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बालोद: धान की किस्म विक्रम टीसीआर बनी किसानों की पहली पसंद, कम हाइट के वजह से आंधी तूफान में सुरक्षित
अमर उजाला नेटवर्क, बालोद
Published by: अमन कोशले
Updated Sat, 27 Sep 2025 06:27 PM IST
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सार
किस्म की विशेषताएं विक्रम टीसीआर की उंचाई 105-110 सेमी होती है, जिससे यह तेज हवा या आंधी में गिरने से सुरक्षित रहती है। इसकी फसल कम अवधि (120-125 दिन) में पक जाती है और इसे कम पानी की आवश्यकता होती है।
धान की किस्म विक्रम टीसीआर बनी किसानों की पहली पसंद
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय रायपुर द्वारा विकसित धान की नवीन किस्म विक्रम टीसीआर जिले में किसानों की पहली पसंद बन चुकी है। इस वर्ष लगभग 550 हेक्टेयर क्षेत्र में इसकी खेती हो रही है, जो पिछले वर्ष की तुलना में बढ़ी है। किस्म की विशेषताएं विक्रम टीसीआर की उंचाई 105-110 सेमी होती है, जिससे यह तेज हवा या आंधी में गिरने से सुरक्षित रहती है।
इसकी फसल कम अवधि (120-125 दिन) में पक जाती है और इसे कम पानी की आवश्यकता होती है। यह पुरानी किस्म सफरी-17 में सुधार कर विकसित की गई है। ग्राम खैरवाही के ईश्वर नेताम, त्रिलोचन और कमलेश्वर ने बताया कि कृषि विभाग द्वारा विक्रम टीसीआर के फायदों की जानकारी दी गई, जिससे वे इस वर्ष इस किस्म की खेती कर रहे हैं और फसल की स्थिति अच्छी है। विक्रम टीसीआर का दाना लंबा पतला होता है, यह सूखा रोधी और झुलसा रोग तथा कीट पतंग के प्रति प्रतिरोधी है।
इस किस्म की उत्पादन क्षमता 60-65 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है। कृषि विभाग ने इस वर्ष 42 हेक्टेयर क्षेत्र में बीज उत्पादन के लिए पंजीयन कराया है। उन्होंने किसानों से अपील की है कि वे इस उन्नत किस्म का उपयोग कर उत्पादन बढ़ाएं और आर्थिक स्थिति मजबूत करें।यह किस्म जल संरक्षण में भी सहायक है और बालोद जिले के किसानों के लिए उपयुक्त सिद्ध हो रही है।
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इसकी फसल कम अवधि (120-125 दिन) में पक जाती है और इसे कम पानी की आवश्यकता होती है। यह पुरानी किस्म सफरी-17 में सुधार कर विकसित की गई है। ग्राम खैरवाही के ईश्वर नेताम, त्रिलोचन और कमलेश्वर ने बताया कि कृषि विभाग द्वारा विक्रम टीसीआर के फायदों की जानकारी दी गई, जिससे वे इस वर्ष इस किस्म की खेती कर रहे हैं और फसल की स्थिति अच्छी है। विक्रम टीसीआर का दाना लंबा पतला होता है, यह सूखा रोधी और झुलसा रोग तथा कीट पतंग के प्रति प्रतिरोधी है।
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इस किस्म की उत्पादन क्षमता 60-65 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है। कृषि विभाग ने इस वर्ष 42 हेक्टेयर क्षेत्र में बीज उत्पादन के लिए पंजीयन कराया है। उन्होंने किसानों से अपील की है कि वे इस उन्नत किस्म का उपयोग कर उत्पादन बढ़ाएं और आर्थिक स्थिति मजबूत करें।यह किस्म जल संरक्षण में भी सहायक है और बालोद जिले के किसानों के लिए उपयुक्त सिद्ध हो रही है।
