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पत्रकार की गिरफ्तारी पर बस्तर में आक्रोश: सात जिलों में मौन धरना, मुख्यमंत्री के नाम कलेक्टरों को ज्ञापन सौंपा

अमर उजाला नेटवर्क, जगदलपुर Published by: अमर उजाला ब्यूरो Updated Mon, 16 Mar 2026 05:16 PM IST
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सार

पत्रकार रौनक शिवहरे और उनके परिवार के खिलाफ केस दर्ज कर जेल भेजे जाने से बस्तर संभाग के पत्रकार गुस्से में हैं। आज सभी सात जिलों में मौन धरना देकर मुख्यमंत्री के नाम कलेक्टरों को ज्ञापन सौंपा।

Held Silent Protest and Submitted Memorandum to CM sai Regarding Case Against Journalist in Bastar
मौन विरोध करते पत्रकार - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

दंतेवाड़ा जिले के पत्रकार रौनक शिवहरे और उनके परिवार के खिलाफ दर्ज आपराधिक मामले तथा गिरफ्तारी को लेकर बस्तर संभाग के पत्रकारों में भारी आक्रोश है। सोमवार को संभाग के सभी जिलों बस्तर, दंतेवाड़ा, बीजापुर, सुकमा, नारायणपुर, कोंडागांव और कांकेर में पत्रकारों ने मौन धरना देकर विरोध प्रदर्शन किया। उन्होंने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नाम संबंधित जिला कलेक्टरों को ज्ञापन सौंपा और मामले की निष्पक्ष न्यायिक जांच की मांग की है।

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संभाग मुख्यालय जगदलपुर में स्थानीय पत्रकारों ने आयुक्त कार्यालय के समक्ष एक घंटे तक मौन धरना दिया। इसके बाद सभी पत्रकार रैली के रूप में कलेक्ट्रेट पहुंचे और कलेक्टर आकाश छिकारा को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में बताया गया कि 6 मार्च 2026 को गीदम में पत्रकार रौनक शिवहरे के घर के सामने एक कथित नशे में धुत ट्रैक्टर चालक ने उनकी स्कूटी को टक्कर मार दी थी। 
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आरोप है कि चालक ने उनके पिता और दो साल की बच्ची को कुचलने की भी कोशिश की, हालांकि दोनों बाल-बाल बच गए। रौनक शिवहरे ने मौके पर पहुंचकर ट्रैक्टर चालक से विवाद के बाद गीदम थाने में लिखित शिकायत दी थी। पत्रकारों का आरोप है कि पुलिस ने उनकी शिकायत पर एफआईआर दर्ज नहीं की। 

इसके बजाय, ट्रैक्टर चालक और उसके सहयोगियों के दबाव में रौनक शिवहरे तथा उनके माता-पिता के खिलाफ एसटी-एससी एक्ट सहित अन्य गंभीर धाराओं में मामला दर्ज कर लिया गया। उन्हें बिना उचित जांच के जेल भेज दिया गया। पत्रकारों का कहना है कि उपलब्ध तथ्यों के आधार पर रौनक शिवहरे और उनके माता-पिता पर लगाए गए आरोप न्यायसंगत नहीं हैं।

6 मार्च 2026 को दंतेवाड़ा जिले के गीदम में पत्रकार रौनक शिवहरे के घर के सामने यह घटना हुई। एक ट्रैक्टर चालक ने उनकी स्कूटी को टक्कर मार दी थी। आरोप है कि चालक ने रौनक के पिता और दो साल की बच्ची को कुचलने का प्रयास भी किया। सौभाग्य से, दोनों सुरक्षित बच गए। रौनक शिवहरे ने इस घटना के बाद गीदम थाने में शिकायत दर्ज कराई थी।

पत्रकारों के आरोप और मांगें
पत्रकारों का आरोप है कि पुलिस ने रौनक शिवहरे की शिकायत पर कोई कार्रवाई नहीं की। इसके विपरीत, ट्रैक्टर चालक के दबाव में रौनक और उनके माता-पिता के खिलाफ एसटी-एससी एक्ट सहित गंभीर धाराओं में मामला दर्ज कर उन्हें जेल भेज दिया गया। पत्रकार समुदाय का कहना है कि यह कार्रवाई एक पक्ष के दबाव में की गई है। उनके अनुसार, रौनक शिवहरे और उनके माता-पिता पर लगाए गए आरोप न्यायसंगत नहीं हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री से मामले की निष्पक्ष न्यायिक जांच कराने और वास्तविक तथ्यों के आधार पर उचित कार्रवाई करने की मांग की है।

 

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