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Korba: डीएमएफ फंड घोटाले पर हाईकोर्ट की सख्ती, तीन सदस्यीय समिति के सामने शिकायतों लगा अंबार

अमर उजाला नेटवर्क, कोरबा Published by: कोरबा ब्यूरो Updated Wed, 14 Jan 2026 10:23 PM IST
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सार

जिला खनिज न्यास मद में बड़े पैमाने पर नियम विरुद्ध आवंटन और दुरुपयोग के आरोपों की जांच के लिए बिलासपुर हाईकोर्ट के निर्देश पर गठित तीन सदस्यीय समिति आज कोरबा कलेक्ट्रेट में पहुंची। पूरे दिन सुनवाई चली। जहां याचिकाकर्ताओं, जनप्रतिनिधियों और सैकड़ों प्रभावित ग्रामीणों ने शिकायती दीं।

flood of complaints filed before three-member committee investigating DMF fund scam
डीएमएफ फंड के दुरुपयोग की जांच के लिए पहुंची समिति - फोटो : अमर उजाला
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जिला खनिज न्यास मद (डीएमएफ) में नियमों के विरुद्ध राशि के आवंटन और दुरुपयोग की जांच के लिए पहुंची तीन सदस्यीय समिति के समक्ष आज शिकायतों का अंबार लग गया। बिलासपुर हाईकोर्ट के कड़े रुख के बाद गठित इस समिति ने कोरबा कलेक्ट्रेट में याचिकाकर्ताओं और प्रभावित ग्रामीणों के बयान दर्ज किए।
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सुनवाई के दौरान मुख्य याचिकाकर्ताओं के साथ-साथ बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने भी हिस्सा लिया। याचिकाकर्ताओं लक्ष्मी चौहान, सपुरन कुलदीप और अजय श्रीवास्तव के साथ-साथ अन्य जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने समिति को बताया कि किस प्रकार प्रभावितों के हक के पैसे का बंदरबांट किया जा रहा है। शिकायत दर्ज कराने वालों में जनपद सदस्य बसन्त कुमार कंवर और अनिल टंडन, ग्राम सरपंच गौरी बाई, विष्णु बिंझवार और लोकेश कंवर, तथा समिति एवं ग्रामीण प्रतिनिधि रुद्र दास महंत, सतीश कुमार और देवेंद्र कुमार प्रमुख थे। दर्जन भर अन्य ग्रामीणों ने भी डीएमएफ फंड के दुरुपयोग पर कड़ा विरोध जताया।
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ग्रामीणों ने समिति को अवगत कराया कि कोयला खदान क्षेत्र से प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित 43 गांवों की स्थिति दयनीय है। विशेष रूप से उन 13 गांवों का मुद्दा उठाया गया जिन्हें 7 साल पहले 'आदर्श गांव' घोषित किया गया था, परंतु आज तक वहां कोई बुनियादी विकास कार्य नहीं हुआ है। शिकायतकर्ताओं ने मांग की कि नियम विरुद्ध किए जा रहे कार्यों को तत्काल रोका जाए और फंड का उपयोग केवल भूविस्थापितों के कल्याण के लिए किया जाए।

उपायुक्त विकास हरिशंकर चौहान, उपायुक्त राजस्व स्मृति तिवारी और लेखा अधिकारी स्मिता पांडे की समिति इन सभी शिकायतों का संकलन कर रही है। समिति को अगले 15 दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपनी है। यह मामला अब राजनीतिक और कानूनी रूप से अत्यंत संवेदनशील हो गया है। हाईकोर्ट की खंडपीठ ने इस मामले में अगली सुनवाई 30 जनवरी को निर्धारित की है। अब देखना यह होगा कि जांच समिति की रिपोर्ट में किन अधिकारियों और ठेकेदारों पर कार्रवाई होती है।
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