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Raigarh : हत्या के आरोपी को आजीवन कारावास की सजा, परिजनों को दो साल बाद मिला न्याय

अमर उजाला नेटवर्क, रायगढ़ Published by: रायगढ़ ब्यूरो Updated Sun, 29 Mar 2026 07:33 PM IST
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सार

रायगढ़ जिले में उधारी के विवाद में पिकअप चालक की टांगी मारकर हत्या मामले में चतुर्थ अपर सत्र न्यायालय के विद्वान न्यायाधीश ने आरोपी को आजीवन कारावास की सजा से दंडित किया है।

Murder accused sentenced to life imprisonment family gets justice after two years in Raigarh
सहायक उप निरीक्षक जयराम सिदार
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विस्तार

छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में उधारी के विवाद में पिकअप चालक की टांगी मारकर हत्या मामले में चतुर्थ अपर सत्र न्यायालय के विद्वान न्यायाधीश ने आरोपी को आजीवन कारावास की सजा से दंडित किया है। सहायक उप निरीक्षक जयराम सिदार की मजबूत विवेचना से मृतक के परिजनों को 2 साल बाद न्याय मिला है। 22 अगस्त 2024 की रात मृतक विरेन्द्र खम्हारी निवासी लुकापारा, सरिया प्लांट में पिकअप चालक और आरोपी सूरज राठिया खलासी का काम करता था। दोनों ही विंध्याचल ऑक्सीजन प्लांट के लेबर कालोनी में अलग-अलग क्वार्टर में रहते थे, और दोनों में अच्छे संबंध थे। घटना दिनांक को विरेन्द्र के द्वारा सूरज से उधार पैसे मांगे जाने की बात को लेकर दोनों में विवाद हुआ इस दौरान सूरज राठिया ने टांगी से हमला करते हुए विरेन्द्र पर हमला कर दिया। गंभीर हालत में विरेन्द्र को मेडिकल कालेज अस्पताल ले जाते समय रास्ते में उसकी मौत हो गई।

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घटना की जानकारी मिलते ही पूंजीपथरा के तत्कालीन थाना प्रभारी राकेश मिश्रा अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचे जहां से आरोपी को हिरासत में लेकर पूछताछ करने पर उसने अपना जुर्म कबूल करते हुए बताया कि पैसो के विवाद के चलते उसने घटना को अंजाम दिया है। हत्या के मामले में विवेचना अधिकारी जयराम सिदार ने घटना स्थल पर मिले साक्ष्य जुटाए एवं एफएसएल रिपोर्ट और महत्वपूर्ण गवाहों के बयान को मजबूत तरीके से न्यायालय में प्रस्तुत कराया। अभियोजन पक्ष के साथ समन्वय कर सभी महत्वपूर्ण साक्षियों के कथन कराए गए और गवाहों के बयान अडिग रहे, जिससे आरोपी सूरज राठिया 22 साल, निवासी आमगांव, धरमजयगढ़ को आजीवन कारावास की सजा दिलाने में सफलता मिली है।
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दो साल बाद मिली सजा
यह मामला भारतीय न्याय संहिता के तहत मजबूत विवेचना और सटीक अभियोजन का एक महत्वपूर्ण उदाहरण बना, जिसमें विवेचना अधिकारी सहायक उप निरीक्षक जयराम सिदार की सराहनीय भूमिका से मृतक के परिजनों को दो साल बाद न्याय मिला है। इस मामले में अभियोजन की ओर से अपर लोक अभियोजक सुश्री वंदना केशरवानी ने पैरवी की।

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