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जिंदगी की दूसरी पारी बहुत महत्वपूर्ण: पावर ऑफ अटॉर्नी के बारे में जानना जरूरी, ताकि संपत्ति को लेकर न हो विवाद
अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: देवेश त्रिपाठी
Updated Fri, 16 Jan 2026 08:25 AM IST
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सार
78 वर्षीय रामदयाल ने वसीयत या पावर ऑफ अटॉर्नी नहीं बनवाई, और अब उनके बेटे संपत्ति को लेकर झगड़ रहे हैं। आपका हाल रामदयाल के जैसा न हो, इसलिए वक्त रहते अपनी वसीयत बनवा लें, ताकि आप जीवन के अंतिम चरण में गरिमा और स्पष्टता के साथ जी सकें।
बुजुर्गों के लिए क्यों जरूरी वसीयत?
- फोटो : अमर उजाला प्रिंट
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विस्तार
लखनऊ के 78 वर्षीय रामदयाल के सामने नई परेशानी आ गई है। पत्नी का देहांत हो चुका है, और दोनों बेटे संपत्ति को लेकर झगड़ रहे हैं। नतीजतन, रामदयाल इस उम्र में अकेले हो गए। समस्या इससे भी आगे है। उन्होंने कभी वसीयत नहीं बनवाई, न ही किसी को पावर ऑफ अटॉर्नी दी। देश में ऐसे लाखों रामदयाल हैं, जिन्होंने ढंग से आगे की योजना नहीं बनाई और अब मुसीबतों में फंस चुके हैं।
वसीयत या पावर ऑफ अटार्नी के बारे में जानिए
वसीयत क्यों है जरूरी : वसीयत एक कानूनी दस्तावेज है, जो बताती है कि किसी व्यक्ति की मृत्यु के बाद उसकी संपत्ति को किस तरह बांटा जाना चाहिए। वसीयतकर्ता जीवित रहने तक इसे कभी भी बदल या रद्द कर सकता है। सबसे आखिर में लिखी गई वसीयत को ही आमतौर पर वैध माना जाता है।
कैसे बनाएं वसीयत : सबसे पहले अपनी चल-अचल संपत्ति की सूची बनाएं। वारिसों का पूरा नाम और विवरण लिखें। यह भी तय करें कि किस व्यक्ति को कौन-सी और कितनी संपत्ति मिलेगी। सादे कागज या 100 रुपये के स्टांप पेपर पर वसीयत लिखकर कम से कम दो गवाहों से दस्तखत करवाएं। स्थानीय सब-रजिस्ट्रार कार्यालय में इसका पंजीयन होता है। वसीयत बनाते समय डॉक्टर से मानसिक स्वास्थ्य प्रमाणपत्र लें, ताकि मानसिक अक्षमता का सवाल न खड़ा हो।
पावर ऑफ अटॉर्नी (पीओए) : बीमारी के समय पावर ऑफ अटॉर्नी ही सहारा बनती है। यह किसी भरोसेमंद व्यक्ति को आपकी ओर से बैंक, निवेश, संपत्ति और इलाज से जुड़े निर्णय लेने का कानूनी अधिकार देती है, खासकर जब आप खुद ऐसा करने में असमर्थ होते हैं। इससे पारिवारिक विवादों से बचाव होता है और संपत्ति का प्रबंधन सुचारू रहता है।
पीओए कैसे बनाएं : वकील की मदद से दस्तावेज तैयार करें। इसमें प्रधान, एजेंट का नाम, दिए जाने वाले अधिकारों का स्पष्ट विवरण, वैधता की अवधि और रद्द करने की शर्तें शामिल करें। यह स्टांप पेपर पर होना चाहिए। प्रधान मानसिक रूप से सक्षम होना चाहिए। प्रधान और दो स्वतंत्र गवाहों के हस्ताक्षर जरूरी हैं। नोटरी से प्रमाणित कराएं। सब-रजिस्ट्रार ऑफिस में रजिस्टर कराएं, खासकर संपत्ति से जुड़े मामलों में। एनआरआई के लिए भारतीय दूतावास से प्रमाणीकरण जरूरी है। स्टांप शुल्क व रजिस्ट्रेशन फीस अलग-अलग राज्य में भिन्न-भिन्न हैं।
पीओए की अहम बातें : इसके जरिये संपत्ति का मालिकाना हक ट्रांसफर न करें। यह केवल संपत्ति के प्रबंधन या कानूनी कामों के लिए है। विशेष परिस्थितियों में किसी संपत्ति को अटॉर्नी होल्डर द्वारा बेचे जाने पर प्राप्त रकम प्रधान/अटॉर्नीदाता के खाते में जानी चाहिए, तभी विक्रय वैध होगा। इसे अटॉर्नी दाता कभी भी खारिज कर सकता है, जिसके बाद अटॉर्नी होल्डर को मिले अधिकार स्वतः शून्य हो जाते हैं। किसी वाद/केस के बाबत दी गई अटार्नी अहम होती है, जिसमें उस केस से जुड़े समस्त कार्य, दावा, बयान, अधिवक्ता नियुक्त करना, न्यायालय के समक्ष साक्ष्य प्रस्तुत करना आदि कई अधिकार होते हैं।
कितने तरह की पावर ऑफ अटॉर्नी
वसीयत और पावर ऑफ अटॉर्नी एक-दूसरे के विकल्प नहीं, बल्कि पूरक हैं। वसीयत मानसिक असमर्थता में काम नहीं करती और पावर ऑफ अटॉर्नी मृत्यु के साथ समाप्त हो जाती है। दोनों मिलकर ही निर्णयों की निरंतरता बनाए रखते हैं। भारत में एस्टेट प्लानिंग को अक्सर मृत्यु के बाद की व्यवस्था मान लिया जाता है। एस्टेट प्लानिंग संपत्ति नहीं, सम्मान और नियंत्रण की योजना है। वरिष्ठ नागरिकों के लिए ये दस्तावेज जीवन के अंतिम चरण को गरिमा और स्पष्टता के साथ जीने का आधार बनाते हैं। - डॉ. दीपक जैन, संस्थापक निदेशक, नेक्सजेन एस्टेट प्लानिंग सॉल्यूशंस
वरिष्ठ नागरिकों के काम की संस्थाएं
देव एनिमल वॉलंटरी ऑर्गनाइजेशन उन बुजुर्गों के लिए एक सुरक्षित आश्रय प्रदान करता है, जो किसी कारणवश अकेले और बेसहारा हैं। यह संस्था उन्हें मुफ्त आश्रय, पौष्टिक भोजन, कपड़े और जरूरी मेडिकल देखभाल उपलब्ध कराती है, ताकि वे सम्मानजनक जीवन जी सकें और समाज से जुड़ा महसूस करें। यह पुलिस/अस्पताल द्वारा लाए गए बुजुर्गों की देखभाल करता है, जिससे उनका जीवन बेहतर बन सके। अधिक जानकारी के लिए इसकी आधिकारिक वेबसाइट davongo.in या 9910200632 पर संपर्क किया जा सकता है।
अपना गांव अपना देश फाउंडेशन सामाजिक सेवाओं, शिक्षा और सशक्तीकरण के जरिये समुदाय को बेहतर बनाने पर ध्यान देता है, जिसमें बुजुर्ग भी शामिल हैं। यह बेसहारा बुजुर्गों को कपड़े, भोजन और वृद्धाश्रम तक पहुंचाने का काम करता है। यह शिक्षा व जागरूकता कार्यक्रमों जैसी सामाजिक पहलों के जरिये सामुदायिक विकास पर भी ध्यान केंद्रित करता है। अधिक जानकारी के लिए इसकी आधिकारिक वेबसाइट agadfoundation.com या 8586908800 पर संपर्क कर सकते हैं।
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वसीयत या पावर ऑफ अटार्नी के बारे में जानिए
वसीयत क्यों है जरूरी : वसीयत एक कानूनी दस्तावेज है, जो बताती है कि किसी व्यक्ति की मृत्यु के बाद उसकी संपत्ति को किस तरह बांटा जाना चाहिए। वसीयतकर्ता जीवित रहने तक इसे कभी भी बदल या रद्द कर सकता है। सबसे आखिर में लिखी गई वसीयत को ही आमतौर पर वैध माना जाता है।
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कैसे बनाएं वसीयत : सबसे पहले अपनी चल-अचल संपत्ति की सूची बनाएं। वारिसों का पूरा नाम और विवरण लिखें। यह भी तय करें कि किस व्यक्ति को कौन-सी और कितनी संपत्ति मिलेगी। सादे कागज या 100 रुपये के स्टांप पेपर पर वसीयत लिखकर कम से कम दो गवाहों से दस्तखत करवाएं। स्थानीय सब-रजिस्ट्रार कार्यालय में इसका पंजीयन होता है। वसीयत बनाते समय डॉक्टर से मानसिक स्वास्थ्य प्रमाणपत्र लें, ताकि मानसिक अक्षमता का सवाल न खड़ा हो।
पावर ऑफ अटॉर्नी (पीओए) : बीमारी के समय पावर ऑफ अटॉर्नी ही सहारा बनती है। यह किसी भरोसेमंद व्यक्ति को आपकी ओर से बैंक, निवेश, संपत्ति और इलाज से जुड़े निर्णय लेने का कानूनी अधिकार देती है, खासकर जब आप खुद ऐसा करने में असमर्थ होते हैं। इससे पारिवारिक विवादों से बचाव होता है और संपत्ति का प्रबंधन सुचारू रहता है।
पीओए कैसे बनाएं : वकील की मदद से दस्तावेज तैयार करें। इसमें प्रधान, एजेंट का नाम, दिए जाने वाले अधिकारों का स्पष्ट विवरण, वैधता की अवधि और रद्द करने की शर्तें शामिल करें। यह स्टांप पेपर पर होना चाहिए। प्रधान मानसिक रूप से सक्षम होना चाहिए। प्रधान और दो स्वतंत्र गवाहों के हस्ताक्षर जरूरी हैं। नोटरी से प्रमाणित कराएं। सब-रजिस्ट्रार ऑफिस में रजिस्टर कराएं, खासकर संपत्ति से जुड़े मामलों में। एनआरआई के लिए भारतीय दूतावास से प्रमाणीकरण जरूरी है। स्टांप शुल्क व रजिस्ट्रेशन फीस अलग-अलग राज्य में भिन्न-भिन्न हैं।
पीओए की अहम बातें : इसके जरिये संपत्ति का मालिकाना हक ट्रांसफर न करें। यह केवल संपत्ति के प्रबंधन या कानूनी कामों के लिए है। विशेष परिस्थितियों में किसी संपत्ति को अटॉर्नी होल्डर द्वारा बेचे जाने पर प्राप्त रकम प्रधान/अटॉर्नीदाता के खाते में जानी चाहिए, तभी विक्रय वैध होगा। इसे अटॉर्नी दाता कभी भी खारिज कर सकता है, जिसके बाद अटॉर्नी होल्डर को मिले अधिकार स्वतः शून्य हो जाते हैं। किसी वाद/केस के बाबत दी गई अटार्नी अहम होती है, जिसमें उस केस से जुड़े समस्त कार्य, दावा, बयान, अधिवक्ता नियुक्त करना, न्यायालय के समक्ष साक्ष्य प्रस्तुत करना आदि कई अधिकार होते हैं।
कितने तरह की पावर ऑफ अटॉर्नी
- जनरल पावर ऑफ अटॉर्नी (जीपीए) : सभी वित्तीय व कानूनी मामलों को संभालने के लिए एजेंट को व्यापक अधिकार देती है, खासकर जब आप उपस्थित न हों।
- स्पेशल पावर ऑफ अटॉर्नी (एसपीए) : केवल किसी विशेष कार्य के लिए सीमित अधिकार देती है। विशेष कार्य के पूरा हो जाने या तय अवधि बीत जाने पर यह स्वत: खत्म हो जाती है।
- ड्यूरेबल पावर ऑफ अटॉर्नी : मानसिक रूप से अक्षम हो जाने पर भी यह मान्य रहती है और एजेंट आपकी ओर से फैसले ले सकता है। वरिष्ठ नागरिकों के लिए यह बेहद जरूरी है।
- नॉन-ड्यूरेबल पावर ऑफ अटॉर्नी : व्यक्ति (प्रधान) किसी दूसरे शख्स (एजेंट) को अपनी ओर से वित्तीय, संपत्ति या अन्य मामलों में निर्णय लेने का अधिकार देता है। प्रधान मानसिक रूप से असमर्थ हो जाए, तो एजेंट के अधिकार खत्म हो जाते हैं।
- मेडिकल/हेल्थ केयर पावर ऑफ अटॉर्नी : जब आप खुद चिकित्सा संबंधी निर्णय लेने में अक्षम हों, तब एजेंट आपकी ओर से स्वास्थ्य संबंधी फैसले ले सकता है, जैसे उपचार या अस्पताल चुनना।
वसीयत और पावर ऑफ अटॉर्नी एक-दूसरे के विकल्प नहीं, बल्कि पूरक हैं। वसीयत मानसिक असमर्थता में काम नहीं करती और पावर ऑफ अटॉर्नी मृत्यु के साथ समाप्त हो जाती है। दोनों मिलकर ही निर्णयों की निरंतरता बनाए रखते हैं। भारत में एस्टेट प्लानिंग को अक्सर मृत्यु के बाद की व्यवस्था मान लिया जाता है। एस्टेट प्लानिंग संपत्ति नहीं, सम्मान और नियंत्रण की योजना है। वरिष्ठ नागरिकों के लिए ये दस्तावेज जीवन के अंतिम चरण को गरिमा और स्पष्टता के साथ जीने का आधार बनाते हैं। - डॉ. दीपक जैन, संस्थापक निदेशक, नेक्सजेन एस्टेट प्लानिंग सॉल्यूशंस
वरिष्ठ नागरिकों के काम की संस्थाएं
देव एनिमल वॉलंटरी ऑर्गनाइजेशन उन बुजुर्गों के लिए एक सुरक्षित आश्रय प्रदान करता है, जो किसी कारणवश अकेले और बेसहारा हैं। यह संस्था उन्हें मुफ्त आश्रय, पौष्टिक भोजन, कपड़े और जरूरी मेडिकल देखभाल उपलब्ध कराती है, ताकि वे सम्मानजनक जीवन जी सकें और समाज से जुड़ा महसूस करें। यह पुलिस/अस्पताल द्वारा लाए गए बुजुर्गों की देखभाल करता है, जिससे उनका जीवन बेहतर बन सके। अधिक जानकारी के लिए इसकी आधिकारिक वेबसाइट davongo.in या 9910200632 पर संपर्क किया जा सकता है।
अपना गांव अपना देश फाउंडेशन सामाजिक सेवाओं, शिक्षा और सशक्तीकरण के जरिये समुदाय को बेहतर बनाने पर ध्यान देता है, जिसमें बुजुर्ग भी शामिल हैं। यह बेसहारा बुजुर्गों को कपड़े, भोजन और वृद्धाश्रम तक पहुंचाने का काम करता है। यह शिक्षा व जागरूकता कार्यक्रमों जैसी सामाजिक पहलों के जरिये सामुदायिक विकास पर भी ध्यान केंद्रित करता है। अधिक जानकारी के लिए इसकी आधिकारिक वेबसाइट agadfoundation.com या 8586908800 पर संपर्क कर सकते हैं।