पश्चिम बंगाल चुनाव परिणाम 2026: जीत के संकेत देते चल रहे थे प्रधानमंत्री मोदी
बंगाल में पहली बार कमल खिला। नरेंद्र मोदी फिर से राजनीतिक रंगमंच के सबसे बड़े शो मैन साबित हुए। मोदी संकेत की राजनीति करते हैं और उसमें ही छिपा होता है उनकी जीत का संदेश।
विस्तार
पश्चिम बंगाल में कमल खिल चुका है। नरेंद्र मोदी फिर से राजनीतिक रंगमंच के सबसे बड़े शो मैन साबित हुए। सता की चौथी (बाऊंड्री) चाह रखने वालीं ममता बनर्जी अब कुर्सी से बेदखल हैं। बंगाल चुनाव के दौरान उन्होंने 5 संकेतों के जरिये अपनी जीत का संदेश दे दिया।
पहला संकेतः झालमुड़ी
झाड़ग्राम रैली के दौरान मोदी ने झालमुड़ी खाई। यह उनका पहले चरण का पहला संकेत व संदेश था। फौरन बाद सोशल मीडिया पर झालमुड़ी छा गई। पक्ष-विपक्ष में प्रतिक्रियाओं की
बाढ़ आ गई। मोदी ने भले झालमुड़ी खाई और गुनगुनाया कि मिर्ची लगी... लेकिन सच यह है कि यह उनकी संकेत की राजनीति के जरिए जीत की ओर बढ़ते कदम का पहला संदेश (बंगाली मिठाई) था। झालमुड़ी के बहाने उन्होंने खुद को बंगाल की माटी व आम लोगों से जोड़ा। यह नतीजे में भी झलका। झाड़ग्राम की सभी चार सीटों पर भाजपा ने बढ़त बना ली। माटी को भुलाकर ममता झालमुड़ी को भेलपुरी से जोड़कर पलटवार करती रहीं। आखिरकार पिछड़ गईं।
दूसरा संकेतः नौकायन
पहले चरण के मतदान के बाद मोदी हुगली नदी में नौकायन करते नजर आए। भाजपा के चाणक्य अमित शाह भले यह दावा कर रहे थे कि पहले चरण की 152 सीटों में से भाजपा की झोली में 110 सीटें आ गईं हैं लेकिन मोदी नौकायन के जरिये खुद को मझधार में रख किनारे की तलाश में जुटे रहे। चुनावी वैतरणी पार करने की चाह में उनकी निगाहें कैमरे की नजर से मतदाताओं पर दूर-दूर तक टिकीं रहीं। नाविक को गले लगाकर मल्लाह-मछुआरों के बड़े वोट बैंक को साधा। यहां भी ममता यमुना के प्रदूषण का पलटवार कर गंगा पुत्र (मोदी) से पिछड़ गईं।
तीसरा संकेत: फुटबॉल
चुनाव भले बंगाल में था लेकिन मोदी ने संकेत और संदेश के लिए इस बार सिक्किम को चुना। बंगाल का सबसे लोकप्रिय खेल फुटबॉल है। मोदी ने सिक्किम के मैदान में जेन जी के साथ फुटबॉल खेल कर पहली बार के मतदाताओं पर अपनी खास छाप छोड़ी। यह वोट बैंक भी उनकी जीत में निर्णायक रहा और बंगाल में खेला हो गया। मोदी ने गोल कर दिया।
चौथा संकेतः काली पूजा
मां, माटी और मानुष की धरती बंगाल में काली पूजा की खास अहमियत है। चुनाव के दौरान मोदी ने थंथानिया कालीबाड़ी मंदिर में पूजा-अर्चना की। यह भी संकेत और संदेश की राजनीति ही थी। दरअसल, तृणमूल कांग्रेस की ओर से चुनाव के दौरान यह प्रचारित किया गया कि ये सनातनी (भाजपा वाले) आएंगे तो यहां मांसाहार प्रतिबंधित कर देंगे। मोदी ने न केवल उस कालीबाड़ी मंदिर में पूजा अर्चना की, जहां मांसाहार प्रसाद चढ़ाया जाता है बल्कि उसी दौरान अचानक अनुराग ठाकुर की मछली खाती तस्वीरें सोशल मीडिया पर खूब तैरीं। यह सब संकेत और संदेश का रणनीतिक हिस्सा था जो तृणमूल कांग्रेस के फैलाए गए भ्रम का काट भी साबित हुआ। मोदी ने खानपान व आस्था के नाम पर तृणमूल कांग्रेस को बैकफुट पर ला दिया।
पांचवां संकेतः बनारस टु बंगाल
दूसरे चरण के मतदान के दिन मोदी काशी में थे। महादेव की पूजा-अर्चना के बाद त्रिशूल-डमरू के साथ उनकी फोटो छाई रही। बंगाल चुनाव में भाजपा ने घुसपैठ को सबसे बड़ा मुद्दा बनाया था। त्रिशूल-डमरू वाला मोदी का फोटो हिंदुत्व को धार देने और घुसपैठ को कुंद करने के लिए बनारस से बंगाल को संकेत व संदेश था। इससे एक दिन पहले मोदी ने अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी में ही हजारों महिलाओं के साथ संवाद किया। विपक्ष को महिला (आरक्षण) विरोधी करार दिया। चुनाव से पहले महिला आरक्षण के लिए संसद का सत्र बुलाकर मोदी ने महिलाओं में यह संदेश दे दिया कि विपक्ष महिला हितैषी नहीं है। परिसीमन के मकड़जाल में न उलझकर महिलाओं को यह अहसास हो गया कि मोदी ही उनके हितैषी हैं। इस बार बंगाल में न केवल बंपर मतदान हुआ बल्कि महिला मतदाता भी भारी तादाद में चौखट लांघकर बूथों तक पहुंचीं । काशी विश्वनाथ मंदिर में रोजाना रात स़ाढ़े दस बजे होने वाली शिव शयन आरती में अंतिम छंद है, बाबा-बाबा सब कहे, माई कहे न कोई, बाबा के दरबार में जो माई कहे सो होई, और बंगाल के चुनाव में भी माई (महिला मतदाताओं) का आशीर्वाद मोदी को मिला।
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