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मेरी बेटी-मेरा अभिमान: बेटियों के सम्मान में सरकार का बड़ा कदम, 6,671 ग्रामीण स्कूलों में बनेंगे बालिका शौचालय
Fri, 07 Aug 2026 02:17 PM IST
अमन कोशले
अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर
अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर
Published by: अमन कोशले
Updated Fri, 07 Aug 2026 02:17 PM IST
सार
छत्तीसगढ़ के ग्रामीण इलाकों में बुनियादी सुविधाओं और रोजगार के विस्तार के लिए राज्य सरकार ने ‘मेरी बेटी–मेरा अभिमान’ अभियान की शुरुआत की है।
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मुख्यमंत्री ने 'मेरी बेटी–मेरा अभिमान' अभियान का किया शुभारंभ
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
छत्तीसगढ़ सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों में बालिकाओं की स्वच्छता और सम्मान से जुड़ी सुविधाओं को मजबूत करने के लिए व्यापक अभियान शुरू करने का निर्णय लिया है। 'मेरी बेटी–मेरा अभिमान' अभियान के तहत प्रदेश के 6 हजार 671 शासकीय स्कूलों में बालिकाओं के लिए नए शौचालय बनाए जाएंगे। इसके साथ ही गांवों में मुक्तिधाम, प्रतीक्षालय और जल संरक्षण से जुड़े कार्य भी कराए जाएंगे। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने मंत्रालय में विकसित भारत–रोजगार और आजीविका गारंटी मिशन (ग्रामीण) यानी वीबी-जी राम जी को लेकर आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में अभियान की घोषणा की। यह अभियान 15 अगस्त 2026 से 26 जनवरी 2027 तक चलेगा।
ग्रामीण क्षेत्रों के सरकारी स्कूलों में 6 हजार 671 बालिका शौचालयों के निर्माण पर 286.85 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। प्रत्येक शौचालय के लिए 4.30 लाख रुपये की लागत निर्धारित की गई है। सरकार का उद्देश्य स्कूलों में छात्राओं के लिए स्वच्छ और सुरक्षित सुविधाएं उपलब्ध कराना है। इसके अलावा 6 हजार 524 गांवों में प्रतीक्षालय सहित मुक्तिधाम बनाए जाएंगे। इस कार्य पर 391.44 करोड़ रुपये खर्च होंगे। वहीं 549 अन्य मुक्तिधामों के निर्माण के लिए 18.22 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
ग्रामीण क्षेत्रों में जल संकट और गिरते भूजल स्तर से निपटने के लिए बंद और डिफंक्ट 10 हजार 27 बोरवेल में सैंड फिल्टर और रिचार्ज संरचनाएं विकसित की जाएंगी। इस काम पर 52.14 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। सरकार का मानना है कि इन संरचनाओं से बारिश के पानी को जमीन में पहुंचाने, भूजल स्तर बढ़ाने और ग्रामीण इलाकों में जल उपलब्धता बेहतर करने में मदद मिलेगी। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को इन कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर स्वीकृत कर जल्द शुरू करने के निर्देश दिए हैं।
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उन्होंने बताया कि वीबी-जी राम जी योजना 1 जुलाई 2026 से देशभर में लागू हो चुकी है। इसके तहत ग्राम सभा की मंजूरी से विकास कार्यों का चयन किया जाएगा। मजदूरी की दर बढ़ाकर 300 रुपये प्रतिदिन की गई है। चालू वित्तीय वर्ष में मनरेगा और वीबी-जी राम जी के माध्यम से छत्तीसगढ़ को लगभग 6 हजार 855 करोड़ रुपये मिलने की संभावना है। केंद्र से योजना की पहली किस्त के रूप में 1 हजार 538 करोड़ रुपये से अधिक की वित्तीय स्वीकृति मिल चुकी है।
सरकार ने योजना में किसानों और मजदूरों दोनों के हितों को ध्यान में रखा है। कृषि कार्यों के दौरान श्रमिकों की उपलब्धता प्रभावित न हो, इसके लिए साल में 60 दिनों तक योजना के कार्य बंद रखने का प्रावधान किया गया है। वीबी-जी राम जी के तहत गांवों में कुल 318 प्रकार के विकास कार्य कराए जा सकेंगे।
इन्हें चार प्रमुख श्रेणियों में बांटा गया है-
इनमें तालाब, चेकडैम, रिचार्ज स्ट्रक्चर, सिंचाई सुविधाएं, मृदा संरक्षण और पौधरोपण के साथ सड़क, पुलिया, पंचायत भवन, आंगनबाड़ी, स्कूल के अतिरिक्त कक्ष, ग्रामीण पुस्तकालय, प्रयोगशाला और किचन शेड जैसे काम शामिल हैं।
गांवों में हाट, कोल्ड स्टोरेज और डेयरी सुविधाएं भी
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए ग्रामीण हाट-बाजार, कृषि उपज भंडारण केंद्र, कोल्ड स्टोरेज, डेयरी, मत्स्य पालन और पशुपालन से संबंधित अधोसंरचनाओं को विकसित किया जाएगा। बाढ़ और अन्य प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के लिए आश्रय स्थल, ड्रेनेज, तटबंध और जंगलों में आग की रोकथाम जैसे कार्य भी योजना का हिस्सा होंगे।
मुख्यमंत्री ने बताया कि योजना के क्रियान्वयन की तैयारियों में छत्तीसगढ़ ने राष्ट्रीय स्तर पर बेहतर प्रदर्शन किया है। राज्य में श्रमिकों की 98 प्रतिशत ई-केवाईसी पूरी हो चुकी है, जिसके साथ छत्तीसगढ़ देश में पहले स्थान पर है। परिसंपत्तियों की 99 प्रतिशत जियो टैगिंग के साथ राज्य को दूसरा स्थान मिला है। युक्तधारा पोर्टल के जरिए जीआईएस आधारित ग्राम पंचायत कार्ययोजना तैयार करने में भी छत्तीसगढ़ ने देश में पहला स्थान हासिल किया है।
जल संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए राज्य के ‘मोर गांव–मोर पानी’ अभियान को वीबी-जी राम जी योजना से जोड़ा जाएगा। विकासखंडों में उपलब्ध जल संसाधनों के आधार पर जल संरक्षण के कार्यों को प्राथमिकता दी जाएगी। वित्तीय वर्ष 2026-27 में वीबी-जी राम जी के लिए 5 हजार 591.42 करोड़ रुपये का प्रस्तावित बजट रखा गया है। अप्रैल से जून 2026 के बीच पहली तिमाही में ही 1 हजार 264 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं।
सरकार के अनुसार योजना का उद्देश्य केवल ग्रामीणों को रोजगार उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि गांवों में स्वच्छता, जल संरक्षण, शिक्षा, आधारभूत सुविधाओं और आजीविका के अवसरों को मजबूत करना भी है। सभी कार्य ग्राम सभा की स्वीकृति से होंगे और डिजिटल मॉनिटरिंग, सामाजिक अंकेक्षण, गुणवत्ता नियंत्रण तथा समय पर मजदूरी भुगतान के जरिए कार्यों में पारदर्शिता सुनिश्चित की जाएगी।
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ग्रामीण क्षेत्रों के सरकारी स्कूलों में 6 हजार 671 बालिका शौचालयों के निर्माण पर 286.85 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। प्रत्येक शौचालय के लिए 4.30 लाख रुपये की लागत निर्धारित की गई है। सरकार का उद्देश्य स्कूलों में छात्राओं के लिए स्वच्छ और सुरक्षित सुविधाएं उपलब्ध कराना है। इसके अलावा 6 हजार 524 गांवों में प्रतीक्षालय सहित मुक्तिधाम बनाए जाएंगे। इस कार्य पर 391.44 करोड़ रुपये खर्च होंगे। वहीं 549 अन्य मुक्तिधामों के निर्माण के लिए 18.22 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
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ग्रामीण क्षेत्रों में जल संकट और गिरते भूजल स्तर से निपटने के लिए बंद और डिफंक्ट 10 हजार 27 बोरवेल में सैंड फिल्टर और रिचार्ज संरचनाएं विकसित की जाएंगी। इस काम पर 52.14 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। सरकार का मानना है कि इन संरचनाओं से बारिश के पानी को जमीन में पहुंचाने, भूजल स्तर बढ़ाने और ग्रामीण इलाकों में जल उपलब्धता बेहतर करने में मदद मिलेगी। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को इन कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर स्वीकृत कर जल्द शुरू करने के निर्देश दिए हैं।
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उन्होंने बताया कि वीबी-जी राम जी योजना 1 जुलाई 2026 से देशभर में लागू हो चुकी है। इसके तहत ग्राम सभा की मंजूरी से विकास कार्यों का चयन किया जाएगा। मजदूरी की दर बढ़ाकर 300 रुपये प्रतिदिन की गई है। चालू वित्तीय वर्ष में मनरेगा और वीबी-जी राम जी के माध्यम से छत्तीसगढ़ को लगभग 6 हजार 855 करोड़ रुपये मिलने की संभावना है। केंद्र से योजना की पहली किस्त के रूप में 1 हजार 538 करोड़ रुपये से अधिक की वित्तीय स्वीकृति मिल चुकी है।
सरकार ने योजना में किसानों और मजदूरों दोनों के हितों को ध्यान में रखा है। कृषि कार्यों के दौरान श्रमिकों की उपलब्धता प्रभावित न हो, इसके लिए साल में 60 दिनों तक योजना के कार्य बंद रखने का प्रावधान किया गया है। वीबी-जी राम जी के तहत गांवों में कुल 318 प्रकार के विकास कार्य कराए जा सकेंगे।
इन्हें चार प्रमुख श्रेणियों में बांटा गया है-
- 107 कार्य जल संरक्षण और जल संवर्धन से संबंधित
- 90 कार्य ग्रामीण अधोसंरचना विकास से जुड़े
- 86 कार्य आजीविका संवर्धन से संबंधित
- 35 कार्य जलवायु अनुकूलन और आपदा प्रबंधन से जुड़े
इनमें तालाब, चेकडैम, रिचार्ज स्ट्रक्चर, सिंचाई सुविधाएं, मृदा संरक्षण और पौधरोपण के साथ सड़क, पुलिया, पंचायत भवन, आंगनबाड़ी, स्कूल के अतिरिक्त कक्ष, ग्रामीण पुस्तकालय, प्रयोगशाला और किचन शेड जैसे काम शामिल हैं।
गांवों में हाट, कोल्ड स्टोरेज और डेयरी सुविधाएं भी
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए ग्रामीण हाट-बाजार, कृषि उपज भंडारण केंद्र, कोल्ड स्टोरेज, डेयरी, मत्स्य पालन और पशुपालन से संबंधित अधोसंरचनाओं को विकसित किया जाएगा। बाढ़ और अन्य प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के लिए आश्रय स्थल, ड्रेनेज, तटबंध और जंगलों में आग की रोकथाम जैसे कार्य भी योजना का हिस्सा होंगे।
मुख्यमंत्री ने बताया कि योजना के क्रियान्वयन की तैयारियों में छत्तीसगढ़ ने राष्ट्रीय स्तर पर बेहतर प्रदर्शन किया है। राज्य में श्रमिकों की 98 प्रतिशत ई-केवाईसी पूरी हो चुकी है, जिसके साथ छत्तीसगढ़ देश में पहले स्थान पर है। परिसंपत्तियों की 99 प्रतिशत जियो टैगिंग के साथ राज्य को दूसरा स्थान मिला है। युक्तधारा पोर्टल के जरिए जीआईएस आधारित ग्राम पंचायत कार्ययोजना तैयार करने में भी छत्तीसगढ़ ने देश में पहला स्थान हासिल किया है।
जल संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए राज्य के ‘मोर गांव–मोर पानी’ अभियान को वीबी-जी राम जी योजना से जोड़ा जाएगा। विकासखंडों में उपलब्ध जल संसाधनों के आधार पर जल संरक्षण के कार्यों को प्राथमिकता दी जाएगी। वित्तीय वर्ष 2026-27 में वीबी-जी राम जी के लिए 5 हजार 591.42 करोड़ रुपये का प्रस्तावित बजट रखा गया है। अप्रैल से जून 2026 के बीच पहली तिमाही में ही 1 हजार 264 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं।
सरकार के अनुसार योजना का उद्देश्य केवल ग्रामीणों को रोजगार उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि गांवों में स्वच्छता, जल संरक्षण, शिक्षा, आधारभूत सुविधाओं और आजीविका के अवसरों को मजबूत करना भी है। सभी कार्य ग्राम सभा की स्वीकृति से होंगे और डिजिटल मॉनिटरिंग, सामाजिक अंकेक्षण, गुणवत्ता नियंत्रण तथा समय पर मजदूरी भुगतान के जरिए कार्यों में पारदर्शिता सुनिश्चित की जाएगी।