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पोटाकेबिन घोटाले में बड़ा खुलासा: कागजों पर पेट भर रहे थे बच्चे, हकीकत में गायब था निवाला; चार अधीक्षक सस्पेंड

अमर उजाला नेटवर्क, बीजापुर Published by: बीजापुर ब्यूरो Updated Wed, 11 Feb 2026 02:10 PM IST
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सार

बीजापुर के आवासीय विद्यालयों में फर्जी उपस्थिति दर्ज कर लाखों का राशन-शिष्यवृत्ति गबन के मामले में एक्शन लिया गया है। जांच रिपोर्ट में इसका खुलासा हुआ है। पोटाकेबिन घोटाले में चार अधीक्षकों को सस्पेंड कर दिया गया है। 
 

four superintendents suspended in Bijapur Pota Cabin scam
चार अधीक्षक निलंबित - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

जिले में शिक्षा की लौ जलाने के नाम पर करोड़ों रुपये पानी की तरह बहाए जा रहे हैं। लेकिन हकीकत यह है कि यह पैसा आदिवासी बच्चों के पेट तक पहुंचने के बजाय भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ता जा रहा है। इस मामले को प्रमुखता से उठाने के बाद अब प्रशासन की नींद टूटी है। बीजापुर के पोटाकेबिनों आवासीय विद्यालयों में हुए वित्तीय अनियमितता और राशन घोटाले के मामले में संयुक्त संचालक शिक्षा ने चार प्रभारी अधीक्षकों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।

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जांच रिपोर्ट में खुलासा
जांच दल जब बीजापुर के विभिन्न पोटाकेबिनों में पहुंचा तो वहां का नजारा देखकर अधिकारी भी दंग रह गए। जिन विद्यालयों में कागजों पर बच्चों की उपस्थिति शत-प्रतिशत दिखाई गई थी। वहां मौके पर आधे बच्चे भी मौजूद नहीं थे। जांच रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि जुलाई से अक्टूबर के बीच बड़ी संख्या में बच्चे अनुपस्थित थे। लेकिन उनके नाम पर राशन सब्जी और मेष शुल्क का पैसा सरकारी खजाने से लगातार निकाला जा रहा था। 
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हैरानी की बात यह है कि अधीक्षकों ने अपनी चोरी छिपाने के लिए उपस्थिति पंजी में जमकर कांट-छांट और हेरफेर की। बच्चों की फर्जी उपस्थिति दर्ज कर शासन को लाखों रुपये का चूना लगाया गया। यह खेल केवल राशन तक सीमित नहीं था बल्कि बच्चों को मिलने वाली शिष्यवृत्ति की राशि में भी डाका डाला गया।

रिकॉर्ड और मौके पर मौजूद बच्चों की संख्या में मिला अंतर
बीजापुर पोटाकेबिन घोटाले की तह तक जाने पर एक भयावह सच सामने आया है। कलेक्टर की अनुशंसा पर गठित जांच समिति ने पाया कि इन आवासीय विद्यालयों में भ्रष्टाचार का एक सुनियोजित पेपर मॉडल चल रहा था। रिकॉर्ड में दर्ज बच्चों की संख्या और मौके पर मौजूद छात्रों के बीच जमीन-आसमान का अंतर मिला। 

चौंकाने वाली बात यह है कि जुलाई से अक्टूबर के बीच जो बच्चे स्कूल में थे ही नहीं, उनके नाम पर भी राशन और भोजन राशि का आहरण किया गया। यानी असली राशन को कागजी बच्चों के जरिए डकारा जा रहा था। प्रशासन की यह जांच रिपोर्ट साबित करती है कि मासूमों के निवाले को अधीक्षकों ने अपनी अवैध कमाई का जरिया बना लिया था।

दस्तावेजों पर डकैती हाजिरी रजिस्टर में सरेआम फर्जीवाड़ा
भ्रष्टाचार को छिपाने के लिए सरकारी दस्तावेजों के साथ किस कदर खिलवाड़ किया गया। इसका प्रमाण स्कूलों के हाजिरी रजिस्टर में देखने को मिलता है। जांच टीम ने पाया कि बच्चों की उपस्थिति दर्ज करने वाले पन्नों पर बड़े पैमाने पर कांट-छांट और हेरफेर किया गया था। ताकि वित्तीय गबन को जायज ठहराया जा सके। 

नियमानुसार हर महीने बच्चों का मेष गणना चार्ट बनाना अनिवार्य है। लेकिन यहां शासन के सभी नियमों को ताक पर रखकर बिना किसी चार्ट के मेष शुल्क की वसूली की गई। यह न केवल वित्तीय अनियमितता है बल्कि एक गंभीर आपराधिक कृत्य है, जहाँ रिकॉर्ड बदलकर बच्चों के हक पर सीधे डाका डाला गया। इस बारे में अधिक जानकारी लेने डीएमसी को कॉल किया गया। लेकिन उन्होंने कॉल रिसीव नहीं किया।

इन चार चेहरों पर गिरी गाज
कलेक्टर बीजापुर की अनुशंसा के बाद बस्तर संभाग के संयुक्त संचालक ने चार प्रभारी अधीक्षकों को सस्पेंड करने का आदेश जारी किया है।

आदित्य ठाकुर: प्रभारी अधीक्षक, नेताजी सुभाषचंद्र बोस बालक आवासीय विद्यालय भटवाड़ा।
लक्ष्मीनारायण ओढदल प्रभारी अधीक्षक, आवासीय विद्यालय सेण्ड्रापल्ली।
पुष्पलता सोनी प्रभारी अधीक्षक, आवासीय विद्यालय संगमपल्ली।
रघुनंदन मौर्य प्रभारी अधीक्षक, आवासीय विद्यालय भटवाड़ा।

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