रायगढ़ में बढ़ता प्रदूषण: युवा कांग्रेस ने DM को ज्ञापन सौंपा, राष्ट्रपति और CJI से की हस्तक्षेप की अपील
रायगढ़ जिले में लगातार बढ़ते प्रदूषण को लेकर युवा कांग्रेस के पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं ने सोमवार को कलेक्टर कार्यालय पहुंचे। जहां पर जिलाधीश के माध्यम से राष्ट्रपति और भारत के मुख्य न्यायाधीश के नाम ज्ञापन सौंपा। इस गंभीर समस्या पर हस्तक्षेप करने की मांग उठाई है।
विस्तार
युवा कांग्रेस द्वारा राष्ट्रपति को सौंपे गए ज्ञापन में बताया गया है कि रायगढ़ जिला वर्तमान में विभिन्न प्रकार के प्रदूषण से जूझ रहा है। कोयला परिवहन, भारी वाहनों की अनियंत्रित आवाजाही, खुले में फ्लाई एश का भंडारण, वनों की कटाई और नदियों व जलस्रोतों में औद्योगिक अपशिष्टों का निर्वहन, इन सभी कारणों से आम जनजीवन के स्वास्थ्य के साथ-साथ पर्यावरण और जैव विविधता पर भी गहरा असर पड़ रहा है।
ज्ञापन में इस बात पर प्रकाश डाला गया है कि बढ़ते प्रदूषण के कारण दमा, एलर्जी, त्वचा रोग, नेत्र रोग और अन्य गंभीर बीमारियों में निरंतर वृद्धि देखी जा रही है। लगभग प्रत्येक परिवार किसी न किसी बीमारी से प्रभावित है, और विशेष रूप से छोटे बच्चों में बीमारियों का प्रकोप लगातार बढ़ रहा है। यह स्थिति चिंताजनक है और तत्काल समाधान की मांग करती है।
ज्ञापन में यह भी रेखांकित किया गया है कि रायगढ़ जिले में खदानों के विरोध में जनता अपने जल, जंगल और जमीन को बचाने के लिए लगातार सड़कों पर उतरकर संघर्ष कर रही है। इसके बावजूद, सरकार पर इसका कोई खास असर नहीं दिख रहा है और आरोप लगाया गया है कि सरकार द्वारा उद्योगपतियों को फर्जी तरीके से सहयोग किया जा रहा है।
युवक कांग्रेस के जिला अध्यक्ष आशीष जायसवाल ने कहा कि यदि समय रहते महामहिम राष्ट्रपति महोदया और भारत के मुख्य न्यायाधीश द्वारा इस विषय पर हस्तक्षेप करते हुए ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो रायगढ़ जिले में प्रदूषण का संकट और भी गंभीर हो जाएगा, जिससे आम जनता के स्वास्थ्य और पर्यावरण दोनों को भारी नुकसान उठाना पड़ेगा।
कार्रवाई हेतु प्रमुख मांगें
ज्ञापन में युवा कांग्रेस ने निम्नलिखित बिंदुओं पर तत्काल कार्रवाई की मांग की है-
पर्यावरणीय जांच और मानक पालन: जिले में संचालित समस्त उद्योगों की पर्यावरणीय जांच की जाए और प्रदूषण नियंत्रण मानकों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाए।
उद्योग विस्तार पर रोक: उद्योगों में निरंतर विस्तार पर तत्काल रोक लगाई जाए ताकि प्रदूषण के प्रसार को नियंत्रित किया जा सके।
वायु गुणवत्ता निगरानी: वायु गुणवत्ता की नियमित निगरानी हेतु पर्याप्त संख्या में एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग स्टेशन स्थापित किए जाएं।
अपशिष्ट जल पर रोक: औद्योगिक अपशिष्ट एवं घरेलू गंदे पानी को नदियों एवं जलस्रोतों में छोड़ने पर कड़ाई से रोक लगाई जाए।
फ्लाई एश प्रबंधन: उद्योगों से निकलने वाली जहरीली राख को परिवहन में आर्थिक बचत के लिए नदी, नाले, खेत-खलिहानों में यत्र-तत्र डाले जाने पर कड़ी कार्रवाई हो और इस पर रोक लगाई जाए।