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CGPSC घोटाला केस में हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: राज्य सरकार की अपील खारिज की,चयनित अभ्यर्थियों को मिलेगी नियुक्ति
अमर उजाला नेटवर्क, बिलासपुर
Published by: अमन कोशले
Updated Thu, 06 Nov 2025 02:47 PM IST
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सार
चर्चित सीजीपीएससी भर्ती घोटाला मामले में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। इससे शासन को बड़ा झटका लगा है, वहीं निर्दोष चयनित अभ्यर्थियों के लिए डीएसपी और डिप्टी कलेक्टर के पदों पर नियुक्ति का रास्ता साफ हो गया है।
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
चर्चित सीजीपीएससी भर्ती घोटाला मामले में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने राज्य शासन की अपील को खारिज करते हुए सिंगल बेंच के फैसले को बरकरार रखा है। इससे शासन को बड़ा झटका लगा है, वहीं निर्दोष चयनित अभ्यर्थियों के लिए डीएसपी और डिप्टी कलेक्टर के पदों पर नियुक्ति का रास्ता साफ हो गया है।
मामला वर्ष 2021–2022 की राज्य सेवा परीक्षा से जुड़ा है, जिसमें 171 पदों के लिए भर्ती प्रक्रिया हुई थी। इस दौरान आरोप लगे थे कि राजनीतिक प्रभाव और प्रशासनिक अधिकारियों के रिश्तेदारों को नियमों को ताक पर रखकर चयनित किया गया। जांच के बाद सीबीआई ने कई चौंकाने वाले खुलासे किए और इस घोटाले में शामिल 7 लोगों को गिरफ्तार किया गया था। जांच पूरी होने के बाद शासन ने घोटाले में संदिग्ध नामों पर रोक लगाते हुए पूरी चयन प्रक्रिया को स्थगित कर दिया था।
इस रोक के खिलाफ चयनित अभ्यर्थियों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। सुनवाई के दौरान सिंगल बेंच ने आदेश दिया था कि जिन अभ्यर्थियों के नाम चार्जशीट में शामिल नहीं हैं, उन्हें नियुक्ति दी जाए। राज्य शासन ने इस आदेश के खिलाफ चीफ जस्टिस की डिवीजन बेंच में अपील दायर की थी, लेकिन आज कोर्ट ने शासन की यह अपील खारिज कर दी। इसके साथ ही सिंगल बेंच का आदेश कायम रखा गया है।
मामले में याचिकाकर्ताओं की ओर से सीनियर एडवोकेट राजीव श्रीवास्तव और मलय श्रीवास्तव ने पैरवी की। इस फैसले के बाद अब शासन के पास केवल सुप्रीम कोर्ट में अपील करने का विकल्प बचा है।
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मामला वर्ष 2021–2022 की राज्य सेवा परीक्षा से जुड़ा है, जिसमें 171 पदों के लिए भर्ती प्रक्रिया हुई थी। इस दौरान आरोप लगे थे कि राजनीतिक प्रभाव और प्रशासनिक अधिकारियों के रिश्तेदारों को नियमों को ताक पर रखकर चयनित किया गया। जांच के बाद सीबीआई ने कई चौंकाने वाले खुलासे किए और इस घोटाले में शामिल 7 लोगों को गिरफ्तार किया गया था। जांच पूरी होने के बाद शासन ने घोटाले में संदिग्ध नामों पर रोक लगाते हुए पूरी चयन प्रक्रिया को स्थगित कर दिया था।
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इस रोक के खिलाफ चयनित अभ्यर्थियों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। सुनवाई के दौरान सिंगल बेंच ने आदेश दिया था कि जिन अभ्यर्थियों के नाम चार्जशीट में शामिल नहीं हैं, उन्हें नियुक्ति दी जाए। राज्य शासन ने इस आदेश के खिलाफ चीफ जस्टिस की डिवीजन बेंच में अपील दायर की थी, लेकिन आज कोर्ट ने शासन की यह अपील खारिज कर दी। इसके साथ ही सिंगल बेंच का आदेश कायम रखा गया है।
मामले में याचिकाकर्ताओं की ओर से सीनियर एडवोकेट राजीव श्रीवास्तव और मलय श्रीवास्तव ने पैरवी की। इस फैसले के बाद अब शासन के पास केवल सुप्रीम कोर्ट में अपील करने का विकल्प बचा है।