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CG: शराब-डीएमएफ घोटालों पर जांच एजेंसियों का शिकंजा, ढेबर-टुटेजा नेटवर्क की 1400 करोड़ से ज्यादा संपत्ति कुर्क
अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर
Published by: अमन कोशले
Updated Fri, 05 Jun 2026 07:04 PM IST
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सार
शराब, डीएमएफ, नकली होलोग्राम और प्लेसमेंट घोटालों की जांच के बीच प्रवर्तन निदेशालय और ईओडब्ल्यू ने बड़ी कार्रवाई करते हुए कथित भ्रष्टाचार नेटवर्क से जुड़ी 1,400 करोड़ रुपये से अधिक की चल-अचल संपत्तियों को कुर्क किया है।
पूर्व आईएएस अधिकारी अनिल टुटेजा और कारोबारी अनवर ढेबर
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
छत्तीसगढ़ में शराब, डीएमएफ, नकली होलोग्राम और प्लेसमेंट घोटालों की जांच के बीच प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (ईओडब्ल्यू) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए कथित भ्रष्टाचार नेटवर्क से जुड़ी 1,400 करोड़ रुपये से अधिक की चल-अचल संपत्तियों को कुर्क किया है। जांच एजेंसियों का दावा है कि इन मामलों में करोड़ों रुपये के अवैध लेनदेन और सरकारी संसाधनों के दुरुपयोग के प्रमाण सामने आए हैं।
जांच के केंद्र में पूर्व आईएएस अधिकारी अनिल टुटेजा और कारोबारी अनवर ढेबर हैं, जिन्हें एजेंसियां इन कथित घोटालों का प्रमुख संचालक मान रही हैं। अधिकारियों के अनुसार, विभिन्न योजनाओं और सरकारी व्यवस्थाओं का दुरुपयोग कर बड़े पैमाने पर आर्थिक लाभ अर्जित किया गया, जिसकी जांच अब अंतिम चरणों में पहुंच रही है।
शराब घोटाले में सबसे बड़ी कार्रवाई
ईडी की जांच के अनुसार शराब कारोबार से जुड़े मामले में अब तक 85 लोगों को आरोपी बनाया गया है। एजेंसी का आरोप है कि सरकारी दुकानों के माध्यम से अवैध शराब बिक्री का समानांतर तंत्र संचालित किया गया, जिससे हजारों करोड़ रुपये का अवैध मुनाफा कमाया गया। जांच में यह भी दावा किया गया है कि शराब की प्रत्येक पेटी पर अवैध वसूली की व्यवस्था बनाई गई थी।
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डीएमएफ और अन्य मामलों की भी जांच तेज
जिला खनिज न्यास (डीएमएफ) फंड के उपयोग में कथित अनियमितताओं को लेकर भी जांच जारी है। आरोप है कि ठेका प्रक्रियाओं में प्रभाव का इस्तेमाल कर पसंदीदा कंपनियों को लाभ पहुंचाया गया और कमीशनखोरी का नेटवर्क विकसित किया गया। इसके अलावा नकली होलोग्राम और प्लेसमेंट से जुड़े मामलों में भी करोड़ों रुपये की गड़बड़ी की आशंका जताई गई है।
संपत्तियों पर एजेंसियों की बड़ी कार्रवाई
जांच के दौरान विभिन्न शहरों में स्थित व्यावसायिक परिसरों, जमीनों, होटलों, कंपनियों के बैंक खातों, निवेश योजनाओं और अन्य संपत्तियों को जब्त या कुर्क किया गया है। एजेंसियों का दावा है कि इनमें से कई संपत्तियां कथित तौर पर अवैध कमाई से अर्जित की गई थीं। कुर्क संपत्तियों में रायपुर और अन्य स्थानों की अचल संपत्तियां, होटल, शेल कंपनियों से जुड़े निवेश, बैंक खाते, म्यूचुअल फंड, आभूषण और नकदी शामिल हैं। जांच एजेंसियां इन परिसंपत्तियों के वित्तीय स्रोतों की भी पड़ताल कर रही हैं।
पीएमएलए के तहत आगे बढ़ेगी कार्रवाई
ईडी ने मामले में धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत आरोप पत्र दायर कर दिया है। एजेंसी का कहना है कि सभी मामलों में जुटाए गए दस्तावेजी और वित्तीय साक्ष्यों के आधार पर विशेष अदालत में ट्रायल की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी। कई आरोपियों की जमानत याचिकाएं भी विभिन्न अदालतों में खारिज हो चुकी हैं।
जांच अधिकारियों का मानना है कि आने वाले समय में इस मामले में और भी महत्वपूर्ण खुलासे हो सकते हैं। वहीं, कुर्क की गई संपत्तियों और वित्तीय लेनदेन की विस्तृत फोरेंसिक जांच भी जारी है, जिससे पूरे नेटवर्क की कार्यप्रणाली सामने आने की संभावना है।
जांच के केंद्र में पूर्व आईएएस अधिकारी अनिल टुटेजा और कारोबारी अनवर ढेबर हैं, जिन्हें एजेंसियां इन कथित घोटालों का प्रमुख संचालक मान रही हैं। अधिकारियों के अनुसार, विभिन्न योजनाओं और सरकारी व्यवस्थाओं का दुरुपयोग कर बड़े पैमाने पर आर्थिक लाभ अर्जित किया गया, जिसकी जांच अब अंतिम चरणों में पहुंच रही है।
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शराब घोटाले में सबसे बड़ी कार्रवाई
ईडी की जांच के अनुसार शराब कारोबार से जुड़े मामले में अब तक 85 लोगों को आरोपी बनाया गया है। एजेंसी का आरोप है कि सरकारी दुकानों के माध्यम से अवैध शराब बिक्री का समानांतर तंत्र संचालित किया गया, जिससे हजारों करोड़ रुपये का अवैध मुनाफा कमाया गया। जांच में यह भी दावा किया गया है कि शराब की प्रत्येक पेटी पर अवैध वसूली की व्यवस्था बनाई गई थी।
डीएमएफ और अन्य मामलों की भी जांच तेज
जिला खनिज न्यास (डीएमएफ) फंड के उपयोग में कथित अनियमितताओं को लेकर भी जांच जारी है। आरोप है कि ठेका प्रक्रियाओं में प्रभाव का इस्तेमाल कर पसंदीदा कंपनियों को लाभ पहुंचाया गया और कमीशनखोरी का नेटवर्क विकसित किया गया। इसके अलावा नकली होलोग्राम और प्लेसमेंट से जुड़े मामलों में भी करोड़ों रुपये की गड़बड़ी की आशंका जताई गई है।
संपत्तियों पर एजेंसियों की बड़ी कार्रवाई
जांच के दौरान विभिन्न शहरों में स्थित व्यावसायिक परिसरों, जमीनों, होटलों, कंपनियों के बैंक खातों, निवेश योजनाओं और अन्य संपत्तियों को जब्त या कुर्क किया गया है। एजेंसियों का दावा है कि इनमें से कई संपत्तियां कथित तौर पर अवैध कमाई से अर्जित की गई थीं। कुर्क संपत्तियों में रायपुर और अन्य स्थानों की अचल संपत्तियां, होटल, शेल कंपनियों से जुड़े निवेश, बैंक खाते, म्यूचुअल फंड, आभूषण और नकदी शामिल हैं। जांच एजेंसियां इन परिसंपत्तियों के वित्तीय स्रोतों की भी पड़ताल कर रही हैं।
पीएमएलए के तहत आगे बढ़ेगी कार्रवाई
ईडी ने मामले में धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत आरोप पत्र दायर कर दिया है। एजेंसी का कहना है कि सभी मामलों में जुटाए गए दस्तावेजी और वित्तीय साक्ष्यों के आधार पर विशेष अदालत में ट्रायल की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी। कई आरोपियों की जमानत याचिकाएं भी विभिन्न अदालतों में खारिज हो चुकी हैं।
जांच अधिकारियों का मानना है कि आने वाले समय में इस मामले में और भी महत्वपूर्ण खुलासे हो सकते हैं। वहीं, कुर्क की गई संपत्तियों और वित्तीय लेनदेन की विस्तृत फोरेंसिक जांच भी जारी है, जिससे पूरे नेटवर्क की कार्यप्रणाली सामने आने की संभावना है।