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सुबह-सुबह बैलों के साथ खेत में पहुंचे सीएम विष्णुदेव साय: हल चलाकर की बियासी; बोले- मोर किसानी, मोर अभिमान
Mon, 17 Aug 2026 05:16 PM IST
Lalit Kumar Singh
अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर
अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर
Published by: Lalit Kumar Singh
Updated Mon, 17 Aug 2026 05:16 PM IST
सार
CG CM vishnudeo sai farming: छत्तीसगढ़ के सीएम विष्णुदेव साय के लिये सावन सोमवार का तीसरा दिन खेती-किसानी के नाम रहा। वे सुबह-सुबह बैलों को लेकर पानी भरे खेत में हल की मूठ और बैलों को हांकने के लिये छड़ी थामे किसान के रूप में नजर आये।
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सीएम विष्णुदेव साय
- फोटो : अमर उजाला डिजिटल
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विस्तार
CG CM vishnudeo sai farming: छत्तीसगढ़ के सीएम विष्णुदेव साय के लिये सावन सोमवार का तीसरा दिन खेती-किसानी के नाम रहा। वे सुबह-सुबह बैलों को लेकर पानी भरे खेत में हल की मूठ और बैलों को हांकने के लिये छड़ी थामे किसान के रूप में नजर आये। जशपुर जिले के अपने गांव बगिया में हल चलाकर बियासी की। इस दौरान उन्होंने खेती-किसानी से जुड़ी अपनी पुरानी यादों को ताजा किया।
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इस दौरान मुख्यमंत्री साय ने कहा कि वे किसान परिवार से हैं और बचपन से खेती-किसानी को बहुत करीब से देखा और अनुभव किया है। ये मोर माटी, मोर किसानी और मोर अभियान है। मुख्यमंत्री ने हरे-भरे खेत में मिट्टी की सौंधी सुगंध और बैलों के साथ खेती करते हुए कहा कि अपने गांव, अपनी माटी और अपने खेत से जुड़ाव का सुख ही अलग है। खेतों के बीच बिताया समय मन को असीम सुकून देने के साथ नई ऊर्जा से भर देता है।
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मुख्यमंत्री ने कहा कि खेती उनके लिए केवल आजीविका का माध्यम नहीं, बल्कि जीवन का संस्कार है। गांव और खेतों ने ही उन्हें श्रम का सम्मान करना, प्रकृति के साथ सामंजस्य बनाकर चलना और अपनी जड़ों से जुड़े रहना सिखाया है। छत्तीसगढ़ की पहचान यहां की माटी, मेहनतकश किसानों और समृद्ध कृषि परंपराओं से जुड़ी हुई है। प्रदेश की अर्थव्यवस्था और सामाजिक-सांस्कृतिक जीवन में खेती का महत्वपूर्ण स्थान है। पीढ़ियों से हमारे किसान अपने परिश्रम से धरती को सींचते हुए प्रदेश की समृद्धि की नींव मजबूत करते आए हैं। छत्तीसगढ़ के तीज-त्योहार, परंपराएं और ग्रामीण जीवन भी कृषि से गहराई से जुड़े हुए हैं।
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उन्होंने कहा कि आधुनिकता के इस दौर में भी अपनी परंपराओं और जड़ों से जुड़ाव बनाए रखना महत्वपूर्ण है। खेती हमें परिश्रम, धैर्य और प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता का संदेश देती है। किसान खेत में केवल फसल नहीं उगाता, बल्कि अपने श्रम से पूरे समाज के जीवन और प्रदेश की अर्थव्यवस्था को भी संबल देता है। छत्तीसगढ़ की माटी, हमारी समृद्ध कृषि परंपरा और हमारे मेहनतकश अन्नदाता किसान सदैव उनके हृदय के सबसे करीब हैं। किसानों की खुशहाली और कृषि की समृद्धि ही प्रदेश की समृद्धि का मजबूत आधार है। मुख्यमंत्री ने प्रदेश के अन्नदाता किसानों के परिश्रम को नमन करते हुए उनके जीवन में खुशहाली तथा खेतों में भरपूर फसल की कामना की।
खेती से रहा है पुराना नाता
सीएम साय का जीवन ग्रामीण परिवेश और खेती-किसानी से गहराई से जुड़ा रहा है। सार्वजनिक जीवन की व्यस्तताओं के बीच जब भी उन्हें अवसर मिलता है, वे अपने गांव, खेत और ग्रामीण परिवेश से जुड़कर आत्मीयता का अनुभव करते हैं। आज सुबह गृहग्राम बगिया के खेत में बैलों के साथ हल चलाते मुख्यमंत्री की सहजता में अपनी माटी और कृषि परंपरा के प्रति उनका यही गहरा लगाव नजर आया।