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मुड़-मुड़ के देख: जीवन का रंग बदलता है, सुंदरता नहीं; गहराई से जीना सीखना ही जीवन का सबसे सुंदर अध्याय
Fri, 31 Jul 2026 05:33 AM IST
Pavan
शेरविन बी. नूलैंड
शेरविन बी. नूलैंड
Published by: Pavan
Updated Fri, 31 Jul 2026 05:33 AM IST
सार
जीवन का सबसे सुंदर अध्याय वह नहीं होता, जिसमें हम सबसे तेज दौड़ते हैं; बल्कि वह होता है, जिसमें हम सबसे गहराई से जीना सीखते हैं। वृद्धावस्था उसी अध्याय का नाम है।
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जीवन का रंग बदलता है, सुंदरता नहीं
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
वृद्धावस्था अचानक नहीं आती। वह किसी आंधी की तरह जीवन को एक झटके में नहीं बदलती, बल्कि समय के साथ बेहद शांत, धैर्यपूर्ण और लगभग अदृश्य कदमों से हमारे भीतर उतरती है। हर बीतता दिन हमारे अनुभव, सोच और व्यक्तित्व में कुछ नया जोड़ता जाता है। शुरुआत में हम उसके संकेतों को भले ही अनदेखा कर दें, लेकिन एक दिन एहसास होता है कि बढ़ती उम्र हमारी पहचान का हिस्सा बन चुकी है। इसी क्षण हम समझते हैं कि जैसे कभी युवावस्था हमारे भीतर ऊर्जा, महत्वाकांक्षा और सपनों के रूप में बसती थी, वैसे ही अब अनुभव, धैर्य और परिपक्वता ने उसकी जगह ले ली है। जीवन का रंग बदलता है, सुंदरता नहीं। केवल उसे देखने का हमारा नजरिया बदल जाता है।
वृद्धावस्था के साथ हमें अपने कई अधूरे सपनों, इच्छाओं और उम्मीदों का भी सामना करना पड़ता है। कुछ सपनों को विदा करना पड़ता है, कुछ को नया आकार देना पड़ता है और कुछ को नए अर्थों में जीना पड़ता है। पर, यहीं जीवन का सबसे बड़ा रहस्य छिपा है। जैसे-जैसे जीवन का दायरा सीमित होता जाता है, वैसे-वैसे उसकी गहराई बढ़ती जाती है। कभी साधारण लगने वाले रिश्ते, पल और एहसास समय के साथ सबसे अनमोल संपत्ति बन जाते हैं।
दरअसल, वृद्धावस्था जीवन को नए अर्थों में जीने की वह कला है, जो व्यक्ति को भीतर से समृद्ध बनाती है। यह वह समय है, जब मनुष्य अपनी उपलब्धियों से अधिक अपने अनुभवों की विरासत छोड़ता है। जब वह दूसरों को रास्ता दिखाता है, स्वयं को नए रूप में पहचानता है और उन सच्चाइयों तक पहुंचता है, जिन्हें युवावस्था की भागदौड़ कभी देखने ही नहीं देती। यदि युवावस्था जीवन को गति देती है, तो वृद्धावस्था उसे दिशा। यदि युवावस्था सपने देखने का साहस देती है, तो वृद्धावस्था उन सपनों का अर्थ समझने की बुद्धि।
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आखिरकार, जीवन का सबसे सुंदर अध्याय वह नहीं होता, जिसमें हम सबसे तेज दौड़ते हैं; बल्कि वह होता है, जिसमें हम सबसे गहराई से जीना सीखते हैं। वृद्धावस्था उसी अध्याय का नाम है।
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वृद्धावस्था के साथ हमें अपने कई अधूरे सपनों, इच्छाओं और उम्मीदों का भी सामना करना पड़ता है। कुछ सपनों को विदा करना पड़ता है, कुछ को नया आकार देना पड़ता है और कुछ को नए अर्थों में जीना पड़ता है। पर, यहीं जीवन का सबसे बड़ा रहस्य छिपा है। जैसे-जैसे जीवन का दायरा सीमित होता जाता है, वैसे-वैसे उसकी गहराई बढ़ती जाती है। कभी साधारण लगने वाले रिश्ते, पल और एहसास समय के साथ सबसे अनमोल संपत्ति बन जाते हैं।
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दरअसल, वृद्धावस्था जीवन को नए अर्थों में जीने की वह कला है, जो व्यक्ति को भीतर से समृद्ध बनाती है। यह वह समय है, जब मनुष्य अपनी उपलब्धियों से अधिक अपने अनुभवों की विरासत छोड़ता है। जब वह दूसरों को रास्ता दिखाता है, स्वयं को नए रूप में पहचानता है और उन सच्चाइयों तक पहुंचता है, जिन्हें युवावस्था की भागदौड़ कभी देखने ही नहीं देती। यदि युवावस्था जीवन को गति देती है, तो वृद्धावस्था उसे दिशा। यदि युवावस्था सपने देखने का साहस देती है, तो वृद्धावस्था उन सपनों का अर्थ समझने की बुद्धि।
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आखिरकार, जीवन का सबसे सुंदर अध्याय वह नहीं होता, जिसमें हम सबसे तेज दौड़ते हैं; बल्कि वह होता है, जिसमें हम सबसे गहराई से जीना सीखते हैं। वृद्धावस्था उसी अध्याय का नाम है।