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Bilaspur-Chhattisgarh News: भिलाई विधायक को सुप्रीम कोर्ट से झटका, हाईकोर्ट में चुनाव याचिका का सामना करेंगे

अमर उजाला नेटवर्क, बिलासपुर Published by: अमर उजाला ब्यूरो Updated Tue, 24 Feb 2026 06:40 PM IST
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सार

सुप्रीम कोर्ट ने 65-भिलाई नगर विधानसभा चुनाव याचिका में देवेंद्र यादव की एसएलपी को निराधार बताकर खारिज कर दिया। जिसमें प्रेम प्रकाश पांडे ने शपथपत्र में 'प्रोक्लेम्ड ऑफेंडर' छिपाने, संपत्ति मूल्य गलत दिखाने और प्रेस कॉन्फ्रेंस में भ्रष्ट आचरण के आरोप लगाए थे।

Bhilai MLA Devendra Yadav gets a shock from the Supreme Court
Supreme Court - फोटो : ANI
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विस्तार

65-भिलाई नगर विधानसभा निर्वाचन से जुड़े चुनाव याचिका प्रकरण में देवेंद्र यादव को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के आदेश के विरुद्ध दायर उनकी विशेष अनुमति याचिका को निराधार मानते हुए खारिज कर दिया। न्यायालय ने उन्हें उच्च न्यायालय में चुनाव याचिका का सामना करने का निर्देश दिया।

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यह मामला छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के उस आदेश के विरुद्ध था। इसमें न्यायमूर्ति राकेश मोहन पाण्डेय ने पूर्व विधानसभा अध्यक्ष प्रेम प्रकाश पांडे की चुनाव याचिका को प्रारंभिक चरण में खारिज करने से इनकार किया था। उन्होंने इसे विस्तृत परीक्षण के लिए स्वीकार किया था। 
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सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई मुख्य न्यायाधीश सूर्य कान्त व न्यायमूर्ति जॉयमाल बागची की पीठ के समक्ष हुई। देवेंद्र यादव के वरिष्ठ अधिवक्ता नरेंद्र हुड्डा ने तर्क दिया कि चुनाव शपथपत्र में 'घोषित फरार आरोपी' की स्थिति का उल्लेख आवश्यक नहीं था। उन्होंने कहा कि वर्ष 2018 और 2023 के शपथपत्रों में संपत्ति का मूल्य गलत दर्शाना अनजाने में हुई त्रुटि थी। चुनाव अवधि में की गई प्रेस कॉन्फ्रेंस को भ्रष्ट आचरण नहीं माना जा सकता। यह केवल राजनीतिक प्रतिक्रिया थी।

प्रेम प्रकाश पांडे के वरिष्ठ अधिवक्ता बी. एल हंसारिया और रविशंकर जंधालिया ने प्रतिवाद किया। उन्होंने कहा कि प्रत्याशी को आपराधिक प्रकरण में 'घोषित फरार आरोपी' घोषित करना गंभीर तथ्य है। यह मतदाताओं के जानने के अधिकार से सीधे जुड़ा है। संपत्तियों के मूल्यांकन में भारी अंतर और गलत घोषणा साक्ष्य का विषय है। चुनाव के दौरान प्रेस कॉन्फ्रेंस और आरोपों का प्रभाव साक्ष्य के आधार पर तय होगा।

दोनों पक्षों को सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने माना कि चुनाव याचिका में आरोप गंभीर प्रकृति के हैं। उनका समुचित न्यायिक परीक्षण आवश्यक है। न्यायालय ने कहा कि इस चरण पर हस्तक्षेप का कोई आधार नहीं बनता। इस प्रकार विशेष अनुमति याचिका खारिज कर दी गई। देवेंद्र यादव को छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय में लंबित चुनाव याचिका का सामना करने का निर्देश दिया गया।

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