राजनांदगांव जिले के कृषि विज्ञान केंद्र सुरगी में एकदिवसीय प्राकृतिक और जैविक खेती कार्यशाला आयोजित की गई। इसके साथ ही एक कृषक सम्मेलन का भी आयोजन हुआ। इसमें जिले भर के किसानों ने बड़ी संख्या में हिस्सा लिया।
कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य किसानों को जैविक खेती के प्रति जागरूक करना था। केंद्र सरकार और राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं के बारे में जानकारी दी गई। किसानों को प्राकृतिक खेती के लाभों से अवगत कराया गया। इस दौरान कृषकों को विभिन्न कृषि सामग्रियों का वितरण भी किया गया।
विधानसभा अध्यक्ष रमन सिंह इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित थे। उनके साथ बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि और कृषि विभाग के अधिकारी-कर्मचारी भी मौजूद थे। उन्होंने किसानों को विभिन्न विषयों पर महत्वपूर्ण जानकारी दी। रमन सिंह ने बताया कि सुरगी में कृषि महाविद्यालय की स्थापना हुई है। यहां 6 राज्यों के छात्र अध्ययन कर रहे हैं और शोध कार्य में लगे हैं।
जैविक कृषि का महत्व
जैविक कृषि पर्यावरण के लिए अत्यंत लाभदायक मानी जाती है। यह मिट्टी की उर्वरता को बनाए रखने में सहायक होती है। रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों का उपयोग इसमें कम होता है। इससे स्वस्थ और गुणवत्तापूर्ण फसलें पैदा होती हैं। यह किसानों की आय में वृद्धि की संभावना भी बढ़ाती है।
सरकारी पहल और जागरूकता
केंद्र और राज्य सरकारें जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए सक्रिय हैं। इसके लिए कई महत्वाकांक्षी योजनाएं संचालित की जा रही हैं। कार्यशाला में इन योजनाओं की विस्तृत जानकारी किसानों को दी गई। किसानों को इन पहलों का लाभ उठाने के लिए प्रेरित किया गया। जागरूकता कार्यक्रमों से किसानों को नई तकनीकों से जोड़ा जा रहा है।