{"_id":"698f1051b16f1f44c809c5da","slug":"mungeli-news-4th-rank-in-cds-supriya-singh-of-mungeli-became-lieutenant-in-indian-army-bilaspur-chhattisgarh-news-c-1-1-noi1495-3946978-2026-02-13","type":"story","status":"publish","title_hn":"मुंगेली : सुप्रिया सिंह बनीं भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट, CDS परीक्षा में हासिल की चौथी रैंक","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मुंगेली : सुप्रिया सिंह बनीं भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट, CDS परीक्षा में हासिल की चौथी रैंक
अमर उजाला नेटवर्क, मुंगेली
Published by: अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 13 Feb 2026 06:04 PM IST
विज्ञापन
सार
सुप्रिया सिंह की इस असाधारण उपलब्धि ने उनके परिवार, रिश्तेदारों और पूरे क्षेत्र में खुशी की लहर दौड़ा दी है। उनकी सफलता उन युवाओं, विशेषकर बेटियों के लिए एक सशक्त प्रेरणा का स्रोत बनेगी, जो सेना में अपना करियर बनाने का ख्वाब देखते हैं।
सुप्रिया सिंह बनीं भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट
- फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन
विस्तार
छत्तीसगढ़ के मुंगेली जिले के टेढ़ाधौंरा गांव की बेटी सुप्रिया सिंह ने अपने जिले का नाम राष्ट्रीय स्तर पर रोशन किया है। संघ लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित कंबाइंड डिफेंस सर्विसेज (CDS) परीक्षा में उन्होंने अखिल भारतीय स्तर पर चौथी रैंक हासिल कर भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट पद के लिए अपना स्थान पक्का किया है। 23 वर्षीय सुप्रिया, वैदेही शरण सिंह की सुपुत्री हैं और उन्होंने बचपन से ही देश सेवा का सपना देखा था, जिसे उन्होंने अपने संकल्प और अथक परिश्रम से साकार किया है।
Trending Videos
सफलता की राह और भविष्य की ओर
मुंगेली से अपनी प्रारंभिक शिक्षा पूरी करने के बाद, सुप्रिया सिंह ने अपने लक्ष्य के प्रति निरंतर समर्पण दिखाया। CDS परीक्षा में उनकी शानदार सफलता न केवल उनके परिवार के लिए बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ राज्य के लिए गर्व का क्षण है। ग्रामीण परिवेश से निकलकर राष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन करना एक प्रेरणादायक उपलब्धि है। इस सफलता के बाद, सुप्रिया सिंह अब प्रशिक्षण अकादमी में सैन्य प्रशिक्षण प्राप्त करेंगी, जहाँ वे देश की सेवा के लिए और अधिक तैयार होंगी।
विज्ञापन
विज्ञापन
प्रेरणा का स्रोत और जन-हितैषी प्रभाव
सुप्रिया सिंह की इस असाधारण उपलब्धि ने उनके परिवार, रिश्तेदारों और पूरे क्षेत्र में खुशी की लहर दौड़ा दी है। उनकी सफलता उन युवाओं, विशेषकर बेटियों के लिए एक सशक्त प्रेरणा का स्रोत बनेगी, जो सेना में अपना करियर बनाने का ख्वाब देखते हैं। यह दर्शाता है कि कड़ी मेहनत, दृढ़ संकल्प और सही मार्गदर्शन से कोई भी व्यक्ति अपने लक्ष्यों को प्राप्त कर सकता है, चाहे उसका परिवेश कैसा भी हो। सुप्रिया की कहानी ग्रामीण भारत की प्रतिभाओं को उजागर करती है और उन्हें राष्ट्रीय मंच पर अपनी पहचान बनाने के लिए प्रोत्साहित करती है।