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'मोर गांव मोर पानी': कबीरधाम में 4975 कंटूर ट्रेंच से बदलेगी तस्वीर, 53 लाख लीटर जल संरक्षण की संभावना

अमर उजाला नेटवर्क, कबीरधाम Published by: कबीरधाम ब्यूरो Updated Tue, 10 Mar 2026 04:11 PM IST
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सार

महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के तहत वित्तीय वर्ष 2025-26 में जिले में बंजर भूमि विकास के लिए कुल 4 हजार 975 कंटूर ट्रेंच का निर्माण कराया गया, जिससे लगभग 53 लाख 73 हजार लीटर वर्षा जल संरक्षण होने की संभावना है।

Kabirdham 4975 contour trenches will change landscapea water crisis
कंटूर ट्रेंच बनाए - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

जिले में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के तहत जल संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण कार्य किए जा रहे हैं। वित्तीय वर्ष 2025-26 में बंजर भूमि को विकसित करते हुए कंटूर ट्रेंच का निर्माण कराया गया है। इससे लगभग 53 लाख 73 हजार लीटर जल संरक्षण होने की संभावना है।

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जिले में बढ़ते जल संकट को देखते हुए इसके समाधान के लिए लगातार प्रयास हो रहे हैं। 'गांव का पानी गांव में व घर का पानी घर में' के उद्देश्य से 'मोर गांव मोर पानी' महा अभियान शुरू किया गया है। इस अभियान के तहत गत वर्ष लोगों ने स्व प्रेरणा से सोख्ता गड्ढे भी बनाए थे। 
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जनपद पंचायत सहसपुर लोहारा के ग्राम कोराइडोंगरी में 15.48 एकड़ बंजर भूमि पर 2 हजार 511 कंटूर ट्रेंच बने हैं। वहीं, ग्राम वडोदराकला में 13.70 एकड़ भूमि पर 2 हजार 464 कंटूर ट्रेंच का निर्माण पूरा हुआ है। इन कंटूर ट्रेंच से वर्षा जल का बेहतर संचय होता है। इससे भू-जल स्तर में सुधार, मृदा संरक्षण और हरियाली बढ़ाने में काफी मदद मिलेगी। यह कार्य जिले में जल संरक्षण की दिशा में एक ठोस कदम है।

कलेक्टर ने की प्रशासन की सराहना
कलेक्टर गोपाल वर्मा ने कहा कि कंटूर ट्रेंच जैसे कार्य विकास और पर्यावरण संरक्षण की ठोस सोच दर्शाते हैं। स्थानीय ग्रामीणों ने इसे क्षेत्र में जल संरक्षण की शुरुआत बताया है। उन्होंने प्रशासन की इस पहल की सराहना की है। जिले में अमृत सरोवर, आजीविका डबरी, तालाब गहरीकरण जैसे अनेक कार्य हो रहे हैं। नया तालाब निर्माण, नाली निर्माण और नाला गाद सफाई भी इसी दिशा में किए जा रहे हैं।

'भू-जल स्तर सुधारने के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी'
जिला पंचायत मुख्य कार्यकारी अधिकारी अभिषेक अग्रवाल ने गिरते भू-जल स्तर पर मिलकर काम करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि मैदानी और वनांचल दोनों क्षेत्रों में पानी रोकने के काम में सबको आगे आना होगा। जल संरक्षण से ही सुनहरे भविष्य की कल्पना की जा सकती है। पानी की बचत केवल कृषि के लिए ही नहीं, बल्कि पर्यावरण और पूरी अर्थव्यवस्था के लिए भी आवश्यक है।

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