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रामानुजगंज: 22 वर्षों से मां महामाया के अनन्य भक्त दिव्यांग भोला सिंह, नवरात्र में पूरी लगन से करते हैं सेवा

अमर उजाला नेटवर्क, रामानुजगंज Published by: अमन कोशले Updated Fri, 26 Sep 2025 12:46 PM IST
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सार

60 वर्षीय दिव्यांग भोला सिंह पिछले 22 वर्षों से मंदिर में निशुल्क सेवा कर रहे हैं। चैत्र और शारदीय नवरात्र में जहाँ मंदिर में भीड़ और कार्यों की संख्या बढ़ जाती है, वहीं भोला सिंह की सेवा में कोई कमी नहीं आती।

Divyang Bhola Singh a dedicated devotee of Maa Mahamaya for 22 years, serves full dedication during Navratri
22 वर्षों से मां महामाया के अनन्य भक्त दिव्यांग भोला सिंह - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

छत्तीसगढ़ के रामानुजगंज नगर के वार्ड क्रमांक 9 में स्थित मां महामाया मंदिर में एक ऐसा व्यक्तित्व है, जिसकी भक्ति और निष्ठा देखकर हर कोई दंग रह जाता है। 60 वर्षीय दिव्यांग भोला सिंह पिछले 22 वर्षों से मंदिर में निशुल्क सेवा कर रहे हैं। चैत्र और शारदीय नवरात्र में जहाँ मंदिर में भीड़ और कार्यों की संख्या बढ़ जाती है, वहीं भोला सिंह की सेवा में कोई कमी नहीं आती।
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भोला सिंह बताते हैं कि वे सुबह 3 बजे उठते हैं और रात्रि में केवल 12 बजे सोते हैं। इस दौरान वे मंदिर की हर छोटी-बड़ी जिम्मेदारी निभाते हैं। चाहे गर्मी हो, बारिश या ठंड, वे प्रतिदिन रामानुजगंज से अपने गाँव चिनिया (रामचंद्रपुर विकासखंड) से 15 किलोमीटर की दूरी तय कर मंदिर आते हैं। वाहन उपलब्ध हो तो चार-पहिया या दो-पहिया का उपयोग करते हैं, अन्यथा पैदल ही चलते हैं।
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भक्ति की अनूठी छवि
भोला सिंह के अनुसार, यह निरंतर सेवा संभव हुई है मां महामाया के आशीर्वाद से। उनका कहना है कि माँ का आशीर्वाद ही उन्हें स्वस्थ रखता है और कभी उनकी सेवा में कमी नहीं आने दी। बचपन से ही पूजा-पाठ में रुचि रखने वाले भोला सिंह ने पिछले 22 वर्षों में अपने पूरे जीवन का समय मंदिर की सेवा में समर्पित कर दिया है।

पुजारी की प्रशंसा
मां महामाया मंदिर के पुजारी जितेंद्र पांडे कहते हैं कि भोला सिंह हर दिन अपने निर्धारित समय पर मंदिर पहुंचते हैं और सेवा कार्यों में कोई कमी नहीं होने देते। उनका समर्पण वास्तव में अद्वितीय है। भोला सिंह की भक्ति और निष्ठा यह साबित करती है कि सच्ची भक्ति किसी शारीरिक अक्षमता या कठिनाइयों से बाधित नहीं होती। उनका यह समर्पण न केवल मंदिर बल्कि पूरे रामानुजगंज समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत बन चुका है।
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