सब्सक्राइब करें

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
Hindi News ›   Madhya Pradesh ›   Indore News ›   Indore News High Court Sentences IAS Officers and Health Officials to Jail

MP High Court: कोर्ट का बड़ा एक्शन, 22 बार आदेश टाला तो IAS अधिकारियों को मिली जेल की सजा

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर Published by: Arjun Richhariya Updated Wed, 25 Mar 2026 06:37 PM IST
विज्ञापन
सार

Indore News: मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने मंदसौर के स्वास्थ्य कर्मचारियों के नियमितीकरण मामले में अदालती आदेश की 22 बार अनदेखी करने पर सख्त कदम उठाया है।

Indore News High Court Sentences IAS Officers and Health Officials to Jail
आईएएस मोहम्मद सुलेमान और आईएएस तरुण राठी। - फोटो : अमर उजाला, डिजिटल डेस्क, इंदौर
विज्ञापन

विस्तार

इंदौर हाई कोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए मध्य प्रदेश के चार उच्च पदस्थ अधिकारियों को न्यायालय की अवमानना का दोषी पाया है। मंदसौर में वार्ड बॉय और अन्य कर्मचारियों के नियमितीकरण से जुड़े मामले में अदालत के आदेशों की लगातार अनदेखी करना इन अधिकारियों को महंगा पड़ गया है। कोर्ट ने इस मामले में सख्त रुख अपनाते हुए अधिकारियों को दो महीने के साधारण कारावास की सजा सुनाई है।
Trending Videos


यह भी पढ़ें: 'तेल खत्म होने वाला है' की अफवाह से क्यों मची MP में अफरातफरी?: रातभर खुले रहे पंप, सड़कों पर लगी रहीं कतारें
विज्ञापन
विज्ञापन


इन अधिकारियों पर गिरी गाज
अदालत के आदेश को 22 बार नजरअंदाज करने के आरोप में इंदौर हाई कोर्ट ने मध्य प्रदेश शासन के तत्कालीन प्रमुख सचिव और सेवानिवृत्त आईएएस मोहम्मद सुलेमान, स्वास्थ्य आयुक्त आईएएस तरुण राठी, रीजनल डायरेक्टर डी के तिवारी और मंदसौर के सीएमएचओ गोविंद चौहान को सजा सुनाई है। इन सभी को दो महीने की जेल की सजा दी गई है, हालांकि कोर्ट ने फिलहाल इस सजा के क्रियान्वयन को तीन सप्ताह के लिए स्थगित रखा है।

क्या था विवाद का मुख्य कारण
यह पूरा कानूनी विवाद साल 2004 से 2016 के बीच स्वास्थ्य विभाग में नियुक्त हुए कर्मचारियों के नियमितीकरण से संबंधित है। मंदसौर जिले के विभिन्न स्वास्थ्य केंद्रों पर कार्यरत वार्ड बॉय और स्वीपर जैसे कर्मचारियों को नियमित करने की मांग लंबे समय से की जा रही थी। इस विषय पर एडवोकेट प्रसन्न भटनागर और प्रवीण कुमार भट्ट के माध्यम से हाई कोर्ट में याचिका दायर की गई थी।

नियमित वेतनमान के लिए जारी हुए थे निर्देश
पूर्व में हुई सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने इन याचिकाओं को स्वीकार किया था और स्वास्थ्य विभाग को निर्देश दिया था कि जिन कर्मचारियों ने 10 वर्ष की सेवा पूरी कर ली है, उन्हें उस तिथि से नियमित वेतनमान और अन्य लाभ प्रदान किए जाएं। अदालत ने इस आदेश के पालन के लिए तीन महीने की समय सीमा निर्धारित की थी।

विभाग की ओर से 22 बार समय मांगा गया
विभाग द्वारा आदेश का पालन न किए जाने पर कर्मचारियों ने कोर्ट की शरण ली और अवमानना याचिका दाखिल की। सुनवाई के दौरान विभाग की ओर से 22 बार समय मांगा गया, लेकिन फिर भी आदेश का क्रियान्वयन नहीं हुआ। अंततः कोर्ट ने इसे न्यायपालिका के आदेश की जानबूझकर की गई अवहेलना माना और दोषी अधिकारियों को जेल भेजने का निर्णय लिया।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

एप में पढ़ें

Followed