बस्तर की पारंपरिक वेशभूषा में इतने बड़े जनजातीय प्रतिनिधिमंडल को एक साथ देखा है। यह भारत की सांस्कृतिक विविधता और जनजातीय गौरव का अनूठा उदाहरण है।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि यह पूरा अवसर छत्तीसगढ़ और विशेष रूप से बस्तर के लिए गर्व का क्षण है। उन्होंने कहा कि बस्तर की संस्कृति और लोक परंपराओं को देश के सर्वोच्च मंच पर सम्मान मिलना पूरे प्रदेश के लिए गौरव की बात है।
इस दौरान मुख्यमंत्री ने राष्ट्रपति को बस्तर की करीब 300 वर्ष पुरानी लोकगाथा 'झिटकू-मिटकी' पर आधारित विशेष कलाकृति स्मृति-चिह्न के रूप में भेंट की। प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रपति भवन का भ्रमण भी किया और वहां की ऐतिहासिक एवं संवैधानिक विरासत से जुड़ी जानकारियां प्राप्त की।
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राष्ट्रपति ने प्रतिनिधिमंडल से बातचीत करते हुए बस्तर की जनजातीय संस्कृति, लोककला, पारंपरिक सामाजिक व्यवस्था और बस्तर पंडुम के बारे में जानकारी ली। उन्होंने कहा कि बस्तर की सांस्कृतिक विरासत देश की अमूल्य धरोहर है और इसका संरक्षण सभी की जिम्मेदारी है।
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मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के आग्रह पर राष्ट्रपति ने भविष्य में बस्तर दशहरा और बस्तर पंडुम में शामिल होने की इच्छा भी जताई। उन्होंने कहा कि बस्तर दशहरा से उनका विशेष भावनात्मक जुड़ाव है। राष्ट्रपति ने यह भी बताया कि उनके पिता भी मांझी थे, इसलिए जनजातीय समाज की परंपरागत व्यवस्था से उनका गहरा संबंध रहा है।
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राष्ट्रपति ने कहा कि बस्तर पंडुम जैसे आयोजन जनजातीय संस्कृति, लोककला और परंपराओं को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिला रहे हैं। ऐसे आयोजन युवाओं को अपनी संस्कृति से जोड़ने के साथ पर्यटन, रोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी बढ़ावा देते हैं।
उन्होंने कहा कि सरकार के प्रयासों और स्थानीय लोगों की भागीदारी से बस्तर अब शांति, विकास और समृद्धि की दिशा में आगे बढ़ रहा है। शिक्षा, सड़क, बिजली और अन्य बुनियादी सुविधाओं का विस्तार इस बदलाव का प्रमाण है। राष्ट्रपति ने मांझी और चालकी की भूमिका की भी सराहना करते हुए उन्हें समाज और प्रशासन के बीच मजबूत कड़ी बताया।
इस अवसर पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि उन्होंने पहली बार राष्ट्रपति भवन में बस्तर की पारंपरिक वेशभूषा में इतने बड़े जनजातीय प्रतिनिधिमंडल को एक साथ देखा है। यह भारत की सांस्कृतिक विविधता और जनजातीय गौरव का अनूठा उदाहरण है।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि यह पूरा अवसर छत्तीसगढ़ और विशेष रूप से बस्तर के लिए गर्व का क्षण है। उन्होंने कहा कि बस्तर की संस्कृति और लोक परंपराओं को देश के सर्वोच्च मंच पर सम्मान मिलना पूरे प्रदेश के लिए गौरव की बात है।
इस दौरान मुख्यमंत्री ने राष्ट्रपति को बस्तर की करीब 300 वर्ष पुरानी लोकगाथा 'झिटकू-मिटकी' पर आधारित विशेष कलाकृति स्मृति-चिह्न के रूप में भेंट की। प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रपति भवन का भ्रमण भी किया और वहां की ऐतिहासिक एवं संवैधानिक विरासत से जुड़ी जानकारियां प्राप्त की।