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बीजापुर आदिवासी समाज की पहल: जनगणना 2026 में ‘आदिवासी धर्म’ दर्ज कराने की अपील, बस्तर संभाग में अभियान तेज
अमर उजाला नेटवर्क, बीजापुर
Published by: बीजापुर ब्यूरो
Updated Mon, 27 Apr 2026 10:18 PM IST
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सार
बीजापुर में सर्व आदिवासी समाज बस्तर संभाग ने 2026 की जनगणना में ‘आदिवासी धर्म’ दर्ज कराने की मांग उठाई है। पदाधिकारियों ने सभी जिलों के समाजों से सक्रिय भागीदारी और जागरूकता बढ़ाने की अपील की है, इसे पहचान और अधिकारों से जोड़ा है।
बीजापुर आदिवासी समाज की पहल
- फोटो : बीजापुर आदिवासी समाज की पहल
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विस्तार
बीजापुर में सर्व आदिवासी समाज बस्तर संभाग ने वर्ष 2026 की प्रस्तावित जनगणना में आदिवासी समुदाय की विशिष्ट पहचान दर्ज कराने की अपील की है। संभागीय अध्यक्ष प्रकाश ठाकुर और महासचिव तिमोथी लकड़ा ने सभी समाजों से इस अभियान में सक्रिय भागीदारी का आह्वान किया है। इस संबंध में बस्तर संभाग के बस्तर, कांकेर, कोंडागांव, नारायणपुर, दंतेवाड़ा, बीजापुर और सुकमा जिलों के पदाधिकारियों को पत्र जारी किया गया है।
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जारी पत्र में गोंड, कोया, ध्रुव गोंड, हल्बा, मुरिया, भतरा, धुरवा, दोरला, गदबा, परजा, परधान, उरांव, कंवर, सौरा, ओझा, माड़िया, अबुझमाड़िया, दण्डामी माड़िया, पारधी, कंडरा, मुंडा, कमार, सोनझर और नागरची समाज के अध्यक्षों एवं सचिवों से विशेष सहयोग की अपेक्षा की गई है। प्रकाश ठाकुर और तिमोथी लकड़ा ने कहा कि आगामी जनगणना आदिवासी समाज के अस्तित्व, पहचान और भविष्य के अधिकारों के निर्धारण के लिए महत्वपूर्ण अवसर है।
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समाज लंबे समय से अपनी विशिष्ट संस्कृति, परंपरा और प्रकृति-पूजक जीवन शैली के अनुरूप पृथक ‘आदिवासी धर्म’ दर्ज कराने की मांग करता रहा है। यह कदम उनके जल, जंगल और जमीन के अधिकारों की रक्षा का आधार बनेगा। इसलिए सभी समाजों से इस अभियान में बढ़-चढ़कर भाग लेने का आह्वान किया गया है। जनगणना 2026 में ‘आदिवासी धर्म’ दर्ज कराने के लिए व्यापक जागरूकता फैलाने पर जोर दिया गया है।
पत्र में समाज के पदाधिकारियों से ग्राम स्तर पर बैठकों का आयोजन करने की अपील की गई है। इन बैठकों के माध्यम से लोगों को जनगणना के महत्व के प्रति जागरूक किया जाएगा। उन्हें जनगणना प्रपत्र के धर्म कॉलम में किसी अन्य धर्म के बजाय स्पष्ट रूप से ‘आदिवासी धर्म’ दर्ज कराने के लिए प्रेरित किया जाएगा। अपनी मूल पहचान को प्राथमिकता देने पर विशेष जोर दिया गया है।
पढ़े-लिखे युवाओं को स्वयंसेवक के रूप में तैयार करने पर भी जोर दिया गया है। ये स्वयंसेवक गणना के दौरान बुजुर्गों एवं कम पढ़े-लिखे लोगों की सहायता करेंगे। इससे यह सुनिश्चित होगा कि सभी आदिवासी अपनी पहचान सही ढंग से दर्ज करा सकें। यह पहल आदिवासी समुदाय की विशिष्ट पहचान को संरक्षित करने में सहायक होगी।


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