कबीरधाम: 6 महीने तक बंधक बने रहे बैगा बच्चे, 8-15 साल के मासूमों से दिनभर कराते थे मजदूरी, 8 आरोपी गिरफ्तार
कबीरधाम जिले के जंगल व पहाड़ी इलाकों से एक बेहद संवेदनशील मामला सामने आया है। यहां विशेष संरक्षित बैगा जनजाति के 13 नाबालिग बच्चों को उनके माता-पिता को पैसों का लालच देकर गांवों से ले जाया गया और फिर महीनों तक उनसे बंधुआ मजदूरों की तरह काम कराया गया।
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कबीरधाम जिले के जंगल व पहाड़ी इलाकों से एक बेहद संवेदनशील मामला सामने आया है। यहां विशेष संरक्षित बैगा जनजाति के 13 नाबालिग बच्चों को उनके माता-पिता को पैसों का लालच देकर गांवों से ले जाया गया और फिर महीनों तक उनसे बंधुआ मजदूरों की तरह काम कराया गया। बच्चों की उम्र महज 8 से 15 साल के बीच है। इस मामले को लेकर आज गुरुवार को खुलासा हुआ है। पुलिस से मिली जानकारी अनुसार मासूमों से सुबह 6 बजे से लेकर शाम 7 बजे तक लगातार मवेशी चराने, देखभाल करने व अन्य कठिन काम कराए जाते थे। इसके बदले बच्चों को एक रुपया तक नहीं मिलता था। उनके माता-पिता को सिर्फ एक से दो हजार रुपए महीने देकर बच्चों को अपने कब्जे में रखा गया था।
ऐसे खुला पूरा मामला
एसपी धर्मेंद्र सिंह को सूचना मिली थी कि ग्राम थूहापानी और आसपास के इलाकों से बैगा जनजाति के कई बच्चों को बहला-फुसलाकर ले जाया गया है और उनसे जबरन मजदूरी कराई जा रही है। सूचना मिलते ही पुलिस ने इसे मानव तस्करी और बाल शोषण का गंभीर मामला मानते हुए विशेष टीम गठित की। इसके बाद पुलिस ने ग्राम भलपहरी, खरहट्टा, पांडातराई, सारंगपुर कला, कान्हाभैरा और दशरंगपुर में एक साथ दबिश दी। कार्रवाई के दौरान 13 बच्चों को अलग-अलग स्थानों से मुक्त कराया गया।
बच्चों ने सुनाई दर्दनाक कहानी
रेस्क्यू के बाद बच्चों को थाना लाकर पूछताछ की गई। बच्चों ने बताया कि उन्हें गांव से यह कहकर ले जाया गया था कि वहां काम के साथ अच्छा खाना और देखभाल मिलेगी, लेकिन वहां पहुंचते ही उनसे लगातार मजदूरी कराई जाने लगी। बच्चों ने बताया कि उन्हें सुबह तड़के उठाकर मवेशियों के साथ जंगल भेज दिया जाता था। दिनभर की मेहनत के बाद भी उन्हें न तो मजदूरी मिलती थी और न ही पढ़ाई का कोई अवसर। कई बच्चे महीनों से अपने परिवार तक से नहीं मिल पाए थे।
बालगृह में रखा गया, काउंसलिंग शुरू
रेस्क्यू के बाद जिला बाल संरक्षण इकाई और चाइल्ड लाइन की टीम को बुलाया गया। बाल कल्याण समिति के निर्देश पर सभी बच्चों को फिलहाल सुरक्षित बालगृह में रखा गया है, जहां उनकी काउंसलिंग और स्वास्थ्य परीक्षण कराया जा रहा है।
इन गंभीर धाराओं में केस दर्ज
मामले में थाना भोरमदेव में अपराध दर्ज किया गया है। आरोपियों पर भारतीय न्याय संहिता (BNS), किशोर न्याय अधिनियम, बाल एवं किशोर श्रम (प्रतिषेध एवं विनियमन) अधिनियम, बंधुआ मजदूर प्रणाली (उन्मूलन) अधिनियम और एससी-एसटी एक्ट की गंभीर धाराओं के तहत कार्रवाई की गई है।
8 आरोपी गिरफ्तार
पुलिस ने इस मामले में 8 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इनमें रामू यादव पिता इतवारी यादव (53) निवासी ग्राम भलपहरी, रवि यादव पिता गोपाल यादव (38) निवासी ग्राम थूहापानी, धनीराम यादव पिता ज्ञान यादव(55) निवासी ग्राम कान्हाभेरा, सर्वन यादव पिता कपिल यादव (45) निवासी ग्राम कान्हाभेरा, दीपक यादव पिता रामजी यादव (25) निवासी ग्राम कान्हाभेरा, रामफल यादव ग्राम सारंगपुर, राम बिहारी यादव, रुपेश यादव शामिल हैं। एसपी धर्मेंद्र सिंह ने कहा कि बच्चों से मजदूरी कराना न केवल कानूनन अपराध है, बल्कि मानवता के खिलाफ भी है। उन्होंने लोगों से अपील की कि बाल श्रम, बंधुआ मजदूरी या बाल तस्करी जैसी जानकारी मिलते ही तुरंत पुलिस को सूचना दे।