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GPM: शिक्षा विभाग के आदेश का विरोध, मुस्लिम विकास मंच का प्रदर्शन; रैली निकाल राज्यपाल के नाम सौंपा ज्ञापन
अमर उजाला नेटवर्क, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही
Published by: अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 22 Jun 2026 04:56 PM IST
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सार
गौरेला-पेंड्रा-मरवाही में मुस्लिम विकास मंच ने स्कूल शिक्षा विभाग के धार्मिक मंत्र और वंदना संबंधी आदेश के विरोध में धरना-प्रदर्शन और मौन रैली निकाली। राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौंपकर आदेश वापस लेने की मांग की गई और संविधान की धर्मनिरपेक्ष भावना बनाए रखने पर जोर दिया।
शासन के आदेश का मुस्लिमो ने किया विरोध।।
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विस्तार
छत्तीसगढ़ शासन के स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा शासकीय विद्यालयों की दैनिक गतिविधियों में धार्मिक मंत्रों के उच्चारण और वंदनाओं को शामिल किए जाने संबंधी जारी आदेश का विरोध अब जिले में भी शुरू हो गया है। सोमवार को मुस्लिम विकास मंच के पदाधिकारियों और सदस्यों ने इस आदेश के विरोध में धरना-प्रदर्शन और मौन रैली निकालकर राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौंपा तथा आदेश को तत्काल वापस लेने की मांग की।
गौरेला-पेंड्रा-मरवाही में मुस्लिम विकास मंच के नेतृत्व में विरोध प्रदर्शन की शुरुआत गौरेला स्थित धरना स्थल लाल बंगला से हुई। धरना-प्रदर्शन में शामिल लोगों ने हाथों में काली पट्टी बांधकर शासन के आदेश के प्रति अपना विरोध दर्ज कराया। इसके बाद मंच के सदस्य लाल बंगला से कलेक्टर कार्यालय तक मौन रैली के रूप में पहुंचे। रैली के दौरान प्रदर्शनकारियों ने संविधान में निहित धर्मनिरपेक्ष मूल्यों को बनाए रखने की मांग उठाई। कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर मंच के प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौंपा।
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मुस्लिम विकास मंच के अध्यक्ष असद सिद्दीकी ने कहा कि शासकीय विद्यालय सभी वर्गों, समुदायों और धर्मों के विद्यार्थियों के लिए समान रूप से शिक्षा का केंद्र हैं। ऐसे में किसी विशेष धार्मिक मंत्र या वंदना को विद्यालय की दैनिक गतिविधियों में अनिवार्य रूप से शामिल करना संविधान की धर्मनिरपेक्ष भावना के अनुरूप नहीं है। उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य विद्यार्थियों को ज्ञान, नैतिकता और सामाजिक मूल्यों से जोड़ना है, न कि किसी विशेष धार्मिक परंपरा को बढ़ावा देना।
ज्ञापन में उल्लेख किया गया है कि 12 जून 2026 को जारी आदेश से विभिन्न धर्मों और समुदायों के विद्यार्थियों की भावनाएं प्रभावित हो सकती हैं। मंच ने शासन से मांग की है कि इस आदेश पर पुनर्विचार करते हुए इसे तत्काल वापस लिया जाए। साथ ही शासकीय विद्यालयों में ऐसा वातावरण बनाए रखने की आवश्यकता बताई गई है, जहां सभी विद्यार्थी बिना किसी धार्मिक भेदभाव के समानता और सम्मान के साथ शिक्षा प्राप्त कर सकें।
मुस्लिम विकास मंच ने कहा कि शिक्षा संस्थानों की पहचान समावेशी और धर्मनिरपेक्ष होनी चाहिए तथा शासन को संविधान की मूल भावना के अनुरूप निर्णय लेना चाहिए। प्रदर्शन के दौरान मंच के पदाधिकारियों और सदस्यों के साथ बड़ी संख्या में मुस्लिम समाज के लोग मौजूद रहे।
