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Bijapur: कभी नक्सलवाद का गढ़ रहा पीड़िया अब विकास की मुख्यधारा से जुड़ रहा, पहली बार पहुंचा आधार नामांकन शिविर

Wed, 22 Jul 2026 04:39 PM IST
बीजापुर ब्यूरो अमर उजाला नेटवर्क, बीजापुर
अमर उजाला नेटवर्क, बीजापुर Published by: बीजापुर ब्यूरो Updated Wed, 22 Jul 2026 04:39 PM IST
सार

बीजापुर जिले के गंगालूर तहसील के ग्राम पंचायत पीड़िया जिसे कभी नक्सलवाद का गढ़ व नक्सलवाद की यूनिवर्सिटी के रूप में जाना जाता था, आज विकास की नई कहानी लिख रहा है।

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Pidiya once a Naxal stronghold is now joining mainstream of development an Aadhaar enrollment camp has reached
बीजापुर न्यूज

विस्तार

बीजापुर जिले के गंगालूर तहसील के ग्राम पंचायत पीड़िया जिसे कभी नक्सलवाद का गढ़ व नक्सलवाद की यूनिवर्सिटी के रूप में जाना जाता था, आज विकास की नई कहानी लिख रहा है। वर्षों तक सुरक्षा कारणों से शासन प्रशासन की पहुंच से दूर रहा यह गांव अब धीरे-धीरे विकास की मुख्यधारा से जुड़ रहा है। 31 मार्च 2026 के बाद परिस्थितियों में आए सकारात्मक बदलाव तथा आवागमन के लिए कच्चे मार्ग बनने से प्रशासन की नियमित पहुंच संभव हो सकी है। इसी क्रम में ग्रामीणों को शासन की मूलभूत सेवाओं से जोड़ने के उद्देश्य से ग्राम पंचायत पीड़िया में विशेष आधार नामांकन एवं अद्यतन शिविर का आयोजन किया गया। शिविर का संचालन तहसीलदार गंगालूर भोजराम डहरिया एवं नायब तहसीलदार बीजापुर रवेन्द्र सिन्हा के मार्गदर्शन में किया गया।

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दूरस्थ एवं नेटवर्कविहीन क्षेत्र होने के बावजूद ग्रामीणों में शिविर को लेकर उत्साह देखने को मिला। बड़ी संख्या में महिला, पुरुष, बुजुर्ग एवं बच्चे आवश्यक दस्तावेजों के साथ शिविर में पहुंचे। तकनीकी चुनौतियों के बावजूद 80 ग्रामीणों का आधार पंजीयन एवं आवश्यक अद्यतन कार्य सफलतापूर्वक किया गया, जिससे वे भविष्य में शासन की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ प्राप्त कर सकेंगे।
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स्थानीय ग्रामीणों ने बताया कि एक समय ऐसा था जब यह गांव नक्सली गतिविधियों का प्रमुख केंद्र माना जाता था और कई बड़े नक्सली नेता यहां प्रशिक्षण के लिए आया करते थे। लेकिन आज वही गांव हिंसा के दौर से निकलकर शिक्षा, पहचान और विकास की ओर तेजी से अग्रसर है। ग्रामीणों का कहना है कि अब वे सामान्य एवं शांतिपूर्ण जीवन जी रहे हैं और शासन की योजनाओं का लाभ भी उन्हें मिलने लगा है।
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परिवर्तन की सबसे प्रेरक तस्वीर गांव का विद्यालय है, जो लगभग 21 वर्षों तक बंद रहने के बाद पुनः संचालित हो चुका है। वर्तमान में यहां 84 बच्चे नियमित रूप से अध्ययन कर रहे हैं। यह केवल विद्यालय का पुनः खुलना नहीं, बल्कि पीड़िया के भविष्य में लौटते विश्वास और नई पीढ़ी के बेहतर कल का प्रतीक है। ग्राम पीड़िया में आयोजित यह आधार शिविर केवल एक प्रशासनिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि इस बात का सशक्त उदाहरण है कि शासन की सेवाएं अब उन अंतिम छोर तक पहुंच रही हैं, जो लंबे समय तक नक्सलवाद के कारण विकास से वंचित रहे। पहचान से अधिकार और अधिकार से विकास की यह यात्रा आज पीड़िया जैसे गांवों में स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगी है।

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