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CG: मिस्र देश में गूंजी छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक ध्वनि, पंथी नृत्य दल ने रचा इतिहास; नील नदी पर फहराया तिरंगा

अमर उजाला नेटवर्क, कबीरधाम Published by: श्याम जी. Updated Thu, 03 Apr 2025 05:23 PM IST
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सार

छत्तीसगढ़ पीडी पंथी परिवार ने 12वें अंतर्राष्ट्रीय सांस्कृतिक महोत्सव में भारत का प्रतिनिधित्व कर राज्य का मान बढ़ाया। छत्तीसगढ़ के पंथी नृत्य, कर्मा नृत्य और बस्तर के आदिवासी नृत्य की जीवंत प्रस्तुतियों ने वहां उपस्थित दर्शकों को भावविभोर कर दिया। 

Chhattisgarh Panthee family represented India in the 12th International Cultural Festival
पंथी नृत्य दल - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

मिस्र की ऐतिहासिक भूमि पर जब छत्तीसगढ़ के लोकनृत्यों की अनुगूंज बिखरी तो पूरा माहौल मंत्रमुग्ध हो उठा। छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर को विश्व मंच पर प्रतिष्ठा दिलाने वाले छत्तीसगढ़ पीडी पंथी परिवार ने इस बार 12वें अंतर्राष्ट्रीय सांस्कृतिक महोत्सव में भारत का प्रतिनिधित्व कर राज्य का मान बढ़ाया। मिस्र देश की ऐतिहासिक धरती पर कभी प्राचीन सभ्यताओं का विकास हुआ। वहीं, आज छत्तीसगढ़ के पंथी नृत्य, कर्मा नृत्य और बस्तर के आदिवासी नृत्य की जीवंत प्रस्तुतियों ने वहां उपस्थित दर्शकों को भावविभोर कर दिया। 

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इस महोत्सव के दौरान छत्तीसगढ़ के पुनदास जोशी, ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी (कृषि विभाग कबीरधाम) ने मिस्र के राज्यपाल को संत गुरु घासीदास बाबा की स्मृति चिन्ह भेंट कर छत्तीसगढ़ के महान संत के संदेश 'मनखे-मनखे एक समान' का प्रचार किया। यह अवसर केवल नृत्य प्रदर्शन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह भारत और मिस्र के बीच सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत करने का भी एक महत्वपूर्ण अवसर बना।
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कार्यक्रम के दौरान, मिस्र के राज्यपाल ने भी छत्तीसगढ़ के इस सांस्कृतिक दूत मंडल को सम्मानित करते हुए स्मृति चिन्ह भेंट किया। लोकनृत्यों में भारत का प्रतिनिधित्व कर बेहतर प्रदर्शन कर कबीरधाम वापस लौटने के बाद गुरुवार को जिला प्रशासन व कृषि विभाग के अधिकारी-कर्मचरियों ने कबीरधाम जिले में पदस्थ पुनदास जोशी, ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी (कृषि विभाग) के उज्जव भविष्य के लिए बधाई तथा शुभकामनाएं दीं।

नील नदी में भारत का झंडा फहराया
इस सांस्कृतिक यात्रा का सबसे गौरवशाली क्षण वह था, जब विश्व की सबसे बड़ी और सुंदर नील नदी में भारत का तिरंगा झंडा फहराया गया। यह ऐतिहासिक क्षण केवल छत्तीसगढ़ ही नहीं, बल्कि पूरे भारत के लिए गर्व का विषय था। इस यात्रा में एक और उपलब्धि जुड़ी जब पंथी दल ने दुनिया के पहले अजूबे गीजा के ग्रेट पिरामिड के सामने छत्तीसगढ़ के पंथी नृत्य की प्रस्तुत देकर इतिहास रच दिया। हजारों वर्षों से खड़े इन महान पिरामिडों की पृष्ठभूमि में जब छत्तीसगढ़ का परंपरागत पंथी नृत्य प्रस्तुत हुआ तो मानो यह संस्कृति का एक अद्भुत संगम बन गया।

कई देश में दे चुके हैंं प्रस्तुति
छत्तीसगढ़ के इस सांस्कृतिक प्रतिनिधि मंडल में पुनदास जोशी, श्वेता मनहर, रामाधार बंजारे, डॉ. हरेंद्र, मनोज कुमार, डॉ. अल्का मिंज, मुस्कान देशलहरे, आकांक्षा वर्मा व आकांक्षा केशवानी शामिल थे। यह पंथी दल भारत के 17 राज्यों में अपनी प्रस्तुति दे चुके हैं। तीन बार राष्ट्रीय स्तर पर गोल्ड मेडल जीतने की उपलब्धि हासिल कर चुका है। इस दल ने वर्ष 2023 के गणतंत्र दिवस परेड में कर्तव्यपथ, नई दिल्ली पर छत्तीसगढ़ का प्रतिनिधित्व कर अपनी पहचान को और मजबूत किया था। पंथी नृत्य दल को अब तक इटली, चीन, थाईलैंड, किर्गिस्तान, बैंकॉक और मिस्र सहित सात देशों से आमंत्रण मिल चुका है।

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