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सुकमा की बदली तस्वीर: स्वास्थ्य की रोशनी से चमका गोगुंडा, दूरस्थ गांवों तक पहुंची हेल्थ सर्विस
अमर उजाला ब्यूरो, सुकमा
Published by: Lalit Kumar Singh
Updated Mon, 01 Jun 2026 11:59 PM IST
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सार
Sukma news: सुकमा जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के प्रयासों से कभी नक्सल प्रभावित रहा सुकमा जिले के सुदूर गांव गोगुण्डा में अब उम्मीद का नया सवेरा हुआ है।
सुकमा की बदली तस्वीर
- फोटो : Amar ujala digital
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विस्तार
Sukma news: सुकमा जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के प्रयासों से कभी नक्सल प्रभावित रहा सुकमा जिले के सुदूर गांव गोगुण्डा में अब उम्मीद का नया सवेरा हुआ है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व और स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल के प्रयासों से जिला चिकित्सालय सुकमा ने स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की है।
गोगुण्डा के 10 मोतियाबिंद मरीजों का सफल ऑपरेशन किया गया। इस सफल सर्जरी के जरिए इन ग्रामीणों के जीवन के अंधेरे को दूर कर उन्हें नई दृष्टि का अनमोल उपहार दिया गया है। यह पूरी प्रक्रिया स्वास्थ्य विभाग की संवेदनशीलता और सुव्यवस्थित कार्यप्रणाली का बेहतरीन उदाहरण है।
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स्वास्थ्य विभाग की टीमें खुद दुर्गम गांवों में पहुंचकर घर-घर सर्वे कर रही हैं और मोतियाबिंद के मरीजों की पहचान कर रही हैं। इसके बाद, मरीजों को पूरे सम्मान के साथ विशेष वाहनों से जिला चिकित्सालय लाया जाता है। जहाँ विशेषज्ञ डॉक्टरों की देखरेख में उनका निःशुल्क इलाज होता है। ऑपरेशन के बाद भी मरीजों को डॉक्टरों की सख्त निगरानी में रखा जाता है और पूरी तरह स्वस्थ होने पर रविवार को उन्हें सकुशल उनके घरों तक वापस पहुंचाया गया।
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स्वस्थ बस्तर के इस अभियान में केवल इलाज ही नहीं, बल्कि हितग्राहियों के सम्मान और आत्मीयता का भी पूरा ध्यान रखा जा रहा है। अस्पताल से छुट्टी के दौरान मरीजों का उत्साहवर्धन करने के लिए उन्हें फल वितरित किए जा रहे हैं। इसके साथ ही, डिस्चार्ज हुए मरीजों और उनके परिजनों को प्रेरित किया गया कि वे अपने आस-पड़ोस के अन्य मोतियाबिंद पीड़ितों को भी इलाज के लिए जिला चिकित्सालय लाएँ। यह भावुक अपील अब एक जन-जागरूकता अभियान का रूप ले रही है, ताकि कोई भी जरूरतमंद इलाज से वंचित न रहे।
स्वास्थ्य मंत्री जायसवाल ने कहा है कि कभी विकास की मुख्यधारा से कटे इन सुदूर ग्रामीण अंचलों में स्वास्थ्य सेवाओं का यह विस्तार सुकमा की बदलती तस्वीर को बयां करता है। नक्सल गतिविधियों में आई भारी कमी के बाद, अब शासन की कल्याणकारी योजनाएं और बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाएं सीधे गांव-गांव तक बिना किसी बाधा के पहुँच रही हैं।