जीवन धारा: हार मान लेना सबसे बड़ी कमजोरी है, प्रयास करते रहना सार्थक सूत्र
मैंने हजारों प्रयोग किए। उनमें से अधिकांश वैसे सफल नहीं हुए, जैसी उम्मीद हुआ करती थी। अगर मैं हर असफल प्रयोग के बाद मान लेता कि अब आगे बढ़ने का कोई फायदा नहीं, तो शायद जीवन में कुछ नहीं कर पाता।
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मनुष्य की सबसे बड़ी विफलता असफल होना नहीं है। असफलता तो प्रकृति का नियम है। कोई भी नया बीज पहले मिट्टी में दबता है, अंधकार सहता है, वर्षा व धूप की मार झेलता है, तब कहीं जाकर वह प्रस्फुटित होता है। जब प्रकृति स्वयं इस नियम का पालन करती है, तो मनुष्य अपवाद कैसे हो सकता है! वास्तविक कमजोरी तब जन्म लेती है, जब हम यह मान बैठते हैं कि अब आगे कुछ नहीं हो सकता। जिस क्षण हम प्रयास करना छोड़ देते हैं, उसी क्षण हम अपने भविष्य के सभी द्वार बंद कर लेते हैं। असफल हमें दुनिया नहीं बनाती, बल्कि हार मान कर बैठ जाना हमें असफल बना देता है।
मैंने अपने जीवन में हजारों प्रयोग किए। उनमें से अधिकांश वैसे सफल नहीं हुए, जैसी शुरू में उम्मीद हुआ करती थी। अगर मैं हर असफल प्रयोग के बाद मान लेता कि अब आगे बढ़ने का कोई फायदा नहीं, तो शायद जीवन में कुछ नहीं कर पाता। हर असफल प्रयोग ने मुझे यह नहीं बताया कि मैं अयोग्य हूं, उसने केवल यह बताया कि यह रास्ता और तरीका सही नहीं है। जब एक रास्ता बंद होता है, तब ज्ञान हमें दूसरे रास्ते की ओर ले जाता है।
हम चाहते हैं कि बीज बोते ही फल मिल जाए। पहले प्रयास में ही सफलता मिल जाए, लेकिन प्रकृति ऐसे नियमों से संचालित नहीं होती। महान उपलब्धियां समय, धैर्य और लगातार मेहनत मांगती हैं। सफलता तो उन असंख्य छोटे-छोटे प्रयासों का संचय है, जिन्हें संसार देख भी नहीं पाता। लोग अंतिम उपलब्धि पर तालियां बजाते हैं, लेकिन वे उन अनगिनत रातों को नहीं देखते, जब कोई व्यक्ति अकेले बैठ कर अपनी भूलों को सुधार रहा होता है।
जीवन में कोई भी ज्ञान बिना मूल्य चुकाए नहीं मिलता। कभी वह मूल्य समय होता है, कभी श्रम, तो कभी धैर्य। जो इसे चुकाने के लिए तैयार नहीं होता, वह ज्ञान हासिल नहीं कर सकता। इसलिए, कठिनाइयों से घबराना नहीं चाहिए, क्योंकि वे आपकी विरोधी नहीं, बल्कि शिक्षक होती हैं। मनुष्य अपने भीतर की शक्ति को तब तक नहीं पहचानता, जब तक परिस्थितियां उसे चुनौती नहीं देतीं। जब तक सब कुछ आसान रहता है, तब तक साहस सोया रहता है और फिर कठिनाइयां ही उसे जगाती हैं। मुश्किलें ही व्यक्तित्व को गढ़ने वाली सबसे बड़ी शिल्पकार हैं।
यदि आपके सामने कोई ऐसा लक्ष्य है, जिस पर आपको भरोसा है, तो संसार की शंकाओं से अधिक अपने श्रम पर विश्वास कीजिए। लोग आपके विचारों पर हंस सकते हैं, आपको मूर्ख कह सकते हैं, प्रयोगों को व्यर्थ बता सकते हैं, पर सत्य का निर्णय तो परिणाम ही करते हैं। इसलिए, मैं कहूंगा कि अपने श्रम पर विश्वास रखें, अनुभवों से सीखें, अपनी भूलों से डरें नहीं और जिज्ञासा को कभी मरने न दें। यदि आप हर असफलता को एक सबक में बदल लेते हैं, तो फिर आप कभी नहीं हारते। हार तभी होती है, जब सीखना बंद हो जाता है। जब तक भीतर सीखने की इच्छा है, तब तक संभावनाएं भी जीवित हैं।
सूत्र: प्रयास करते रहें
असफलता अंत नहीं, सफलता की पहली सीढ़ी है। हर ठोकर हमें गिराने नहीं, बल्कि सही दिशा दिखाने आती है। जो व्यक्ति अपनी भूलों से सीखता है, धैर्य बनाए रखता है और कठिनाइयों को शिक्षक मानकर निरंतर प्रयास करता रहता है, वही अंततः अपने लक्ष्य तक पहुंचता है। हार तब होती है, जब आप प्रयास करना छोड़ देते हैं।