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लोकतंत्र सेनानियों के भौतिक सत्यापन तक सम्मान निधि पर रोक, सेनानी बोले- सरकार की नीयत ठीक नहीं

भाषा, रायपुर Published by: Nilesh Kumar Updated Tue, 29 Jan 2019 10:16 PM IST
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Chhattisgadh Government breaks the pension of Loktantra senani
प्रतीकात्मक तस्वीर
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छत्तीसगढ़ सरकार ने मीसा बंदियों के भौतिक सत्यापन तक उन्हें दी जाने वाली सम्मान निधि की राशि पर रोक लगा दी है। राज्य के वरिष्ठ अधिकारियों ने मंगलवार को बताया कि राज्य सरकार ने लोकतंत्र सेनानियों(मीसा बंदियों) का भौतिक सत्यापन करने और भुगतान की प्रक्रिया का पुनर्निधारण करने का फैसला किया है। इसके लिए आगामी फरवरी माह से इस राशि के वितरण पर रोक लगा दी गई है।

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छत्तीसगढ़ सामान्य प्रशासन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि लोक नायक जयप्रकाश नारायण सम्मान निधि, 2008 के प्रावधानों के तहत लोकतंत्र सेनानियों को भुगतान की जाने वाली सम्मान निधि की राशि का समुचित नियमन करने और भुगतान की वर्तमान प्रक्रिया को और अधिक सटीक, पारदर्शी बनाया जाना आवश्यक है। साथ ही राज्य में लोकतंत्र सेनानियों का भौतिक सत्यापन कराया जाना भी आवश्यक है।
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अधिकारियों ने बताया कि इस कार्यवाही के बाद ही लोकतंत्र सेनानियों को सम्मान निधि की राशि दी जाएगी। इधर लोकतंत्र सेनानियों ने इसे लेकर सरकार की नीयत पर सवाल उठाया है। लोकतंत्र सेनानी संघ के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सच्चिदानंद उपासने कहा है कि सरकार ने सत्यापन की बात कही है। 

उपासने ने कहा कि सत्यापन के लिए इसे बंद करना जरूरी नहीं है। यदि सरकार की नीयत सत्यापन की होती तब बंद नहीं करते। बंद किए बिना भी सत्यापन शासकीय स्तर पर किया जा सकता है। इसके पीछे सरकार की नीयत ठीक नहीं दिख रही है। साथ ही इसमें अवधि भी नहीं दी गई है।

उपासने ने कहा कि यदि ऐसा सोचा जा रहा है कि इसमें केवल राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ या भारतीय जनता पार्टी के लोग हैं तब यह सही नहीं है। इसमें समाजवादी और कांग्रेस के लोग भी हैं। साथ ही इसमें वकील, समाजसेवी और पत्रकार भी हैं।

उन्होंने बताया कि मीसा बंदियों को राज्य में वर्ष 2008 से सम्मान निधि की राशि दी जा रही है। जो तीन महीने जेल में रहे उन्हें 10 हजार रूपए, जो तीन से छह महीने तक जेल में रहे उन्हें 15 हजार रूपए तथा छह माह से अधिक जेल में रहे उन्हें 25 हजार रूपए सम्मान निधि की राशि मिलती है।

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