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CG: स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी बोले- मलेरिया से एक भी मौत नहीं होने देंगे, एनॉलॉग पनीर पर सख्ती के निर्देश
Thu, 30 Jul 2026 05:37 PM IST
अमन कोशले
अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर
अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर
Published by: अमन कोशले
Updated Thu, 30 Jul 2026 05:37 PM IST
सार
छत्तीसगढ़ सरकार ने मलेरिया नियंत्रण अभियान तेज करते हुए 'एक भी मौत नहीं' का लक्ष्य तय किया है। स्वास्थ्य मंत्री ने स्वस्थ बस्तर अभियान की उपलब्धियां गिनाईं और प्रदेश में एनॉलॉग पनीर पर प्रभावी प्रतिबंध लागू करने के निर्देश दिए।
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स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने कहा कि प्रदेश सरकार का लक्ष्य मलेरिया से एक भी मौत नहीं होने देना है। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग गांव-गांव पहुंचकर जांच, उपचार और जागरूकता अभियान चला रहा है। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान के बेहतर परिणाम सामने आए हैं और लाखों लोगों को स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ मिला है।
रायपुर में आयोजित प्रेस वार्ता में स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान के तहत अब तक 34.29 लाख से अधिक लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण किया जा चुका है, जो लक्ष्य का करीब 99 प्रतिशत है। अभियान के दौरान मलेरिया, टीबी, सिकल सेल, कुष्ठ रोग और मुंह के कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों की समय पर पहचान कर इलाज शुरू किया गया। वहीं 60 हजार से अधिक गंभीर मरीजों को बेहतर इलाज के लिए बड़े अस्पतालों में रेफर किया गया। साथ ही 10,938 हाई-रिस्क गर्भवती महिलाओं की विशेष निगरानी और उपचार भी सुनिश्चित किया गया।
स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि हाल के दिनों में मलेरिया के कुछ मामले सामने आए हैं, लेकिन स्वास्थ्य विभाग पूरी सतर्कता के साथ काम कर रहा है। मितानिन, एएनएम और स्वास्थ्य कर्मी गांव-गांव जाकर जांच और दवा वितरण के साथ लोगों को जागरूक कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि समय पर जांच और इलाज से मलेरिया पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सकता है।
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उन्होंने बताया कि लगातार प्रयासों के कारण बस्तर संभाग में मलेरिया पॉजिटिविटी दर 4.60 प्रतिशत से घटकर 0.48 प्रतिशत रह गई है। वहीं प्रदेश का वार्षिक परजीवी सूचकांक (API) 5.21 से घटकर 0.90 हो गया है, जो मलेरिया नियंत्रण में बड़ी सफलता मानी जा रही है।
मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं की जानकारी देते हुए स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि पिछले ढाई वर्षों में प्रदेश में 11.89 लाख से अधिक संस्थागत प्रसव कराए गए हैं। प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के तहत गर्भवती महिलाओं की नियमित जांच और हाई-रिस्क मामलों की पहचान कर समय पर इलाज किया जा रहा है।
आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाने के लिए प्रदेश में 375 नई 108 संजीवनी एक्सप्रेस एम्बुलेंस शुरू की गई हैं। जनवरी 2024 से जून 2026 के बीच इन एम्बुलेंसों के माध्यम से 6.50 लाख से अधिक लोगों को समय पर चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई गई।
स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि प्रदेश के 1,051 स्वास्थ्य संस्थानों में आधुनिक पैथोलॉजी जांच सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं, जिससे दूर-दराज के क्षेत्रों के लोगों को भी समय पर जांच की सुविधा मिल रही है। साथ ही प्रदेश के सभी 10 मेडिकल कॉलेजों में पैरामेडिकल पाठ्यक्रम शुरू करने की तैयारी की जा रही है, ताकि स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए प्रशिक्षित मानव संसाधन तैयार किए जा सकें।
प्रेस वार्ता के दौरान स्वास्थ्य मंत्री ने खाद्य सुरक्षा को लेकर भी सख्त रुख अपनाया। उन्होंने अधिकारियों को प्रदेश में एनॉलॉग पनीर के उपयोग और बिक्री पर प्रभावी रोक सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि लोगों को सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण खाद्य सामग्री उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
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रायपुर में आयोजित प्रेस वार्ता में स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान के तहत अब तक 34.29 लाख से अधिक लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण किया जा चुका है, जो लक्ष्य का करीब 99 प्रतिशत है। अभियान के दौरान मलेरिया, टीबी, सिकल सेल, कुष्ठ रोग और मुंह के कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों की समय पर पहचान कर इलाज शुरू किया गया। वहीं 60 हजार से अधिक गंभीर मरीजों को बेहतर इलाज के लिए बड़े अस्पतालों में रेफर किया गया। साथ ही 10,938 हाई-रिस्क गर्भवती महिलाओं की विशेष निगरानी और उपचार भी सुनिश्चित किया गया।
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स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि हाल के दिनों में मलेरिया के कुछ मामले सामने आए हैं, लेकिन स्वास्थ्य विभाग पूरी सतर्कता के साथ काम कर रहा है। मितानिन, एएनएम और स्वास्थ्य कर्मी गांव-गांव जाकर जांच और दवा वितरण के साथ लोगों को जागरूक कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि समय पर जांच और इलाज से मलेरिया पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सकता है।
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उन्होंने बताया कि लगातार प्रयासों के कारण बस्तर संभाग में मलेरिया पॉजिटिविटी दर 4.60 प्रतिशत से घटकर 0.48 प्रतिशत रह गई है। वहीं प्रदेश का वार्षिक परजीवी सूचकांक (API) 5.21 से घटकर 0.90 हो गया है, जो मलेरिया नियंत्रण में बड़ी सफलता मानी जा रही है।
मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं की जानकारी देते हुए स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि पिछले ढाई वर्षों में प्रदेश में 11.89 लाख से अधिक संस्थागत प्रसव कराए गए हैं। प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के तहत गर्भवती महिलाओं की नियमित जांच और हाई-रिस्क मामलों की पहचान कर समय पर इलाज किया जा रहा है।
आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाने के लिए प्रदेश में 375 नई 108 संजीवनी एक्सप्रेस एम्बुलेंस शुरू की गई हैं। जनवरी 2024 से जून 2026 के बीच इन एम्बुलेंसों के माध्यम से 6.50 लाख से अधिक लोगों को समय पर चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई गई।
स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि प्रदेश के 1,051 स्वास्थ्य संस्थानों में आधुनिक पैथोलॉजी जांच सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं, जिससे दूर-दराज के क्षेत्रों के लोगों को भी समय पर जांच की सुविधा मिल रही है। साथ ही प्रदेश के सभी 10 मेडिकल कॉलेजों में पैरामेडिकल पाठ्यक्रम शुरू करने की तैयारी की जा रही है, ताकि स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए प्रशिक्षित मानव संसाधन तैयार किए जा सकें।
प्रेस वार्ता के दौरान स्वास्थ्य मंत्री ने खाद्य सुरक्षा को लेकर भी सख्त रुख अपनाया। उन्होंने अधिकारियों को प्रदेश में एनॉलॉग पनीर के उपयोग और बिक्री पर प्रभावी रोक सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि लोगों को सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण खाद्य सामग्री उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।