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Mahadev App: कारोबारी विकास गर्ग ने खोले काली कमाई के राज; महादेव सट्टा के जरिए हर महीने 450 करोड़ की वसूली
Sat, 18 Jul 2026 03:18 PM IST
Lalit Kumar Singh
अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर
अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर
Published by: Lalit Kumar Singh
Updated Sat, 18 Jul 2026 03:18 PM IST
सार
Mahadev betting app case: प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने महादेव सट्टा एप के जरिये होने वाली 450 करोड़ रुपए मासिक की काली कमाई के अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क खुलासा किया है।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : Amar ujala digital
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विस्तार
Mahadev betting app case: प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने महादेव सट्टा एप के जरिये होने वाली 450 करोड़ रुपए मासिक की काली कमाई के अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क खुलासा किया है। इस संबंध में नई दिल्ली से गिरफ्तार कारोबारी विकास गर्ग से पूछताछ की जा रही है।
ईडी के मुताबिक, ऑनलाइन सट्टेबाजी से मिले करोड़ों की रकम को नगद के बदले फर्जी एंट्री के जरिए शेल (फर्जी) कंपनियों में भेजा जाता था। फिर ब्लैकमनी को दुबई, मॉरिशस और यूनाइटेड किंगडम स्थित कंपनियों के जरिये कई लेवल पर भेजा जाता था। दुबई इस मनी लॉन्ड्रिंग खेल का केंद्रीय बिंदु था। वहां से राशि को मॉरिशस और यूके की कंपनियों में ट्रांसफर किया गया। इस रुपये को क्यूआईपी, एफपीआई, एफडीआई और एफसीसीबी जैसे वैध माध्यमों से विकास गर्ग के नियंत्रण वाली लिस्टेड और गैर-लिस्टेड कंपनियों में विदेशी निवेश के रूप में भारत वापस लाया गया।
इस काली कमाई से भारत और विदेशों में भारी मात्रा में शेयर, प्रतिभूतियां और अचल संपत्तियां खरीदी गईं। अपराध की इस काली कमाई का उपयोग अमेरिका की प्रतिष्ठित कंपनी 'ईबिक्स इंक' में 97.58% हिस्सेदारी खरीदने के लिए किया गया। इसके साथ ही ईडी ने महादेव सट्टा मामले में अब तक देश-विदेश में करीब चार हजार करोड़ रुपए की संपत्तियां कुर्क कर चुकी है। हाल ही में पांच जून को विकास गर्ग और उनके परिजनों की 940.77 करोड़ रुपए की वित्तीय और अचल संपत्तियां भी अस्थायी रूप से जब्त की है।
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ईडी के वकील सौरभ पांडे ने बताया कि कोर्ट ने विकास गर्ग को 24 जुलाई तक ईडी की कस्टडी में भेज दिया है। हमने कोर्ट को महादेव एप से उनके पास आए फंड के बारे में जानकारी दी। ईडी ने गर्ग पर ईबिक्स के शेयरों को "खत्म करने" और उन पर "दबाव" डालने का आरोप लगाया है। साथ ही उन पर अमेरिका में मौजूद कंपनी के हेडक्वार्टर की प्रॉपर्टी को गिरवी रखने और बेचने की कोशिश करने का भी आरोप है, जिसे एजेंसी ने इस मामले में अपराध से हुई कमाई माना है। गर्ग ईबिक्स ग्रुप के अलावा तीन लिस्टेड कंपनियों - विकास इकोटेक लिमिटेड, विकास लाइफकेयर लिमिटेड और एराया लाइफस्पेस लिमिटेड के प्रमोटर भी हैं।
ईबिक्सकैश में 64 प्रतिशत हिस्सेदारी
ईडी के अनुसार, उन्होंने कथिततौर पर अवैध सट्टेबाजी गतिविधियों से कमाए गए फंड का इस्तेमाल करके एराया लाइफस्पेस के जरिए ईबिक्सकैश में 64 प्रतिशत हिस्सेदारी हासिल की थी। पिछले हफ्ते, केंद्रीय एजेंसी ने एक प्रेस बयान में कहा था कि जांच के तहत उसने गर्ग, उनके परिवार के सदस्यों और उनसे जुड़ी कंपनियों की 940.77 करोड़ रुपये की संपत्ति अटैच की है।
छह हजार करोड़ की अवैध कमाई
ईडी ने कहा कि "यह अटैचमेंट महादेव ऑनलाइन बुक/स्काईएक्सचेंज अवैध ऑनलाइन सट्टेबाजी मामले में चल रही मनी लॉन्ड्रिंग जांच का हिस्सा है।" एजेंसी का आरोप है कि महादेव बेटिंग ऐप मामले में छत्तीसगढ़ के बड़े राजनेता और अधिकारी शामिल हैं। इस मामले में अपराध से हुई कमाई छह हजार करोड़ रुपये है। यह भी आरोप है कि महादेव ऑनलाइन बुक और स्काईएक्सचेंज (दुबई स्थित एक्सचेंज) के गैर-कानूनी बेटिंग के काम से हुई कमाई को हवाला के जरिये ठिकाने लगाया गया। इसके लिए शेल कंपनियों और दूसरे लेन-देन के ज़रिए कैश के बदले एंट्री का इंतजाम किया गया था।
940.77 करोड़ रुपये की अवैध कमाई
जांच से पता चला है कि महादेव ऑनलाइन बुक-स्काईएक्सचेंज बेटिंग के काम से हुई 940.77 करोड़ रुपये की अवैध कमाई को इसी तरह से उन कंपनियों में भेजा गया, जिनकी मालिक और कंट्रोलर गर्ग थे। ईडी का आरोप है कि इन पैसों का इस्तेमाल शेयर, सिक्योरिटी और दूसरी संपत्तियां खरीदने में किया गया। महादेव ऑनलाइन बेटिंग ऐप एक बड़े इंटरनेशनल बेटिंग सिंडिकेट के तौर पर काम करता था। यह 'टाइगर एक्सचेंज', 'गोल्ड-365' और 'लेजर-247' जैसे कई ऑनलाइन प्लेटफॉर्म और डोमेन नामों के जरिए गैर-कानूनी बेटिंग करवाता था। यह काम पूरे भारत में सहयोगियों की ओर से चलाए जा रहे "पैनल" और "ब्रांच" के फ़्रैंचाइजी-आधारित नेटवर्क के जरिए होता था, जबकि मुख्य प्रमोटर सौरभ चंद्राकर और रवि उप्पल दुबई से इस बेटिंग सिंडिकेट को कंट्रोल करते थे।
इस मामले में 14वीं गिरफ्तारी
इस मामले में यह 14वीं गिरफ्तारी है। रायपुर की स्पेशल कोर्ट में अब तक दाखिल पांच चार्जशीट में 74 लोगों/कंपनियों को आरोपी बनाया गया है।
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ईडी के मुताबिक, ऑनलाइन सट्टेबाजी से मिले करोड़ों की रकम को नगद के बदले फर्जी एंट्री के जरिए शेल (फर्जी) कंपनियों में भेजा जाता था। फिर ब्लैकमनी को दुबई, मॉरिशस और यूनाइटेड किंगडम स्थित कंपनियों के जरिये कई लेवल पर भेजा जाता था। दुबई इस मनी लॉन्ड्रिंग खेल का केंद्रीय बिंदु था। वहां से राशि को मॉरिशस और यूके की कंपनियों में ट्रांसफर किया गया। इस रुपये को क्यूआईपी, एफपीआई, एफडीआई और एफसीसीबी जैसे वैध माध्यमों से विकास गर्ग के नियंत्रण वाली लिस्टेड और गैर-लिस्टेड कंपनियों में विदेशी निवेश के रूप में भारत वापस लाया गया।
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इस काली कमाई से भारत और विदेशों में भारी मात्रा में शेयर, प्रतिभूतियां और अचल संपत्तियां खरीदी गईं। अपराध की इस काली कमाई का उपयोग अमेरिका की प्रतिष्ठित कंपनी 'ईबिक्स इंक' में 97.58% हिस्सेदारी खरीदने के लिए किया गया। इसके साथ ही ईडी ने महादेव सट्टा मामले में अब तक देश-विदेश में करीब चार हजार करोड़ रुपए की संपत्तियां कुर्क कर चुकी है। हाल ही में पांच जून को विकास गर्ग और उनके परिजनों की 940.77 करोड़ रुपए की वित्तीय और अचल संपत्तियां भी अस्थायी रूप से जब्त की है।
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ईडी के वकील सौरभ पांडे ने बताया कि कोर्ट ने विकास गर्ग को 24 जुलाई तक ईडी की कस्टडी में भेज दिया है। हमने कोर्ट को महादेव एप से उनके पास आए फंड के बारे में जानकारी दी। ईडी ने गर्ग पर ईबिक्स के शेयरों को "खत्म करने" और उन पर "दबाव" डालने का आरोप लगाया है। साथ ही उन पर अमेरिका में मौजूद कंपनी के हेडक्वार्टर की प्रॉपर्टी को गिरवी रखने और बेचने की कोशिश करने का भी आरोप है, जिसे एजेंसी ने इस मामले में अपराध से हुई कमाई माना है। गर्ग ईबिक्स ग्रुप के अलावा तीन लिस्टेड कंपनियों - विकास इकोटेक लिमिटेड, विकास लाइफकेयर लिमिटेड और एराया लाइफस्पेस लिमिटेड के प्रमोटर भी हैं।
ईबिक्सकैश में 64 प्रतिशत हिस्सेदारी
ईडी के अनुसार, उन्होंने कथिततौर पर अवैध सट्टेबाजी गतिविधियों से कमाए गए फंड का इस्तेमाल करके एराया लाइफस्पेस के जरिए ईबिक्सकैश में 64 प्रतिशत हिस्सेदारी हासिल की थी। पिछले हफ्ते, केंद्रीय एजेंसी ने एक प्रेस बयान में कहा था कि जांच के तहत उसने गर्ग, उनके परिवार के सदस्यों और उनसे जुड़ी कंपनियों की 940.77 करोड़ रुपये की संपत्ति अटैच की है।
छह हजार करोड़ की अवैध कमाई
ईडी ने कहा कि "यह अटैचमेंट महादेव ऑनलाइन बुक/स्काईएक्सचेंज अवैध ऑनलाइन सट्टेबाजी मामले में चल रही मनी लॉन्ड्रिंग जांच का हिस्सा है।" एजेंसी का आरोप है कि महादेव बेटिंग ऐप मामले में छत्तीसगढ़ के बड़े राजनेता और अधिकारी शामिल हैं। इस मामले में अपराध से हुई कमाई छह हजार करोड़ रुपये है। यह भी आरोप है कि महादेव ऑनलाइन बुक और स्काईएक्सचेंज (दुबई स्थित एक्सचेंज) के गैर-कानूनी बेटिंग के काम से हुई कमाई को हवाला के जरिये ठिकाने लगाया गया। इसके लिए शेल कंपनियों और दूसरे लेन-देन के ज़रिए कैश के बदले एंट्री का इंतजाम किया गया था।
940.77 करोड़ रुपये की अवैध कमाई
जांच से पता चला है कि महादेव ऑनलाइन बुक-स्काईएक्सचेंज बेटिंग के काम से हुई 940.77 करोड़ रुपये की अवैध कमाई को इसी तरह से उन कंपनियों में भेजा गया, जिनकी मालिक और कंट्रोलर गर्ग थे। ईडी का आरोप है कि इन पैसों का इस्तेमाल शेयर, सिक्योरिटी और दूसरी संपत्तियां खरीदने में किया गया। महादेव ऑनलाइन बेटिंग ऐप एक बड़े इंटरनेशनल बेटिंग सिंडिकेट के तौर पर काम करता था। यह 'टाइगर एक्सचेंज', 'गोल्ड-365' और 'लेजर-247' जैसे कई ऑनलाइन प्लेटफॉर्म और डोमेन नामों के जरिए गैर-कानूनी बेटिंग करवाता था। यह काम पूरे भारत में सहयोगियों की ओर से चलाए जा रहे "पैनल" और "ब्रांच" के फ़्रैंचाइजी-आधारित नेटवर्क के जरिए होता था, जबकि मुख्य प्रमोटर सौरभ चंद्राकर और रवि उप्पल दुबई से इस बेटिंग सिंडिकेट को कंट्रोल करते थे।
इस मामले में 14वीं गिरफ्तारी
इस मामले में यह 14वीं गिरफ्तारी है। रायपुर की स्पेशल कोर्ट में अब तक दाखिल पांच चार्जशीट में 74 लोगों/कंपनियों को आरोपी बनाया गया है।