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CG: इंटर्न डॉक्टरों का अनोखा प्रदर्शन, स्टाइपेंड के लिए कैंपस में बेच रहे झालमुरी, सरकार से की 30 हजार की मांग

Fri, 07 Aug 2026 05:17 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो अमर उजाला नेटवर्क, जगदलपुर
अमर उजाला नेटवर्क, जगदलपुर Published by: अमर उजाला ब्यूरो Updated Fri, 07 Aug 2026 05:17 PM IST
सार

स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर डिमरापाल मेडिकल कॉलेज के इंटर्न डॉक्टरों ने झालमुरी बेचकर सरकार का ध्यान अपनी ओर खींचा। डॉक्टरों का कहना है कि 15,900 रुपये का मौजूदा स्टाइपेंड उनके काम और जिम्मेदारियों के मुकाबले कम है।

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Intern doctors stage a unique protest, selling Jhalmuri on campus to earn their stipend, demanding 30,000 rupe
झालमुरी बेचते इंटर्न

विस्तार

जगदलपुर में स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर मेडिकल कॉलेज डिमरापाल के इंटर्न डॉक्टरों की अनिश्चितकालीन हड़ताल चौथे दिन भी जारी रही। विरोध के अनोखे तरीके के तहत इंटर्न डॉक्टरों ने शुक्रवार को कॉलेज परिसर में झालमुरी बेचकर अपना प्रदर्शन किया। डॉक्टरों का कहना है कि मौजूदा स्टाइपेंड में उनके लिए रोजमर्रा का खर्च चलाना मुश्किल है, जबकि दूसरे राज्यों में इंटर्न को इससे कहीं अधिक राशि मिल रही है।
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इंटर्न डॉक्टरों के मुताबिक वर्तमान में उन्हें करीब 15,900 रुपये प्रतिमाह स्टाइपेंड दिया जा रहा है। उनकी मांग है कि इसे बढ़ाकर कम से कम 30 हजार रुपये किया जाए। डॉक्टरों का कहना है कि मेडिकल की पढ़ाई पूरी करने के लिए विद्यार्थियों को वर्षों तक मेहनत और बड़ी आर्थिक लागत से गुजरना पड़ता है, लेकिन इंटर्नशिप के दौरान मिलने वाली राशि उनकी जिम्मेदारियों और काम के अनुरूप नहीं है।
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झालमुरी बेचते इंटर्न

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झालमुरी बेचकर जताया विरोध
इंटर्न डॉक्टर ऋषभ बेहरा ने कहा कि झालमुरी बेचने के जरिए सरकार तक अपनी बात पहुंचाने की कोशिश की जा रही है। उनका कहना है कि यदि झालमुरी बेचने वाला व्यक्ति महीने में अच्छी आमदनी कर सकता है, तो डॉक्टर बनने के बाद इंटर्न को अपने दैनिक खर्च के लिए पर्याप्त स्टाइपेंड क्यों नहीं मिलना चाहिए।


वहीं इंटर्न डॉक्टर प्रियंका पैकरा ने कहा कि नीट जैसी कठिन परीक्षा पास करने और मेडिकल शिक्षा पर लाखों रुपये खर्च करने के बाद भी इंटर्न डॉक्टरों को अपेक्षाकृत कम स्टाइपेंड मिल रहा है। उन्होंने कहा कि इसी वजह से डॉक्टरों ने प्रतीकात्मक रूप से झालमुरी बेचकर सरकार का ध्यान अपनी मांग की ओर खींचा है।

 

 

झालमुरी बेचते इंटर्न


30 से 36 घंटे तक ड्यूटी का दावा
इंटर्न डॉक्टरों का कहना है कि अस्पताल में मरीज पहुंचने के बाद शुरुआती स्तर पर उनकी जिम्मेदारी महत्वपूर्ण होती है। मरीज की जांच, बीपी मापने और प्राथमिक चिकित्सा संबंधी कई कार्यों में इंटर्न डॉक्टर सक्रिय भूमिका निभाते हैं। डॉक्टरों का दावा है कि कई बार उन्हें लगातार 30 से 36 घंटे तक ड्यूटी करनी पड़ती है। इंटर्न डॉक्टरों के मुताबिक दूसरे राज्यों में स्टाइपेंड की राशि करीब 30 से 40 हजार रुपये तक है, जबकि छत्तीसगढ़ में उन्हें लगभग 15,900 रुपये ही मिल रहे हैं।

रैली और नुक्कड़ नाटक से भी जताया विरोध
स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर इंटर्न डॉक्टर इससे पहले दंतेश्वरी मंदिर के सामने नुक्कड़ नाटक और बाइक रैली के जरिए भी विरोध दर्ज करा चुके हैं। उनका कहना है कि जब तक सरकार उनकी मांग पर ठोस निर्णय नहीं लेती, आंदोलन जारी रहेगा। इंटर्न डॉक्टरों के आंदोलन को कांग्रेस ने भी समर्थन दिया है। पार्टी की ओर से आंदोलन में साथ देने की बात कही गई है। फिलहाल चार दिन से जारी हड़ताल के कारण इंटर्न डॉक्टर सरकार के फैसले का इंतजार कर रहे हैं।

 

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