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मुड़-मुड़ के देख: हर उम्र की अपनी गरिमा होती है; जीवन ईमानदारी से जिया, तो वृद्धावस्था बोझ नहीं विश्राम

जेन एलेन हैरिसन Published by: देवेश त्रिपाठी Updated Fri, 16 Jan 2026 07:48 AM IST
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सार

बुजुर्ग होने का अर्थ है जीवन के शोर के बाद मिली शांति को जीना। हर उम्र की अपनी गरिमा और कोमलता होती है। यदि जीवन ईमानदारी से जिया गया हो, तो वृद्धावस्था बोझ नहीं, विश्राम लगती है। यही वह क्षण है, जहां आत्मा कहती है कि अब सब ठीक है।

Look back Every age has its own dignity if life lived honestly old age not burden but rest wisdom peace
जो कोई भी सुंदरता देखने की क्षमता रखता है, वह कभी बुजुर्ग नहीं होता। -फ्रैंज काफ्का - फोटो : अमर उजाला प्रिंट
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लोग अक्सर पूछते हैं कि क्या आप फिर से युवा होना चाहेंगे? यह प्रश्न सुनने में आसान लगता है, पर अपने भीतर एक भूल समेटे होता है, क्योंकि जो जीवन एक बार जिया जा चुका है, वह दोहराने के लिए नहीं होता, बल्कि समझने और सहेजने के लिए होता है। मनुष्य कोई वस्त्र नहीं, जिसे उतार-पहन लिया जाए, न कोई धागा है, जिसे खोलकर फिर से लपेट दिया जाए। हम जो हैं, वह हमारे पूरे जीवन की यात्रा का निष्कर्ष है।
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कल्पना कीजिए कि आपने पहाड़ की चढ़ाई पार कर ली है और अब सामने बेहद आनंददायक दृश्य  है। क्या आप सच में नीचे उतरकर फिर से वही थकाऊ व कठिन चढ़ाई करना चाहेंगे? बिल्कुल नहीं। अगर कोई व्यक्ति फिर से युवा होने की इच्छा करता है, तो इसका मतलब है कि उसने जीवन को पूरी तरह जिया ही नहीं। उसने जोखिम से दूरी बनाई, पीड़ा से बचा, और इसी वजह से वह परिपक्वता की मिठास नहीं चख पाया। याद रखिए, वृद्धावस्था कोई पराजय नहीं, बल्कि उपलब्धि है। यह वह समय है, जब मंच से धीरे-धीरे विदा ली जाती है, लेकिन बदले में दर्शक दीर्घा की सबसे सुकूनदेह अगली पंक्ति मिलती है। यदि आपने जीवन में अपना किरदार ईमानदारी से निभाया है, तो अब ऊंची आवाज में कुछ साबित करने की जरूरत नहीं रह जाती। साथ-साथ बैठे, शांति से देखते हुए, आप समझ जाते हैं कि यही असली संतोष है।
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युवा आंखें दूर तक देखने की कोशिश करती हैं, वृद्ध आंखें गहराई में उतरती हैं। युवावस्था में गति होती है, वृद्धावस्था में दिशा। यहां जल्दबाजी की जगह धैर्य आता है, महत्वाकांक्षा की जगह विवेक। प्रश्न कम होते जाते हैं, स्वीकार बढ़ने लगता है। मनुष्य दूसरों को बदलने की जिद छोड़कर स्वयं को समझने लगता है और यही सच्चा ज्ञान है। बुजुर्ग होने का अर्थ है जीवन के शोर के बाद मिली शांति को जीना। हर उम्र की अपनी गरिमा है, और अपनी कोमलता। और यदि जीवन ईमानदारी से जिया गया हो, तो वृद्धावस्था बोझ नहीं, विश्राम लगती है। यही वह क्षण है, जहां आत्मा कहती है कि अब सब ठीक है।
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