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छत्तीसगढ़ विधानसभा मानसून सत्र: तीजन बाई को दी गई श्रद्धांजलि, सदन ने लोककला के स्वर्णिम अध्याय को किया याद
Mon, 13 Jul 2026 12:30 PM IST
अमन कोशले
अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर
अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर
Published by: अमन कोशले
Updated Mon, 13 Jul 2026 12:30 PM IST
सार
छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र का पहला दिन लोककला की महान साधिका पद्म विभूषण डॉ. तीजन बाई को श्रद्धांजलि के साथ शुरू हुआ।
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छत्तीसगढ़ विधानसभा
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र 13 जुलाई से शुरू हो गया है। आज पहला दिन लोककला की महान साधिका पद्म विभूषण डॉ. तीजन बाई को श्रद्धांजलि के साथ शुरू हुआ। सदन ने उनके निधन पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए दो मिनट का मौन रखा और बाद में कार्यवाही को पांच मिनट के लिए स्थगित कर दिया।
श्रद्धांजलि प्रस्ताव पर बोलते हुए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि तीजन बाई ने पंडवानी की कापालिक शैली को नई पहचान दिलाई और अपनी अद्भुत कला से छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति को वैश्विक मंच तक पहुंचाया। उन्होंने कहा कि कठिन सामाजिक परिस्थितियों के बावजूद तीजन बाई ने अपने संघर्ष और प्रतिभा के बल पर जो मुकाम हासिल किया, वह आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बना रहेगा। उनके निधन से प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत को अपूरणीय क्षति पहुंची है।
नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने कहा कि सदन में किसी पद्म सम्मान से सम्मानित लोक कलाकार को इस तरह श्रद्धांजलि देने का यह विशेष अवसर है। उन्होंने कहा कि तीजन बाई का योगदान सदैव याद रखा जाएगा और कांग्रेस विधायक दल की ओर से उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित की।
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संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने कहा कि तीजन बाई ने अपनी कला के माध्यम से छत्तीसगढ़ को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई। वहीं पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि सीमित संसाधनों और कठिन परिस्थितियों से निकलकर उन्होंने दुनिया भर में प्रदेश का नाम रोशन किया। उनका जीवन संघर्ष और समर्पण का प्रतीक है।
संसदीय कार्य मंत्री केदार कश्यप ने भी तीजन बाई के संघर्षपूर्ण जीवन और लोककला के प्रति उनके समर्पण को याद करते हुए कहा कि उनके निधन से लोकसंस्कृति जगत ने एक अमूल्य धरोहर खो दी है।
इस दौरान मंत्री गजेंद्र यादव सहित विधायक किरण सिंह देव, अनुज शर्मा, अनिला भेड़िया, कुंवर सिंह निषाद और भैयालाल कोरसेवाड़ा ने भी अपने विचार रखते हुए तीजन बाई को श्रद्धांजलि अर्पित की। श्रद्धांजलि के बाद विधानसभा की कार्यवाही पांच मिनट के लिए स्थगित कर दी गई।
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श्रद्धांजलि प्रस्ताव पर बोलते हुए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि तीजन बाई ने पंडवानी की कापालिक शैली को नई पहचान दिलाई और अपनी अद्भुत कला से छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति को वैश्विक मंच तक पहुंचाया। उन्होंने कहा कि कठिन सामाजिक परिस्थितियों के बावजूद तीजन बाई ने अपने संघर्ष और प्रतिभा के बल पर जो मुकाम हासिल किया, वह आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बना रहेगा। उनके निधन से प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत को अपूरणीय क्षति पहुंची है।
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नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने कहा कि सदन में किसी पद्म सम्मान से सम्मानित लोक कलाकार को इस तरह श्रद्धांजलि देने का यह विशेष अवसर है। उन्होंने कहा कि तीजन बाई का योगदान सदैव याद रखा जाएगा और कांग्रेस विधायक दल की ओर से उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित की।
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संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने कहा कि तीजन बाई ने अपनी कला के माध्यम से छत्तीसगढ़ को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई। वहीं पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि सीमित संसाधनों और कठिन परिस्थितियों से निकलकर उन्होंने दुनिया भर में प्रदेश का नाम रोशन किया। उनका जीवन संघर्ष और समर्पण का प्रतीक है।
संसदीय कार्य मंत्री केदार कश्यप ने भी तीजन बाई के संघर्षपूर्ण जीवन और लोककला के प्रति उनके समर्पण को याद करते हुए कहा कि उनके निधन से लोकसंस्कृति जगत ने एक अमूल्य धरोहर खो दी है।
इस दौरान मंत्री गजेंद्र यादव सहित विधायक किरण सिंह देव, अनुज शर्मा, अनिला भेड़िया, कुंवर सिंह निषाद और भैयालाल कोरसेवाड़ा ने भी अपने विचार रखते हुए तीजन बाई को श्रद्धांजलि अर्पित की। श्रद्धांजलि के बाद विधानसभा की कार्यवाही पांच मिनट के लिए स्थगित कर दी गई।