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सिर्फ जानना नहीं, जीना भी सीखिए... वही ज्ञान महान है जो आचरण में उतर जाए

Wed, 29 Jul 2026 06:06 AM IST
प्लेटो Published by: प्रशांत तिवारी Updated Wed, 29 Jul 2026 06:06 AM IST
सार

सच्चा ज्ञान केवल जानकारी इकट्ठा करना नहीं, बल्कि सही विचारों को पहचानकर उन्हें जीवन में उतारना है। उत्तम ज्ञान मनुष्य के व्यक्तित्व, चरित्र और निर्णय क्षमता को निखारता है। इसलिए विवेक के साथ ज्ञान का चयन करना और अच्छी पुस्तकों व श्रेष्ठ विचारों से स्वयं को समृद्ध बनाना ही जीवन की सफलता का आधार है।

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Do not merely seek knowledge learn to live it as well True knowledge is that which translates into conduct
प्रतीकात्मक - फोटो : अमर उजाला प्रिंट

विस्तार

जीवन में आगे बढ़ने के लिए केवल जानकारी पर्याप्त नहीं होती। आवश्यक यह है कि हम सही ज्ञान को अपनाएं और उसे अपने व्यवहार में उतारें। जो ज्ञान हमें विनम्र बनाए और सत्य के निकट ले जाए, वही वास्तविक ज्ञान है।

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ज्ञान को आत्मा का भोजन क्यों कहा गया है?
ज्ञान आत्मा का भोजन है। जिस प्रकार शरीर स्वस्थ और शक्तिशाली बने रहने के लिए शुद्ध, पौष्टिक और संतुलित भोजन चाहता है, उसी प्रकार हमारी आत्मा, मन और बुद्धि भी उत्तम विचारों तथा सच्चे ज्ञान से ही पोषित होती है। जैसे शरीर को खराब भोजन देने से वह बीमार पड़ जाता है, ठीक वैसे ही यदि मन को भ्रम, झूठ, लालच और अज्ञानता से भर दिया जाए, तो मनुष्य के चरित्र, सोच और जीवन का पतन होने लगता है। इसलिए ज्ञान केवल प्राप्त करने की वस्तु नहीं है, बल्कि उसे पहचानने और समझने की भी आवश्यकता होती है।
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हर जानकारी को स्वीकार करना क्यों सही नहीं है?
संसार में ज्ञान के अनेक स्रोत उपलब्ध हैं। हर दिन अनेक लोग हमें कुछ नया सिखाने का दावा करते हैं, लेकिन हर सूचना सत्य नहीं होती और हर विचार हमारे जीवन के लिए उपयोगी भी नहीं होता। जो व्यक्ति बिना सोचे-समझे हर बात को स्वीकार कर लेता है, वह अनजाने में अपने मन को ऐसे विचारों से भर लेता है, जो उसके निर्णयों और जीवन-दृष्टि को भ्रमित कर सकते हैं। इसलिए वास्तविक बुद्धिमत्ता अधिक जानकारी जुटाने में नहीं, बल्कि यह पहचानने में है कि कौन-सा ज्ञान हमारे जीवन को समृद्ध करेगा और कौन-सा हमें भटका सकता है।
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विचार हमारे व्यक्तित्व को कैसे बदलते हैं?
ज्ञान का प्रभाव केवल हमारी स्मृति तक सीमित नहीं रहता, बल्कि वह सीधे हमारे व्यक्तित्व और आत्मा को प्रभावित करता है। भोजन को ग्रहण करने से पहले उसकी गुणवत्ता परखी जा सकती है, लेकिन किसी विचार को स्वीकार करते ही वह हमारे सोचने का तरीका बदलना शुरू कर देता है। धीरे-धीरे वही विचार हमारे निर्णयों, व्यवहार और भविष्य की दिशा निर्धारित करने लगते हैं। यही कारण है कि हमें अपने विवेक का उपयोग करते हुए ऐसे विचारों और ज्ञान का चयन करना चाहिए, जो हमें सही मार्ग दिखाएं।

अच्छी पुस्तकों का जीवन में क्या महत्व है?
इस चयन में अच्छी पुस्तकों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। श्रेष्ठ पुस्तकें केवल शब्दों का संग्रह नहीं होतीं, बल्कि उनमें पीढ़ियों का अनुभव, संघर्ष, सत्य और मानवता का सार निहित होता है। उन्हें पढ़ने से हमारा दृष्टिकोण व्यापक बनता है, सोच अधिक परिपक्व होती है और आत्मविश्वास मजबूत होता है। पुस्तकें हमें अच्छा इंसान बनने की प्रेरणा भी देती हैं।

वास्तविक ज्ञान की पहचान कैसे करें?
जीवन में आगे बढ़ने के लिए केवल जानकारी पर्याप्त नहीं होती। आवश्यक यह है कि हम सही ज्ञान को अपनाएं और उसे अपने व्यवहार में उतारें। जो ज्ञान हमें विनम्र बनाए, सत्य के निकट ले जाए, दूसरों के प्रति सम्मान सिखाए और कठिन परिस्थितियों में भी सही निर्णय लेने की शक्ति दे, वही वास्तविक ज्ञान है। ऐसा ज्ञान मनुष्य के व्यक्तित्व को प्रकाशित करता है और उसके जीवन को अर्थ प्रदान करता है। इसलिए हर दिन अपने मन को उत्तम विचारों से पोषित करें। ऐसी पुस्तकें पढ़ें, जो आपके भीतर आशा जगाएं, आपके चरित्र को मजबूत बनाएं और आपको सत्य, करुणा तथा विवेक के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दें।

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सूत्र: पारखी क्यों बनें?
ज्ञान केवल जानकारी का संचय नहीं, बल्कि वह प्रकाश है, जो मनुष्य के भीतर छिपी चेतना को जागृत करता है। सार्थक और सच्चा ज्ञान मनुष्य को सही और गलत में अंतर करने की दृष्टि, विपरीत परिस्थितियों में सही निर्णय लेने का साहस तथा जीवन को उद्देश्यपूर्ण बनाने की प्रेरणा देता है। सच्चा ज्ञान वही है, जिसे विवेक की कसौटी पर परखकर आत्मसात किया जाए।

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।

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