Exclusive: यहां श्रद्धालु चढ़ाते हैं घड़ी, घंटी, जंजीर, ताले और मेडिकल रिपोर्ट, पीएम मोदी भी हैं उनके भक्त
Maa Matangi Divya Dham Raipur: धमतरी जिले के कुरुद तहसील के जी-जामगांव स्थित इस दिव्य धाम में छत्तीसगढ़ समेत देश के कई राज्यों से श्रद्धालु बड़ी संख्या में पहुंचते हैं। इसके साथ ही यहां पर विदेशों से भी भक्त आते हैं। यहां पर आने वाले श्रद्धालु और भक्त मन्नत पूरी होने पर दीवार घड़ी, ताले, जंजीर, घंटी और मेडिकल रिपोर्ट चढ़ाते हैं।
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Maa Matangi Divya Dham Raipur: आप देश-प्रदेश के कई मंदिरों में गए होंगे। वहां पूजा भी किए होंगे। प्रसाद भी चढ़ाये होंगे, लेकिन हम एक ऐसे मंदिर की बात कर रहे हैं , जिसके बारे में आप सुनकर चौंक जाएंगे और आश्चर्य करेंगे। हम बात कर रहे हैं छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से 44 किलोमीटर दूर स्थित मां मातंगी दिव्य धाम की।
धमतरी जिले के कुरुद तहसील के जी-जामगांव स्थित इस दिव्य धाम में छत्तीसगढ़ समेत देश के कई राज्यों से श्रद्धालु बड़ी संख्या में पहुंचते हैं। इसके साथ ही यहां पर विदेशों से भी भक्त आते हैं। यहां पर आने वाले श्रद्धालु और भक्त मन्नत पूरी होने पर दीवार घड़ी, ताले, जंजीर, घंटी और मेडिकल रिपोर्ट चढ़ाते हैं। मंदिर परिसर के गर्भगृह से करीब 300 मीटर दूरी तक कच्ची सड़क के किनारे लाल-पीले कपड़े में बंधे नारियल, दीवार घड़ी, ताले, जंजीर, घंटी और मेडिकल रिपोर्ट दिखाई देते हैं। यह हम नहीं कह रहे हैं। यहां पर जो भी श्रद्धालु दर्शन करने के लिये आते हैं, यह उनकी अपनी आस्था, श्रद्धा और नजरिया है। मत है। खास और बड़ी बात ये है कि देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी उनके भक्त हैं।
क्यों बांधते हैं ताले, घड़ियां और घंटी?
मां मातंगी दिव्य दरबार जी जामगांव देश के कई राज्यों से लोग बड़ी संख्या में दर्शन करने के लिए आते हैं। वहीं कनाडा, नेपाल, भूटान, ऑस्ट्रेलिया समेत कई देशों से भी लोग बड़ी संख्या में पहुंचते हैं। यहां आने वाले श्रद्दालुओं का मानना है कि उनकी जो भी बीमारियां, कष्ट, तंत्र बांधा, भूत-प्रेत का साया आदि होते हैं। उसके लिये यहां पर वे प्रार्थना करते हैं। मन्नत मांगते हैं। जब उनकी बीमारियां और कष्ट दूर हो जाते हैं, तो यहां पर आकर लाल और पीले कपड़े में नारियल बांधते हैं। बांधे गये नारियल में मेडिकल रिपोर्ट की पुड़िया बनाकर चढ़ाए जाते हैं। दीवार घड़ी, घंटी, जंजीर, ताला और मेडिकल रिपोर्ट भी चढ़ाते हैं। यहां पर आपको बड़ी संख्या में दीवार घड़ी, घंटी, ताले, जंजीर और लाल-पीले कपड़े में बंधे नारियल दिखाई देंगे। मन्नत पूरी होने पर लोग परिवार के साथ पहुंचकर हवन भी करते हैं।
रात को बदलता है 'समय का चक्र'
श्रद्दालुओं का मानना और कहना है कि यहां पर बांधी गई घड़ियों का समय अपने आप बदल जाता है। श्रद्दालुओं की दिन दशा और चाल के मुताबिक घड़ियों का समय बदल जाता है। श्रद्दालु जिस समय पर घड़ी को सेट करके रखते हैं, वो रात के समय में बदल जाता है। इन घड़ियों में रात के दौरान जो समय दिखाई देता है, वह उनकी सही दिन दशा और चाल मानी जाती है। फिर उसके मुताबिक उनकी समस्याओं का निवारण किया जाता है।
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पीएम नरेंद्र मोदी की कुल देवी हैं मां मातंगी
सबसे बड़ी बात यह है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी इस धाम/मंदिर के भक्त हैं। मां मातंगी देवी पीएम मोदी और उनके परिवार की कुलदेवी हैं। आप कई बार देखे होंगे कि पीएम नरेंद्र मोदी अपने गृह प्रदेश गुजरात दौरे पर जाते हैं, तो मोढेरा में मोढेश्वरी मंदिर पहुंचते हैं और पूजा-अर्चना करते हैं। माता मोढेश्वरी देवी को ही मां मातंगी देवी भी कहते हैं। प्रधानमंत्री मोदी अपनी कुलदेवी मां मातंगी के कई बार दर्शन कर चुके हैं।
कौन हैं मां मातंगी ?
मां मातंगी का यह मंदिर 16वीं सदी में बना था। वेद और पुराणों के मुताबिक, मां मोढेश्वरी ने अपनी 18 भुजाओं के साथ कर्नाट नाम के राक्षण का सर्वनाश कर भक्तों को राक्षस के आतंक से मुक्ति दिलवाई थी। मां मोढेश्वरी के हर हाथ एक-एक हथियार है। इनमें त्रिशूल, खडगा, तलवार समेत दूसरे हथियार शामिल हैं। मंदिर में भी इसी रूप में वो विद्यमान हैं। माता का यह एतिहासिक मंदिर सन टेंपल के पास है। यहां पर बाहर से आने वाले श्रद्वालुओं के लिये रुकने की व्यवस्था है। मान्यता है कि वनवास काल के दौरान भगवान श्रीराम ने यहां पूजा अर्चना की थी।
कहां पर है यह धाम?
मां मातंगी दिव्य धाम छत्तीसगढ़ और ओडिशा है। इसके साथ ही मध्य प्रदेश में भी निर्माणाधीन है। रायपुर से 45 किलोमीटर दूर जी जामगांव में मां मातंगी दिव्य धाम है। इसके पीठाधीश्वर डॉ. प्रेमसाई महाराज हैं, जो यहां पर समय-समय पर दिव्य दरबार लगाते हैं। श्रद्धालुओं का कहना है कि महाराज इस दरबार में उनकी प्रेत बांधा, कष्टों, बीमारियों, दुखों और तमाम तरह की समस्याओं का हल करते हैं और वे ठीक होकर खुशी-खुशी यहां से जाते हैं।
अमर उजाला ने की श्रद्धालुओं से बातचीत
अमर उजाला टीम मां मातंगी दिव्य धाम जी-जामगांव पहुंची। यहां पर छत्तीसगढ़, यूपी, बिहार, झारखंड, महाराष्ट, ओडिशा, पश्चिम बंगाल, आंध्र प्रदेश, जम्मू कश्मीर आदि राज्यों से आने वाले कई श्रद्धालुओं से बातचीत की। उनकी आस्था, नजरिया और मत जाने। इस दौरान कई श्रद्धालु काफी भावुक नजर आए। इस धाम को लेकर उनकी क्या नजरिया है? क्या आस्था है? क्या श्रद्धा है? क्या मत है? सभी विंदुओं पर बातचीत की।
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कहां पर हैं मां मातंगी दिव्य धाम?
- छत्तीसगढ़
- ओडिशा
- गुजरात
- मध्य प्रदेश में निर्माणाधीन

श्रद्धालुओं के मत और दावे
इस दरबार में दर्शन करने के लिये आने वाले श्रद्धालुओं का मानना है कि यहां पर आने पर उनके सभी मनोरथ पूरे होते हैं। उनके कष्ट, बीमारियां और दुख-दर्द दूर होते हैं। प्रेमासाई महाराज के दरबार में चमत्कार होते हैं। समस्या लेकर आते हैं, समाधान की उम्मीद लेकर जाते हैं। बाबा दिव्य दरबार लगाकर उनकी फरियादें सुनते हैं। उन्हें बीमारियों, कष्टों, प्रेत बांधा समेत कई तरह के असाध्य रोगों से निजात दिलाते हैं। बाबा उनके दुखों का काट निकालते हैं। इसके लिये श्रद्धालुओं और अनुवायियों को उनकी समस्याओं के मुताबिक कई बार धाम में पेशी लगानी पड़ती है। कई 13 बार तो कोई सात बार पेशी लगाते हैं। पेशी में शामिल होने के लिये बाबा के अनुवायी देश के कई राज्यों से आते हैं। धाम में उनके ठहरने की व्यवस्था निशुल्क रहती है।
- बिहार के बेगूसराय जिले की रहने वाली श्रद्धालु मौसमी का कहना है कि वो चलने में पूरी तरह से असहाय थीं। उनके पिता उन्हें गोद में उठाकर ओडिशा ले गये थे। पटना से लेकर दिल्ली तक गईं। डॉक्टर्स जवाब दे चुके थे पर यहां पर आने के वाद आज वो अपने पैरों पर खड़ी हैं। अब उन्हें चलने-फिरने में कोई दिक्तत नहीं है। अब चल पा रही हैं।
- महाराष्ट्र के पुणे से आईं निशा सुधीर अग्रवाल का मानना है कि उनका पुनर्जन्म हुआ है। उनका और उनके पति का पुनर्जन्म हुआ है। यूपी के बनारस से पहुंचे श्रद्दालु का मानना है कि उनके बच्चे की शादी नहीं हो रही थी। बच्चा फांसी लगाने वाला था। अब सब ठीक है।
- पश्चिम बंगाल के वर्धमान जिले के रहने वाले श्रद्धालु का मानना है कि वे कोरोना काल के पहले से धाम से जुड़े हैं। उन्हें सोशल मीडिया के माध्यम से जानकारी मिली थी। उन्हें लक्ष्मी बंधन, वंश बंधन, समेत कई तरह की समस्याएं थी। उनका पर्चा ओडिशा में बना था। सात पेशी के बाद उनकी समस्याओं का समाधान हो चुका है। वो ओडिशा और रायपुर में कई बार आ चुके हैं।
- महाराष्ट्र के पुणे से पहुंचे बाला साहेब बताते हैं कि उन्हें 6 महीने पहले यहां की जानकारी मिली थी। इसके बाद उनका पर्चा बना। उन्हें, आर्थिक तंगी थी। बच्चे की शादी नहीं हो रही थी। कई तरह की परेशानी थी। धीरे-धीरे उनकी सभी समस्याओं का निवारण हो रहा है ।
- उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले की रहने वाली दीपा बताती है कि मेरी बेटियों के ऊपर कार्यवाही की गई थी। इसके ठीक करने के लिए जिसने भी, जो भी कहा, वो करती गई। नादखेड़ा, बनारस, बागेश्वर धाम गई पर उन्हें कोई लाभ नहीं मिला। हर जगह उनकी हंसी उड़ाई गई। यहां पर उनकी चारों बेटियों का निशुल्क पर्चा बना फिर समस्या का समाधान हुआ।
- झारखंड के लकी महतो, ओडि़शा के झारसुगुड़ा की सीमा बारिहा, राजस्थान के चारु जिले से नाथू सिंह, छत्तीसगढ़ की सूरजपुर जिले से आई वर्षा के इस धाम को लेकर अपने-अपने दावे, मत, आस्था और श्रद्धा है।