{"_id":"69c5f0b92f14c3773503fd39","slug":"how-to-increase-your-savings-as-you-age-invest-your-retirement-money-in-a-way-that-won-t-run-out-later-2026-03-27","type":"story","status":"publish","title_hn":"दूसरी पारी: उम्र के साथ कैसे बढ़ाएं जमा-पूंजी? रिटायरमेंट के पैसों का ऐसे करें निवेश जो बाद में कम न पड़े","category":{"title":"Blog","title_hn":"अभिमत","slug":"blog"}}
दूसरी पारी: उम्र के साथ कैसे बढ़ाएं जमा-पूंजी? रिटायरमेंट के पैसों का ऐसे करें निवेश जो बाद में कम न पड़े
अमर उजाला
Published by: Pavan
Updated Fri, 27 Mar 2026 08:21 AM IST
विज्ञापन
सार
रिटायरमेंट की बचत के पैसों का निवेश ऐसे विकल्पों में करें, जिसमें सुरक्षा के साथ इक्विटी की रफ्तार भी हो। इससे जमा-पूंजी तो बढ़ेगी ही, आपका जीवन भी सुकून से कटेगा। राम अचल ने रिटायरमेंट की जमा-पूंजी कम जोखिम वाले विकल्पों में निवेशित किया, जो बाद में कम पड़ने लगी।
दूसरी पारी: उम्र के साथ कैसे बढ़ाएं जमा-पूंजी
- फोटो : ANI
विज्ञापन
विस्तार
राम अचल और श्याम पाल दोस्त हैं। राम अचल रिटायरमेंट की जमा-पूंजी (कॉर्पस) लेकर ‘सुरक्षित एक्सप्रेस’ में सवार हो गए, यानी सिर्फ फिक्स्ड डिपॉजिट, बॉन्ड, मासिक आय योजनाओं आदि में निवेश। कुछ वर्षों बाद पैसे कम पड़ने लगे। श्याम पाल ने ‘बैलेंस्ड एक्सप्रेस’ पकड़ी, यानी सुरक्षा के साथ इक्विटी की रफ्तार भी। उनकी जमा-पूंजी भी बढ़ती रही, और जीवन आराम से कटता रहा।
पारंपरिक निवेश पर भरपूर निर्भरता से नुकसान
रिटायरमेंट की बचत के लिए आमतौर पर बुजुर्ग ऐसे विकल्प चुनना पसंद करते हैं, जहां जोखिम कम हो। जैसे- बैंक एफडी, पोस्ट ऑफिस की मंथली इनकम स्कीम, पेंशन योजना और वरिष्ठ नागरिक बचत योजना (एससीएसएस)। हालांकि, सिर्फ इन पर ही निर्भर रहना जोखिम भरा है। इनमें अक्सर लिक्विडिटी (पैसे निकालने की आजादी) की कमी होती है, क्योंकि लॉक-इन पीरियड और समय से पहले निकासी पर जुर्माने जैसी शर्तें होती हैं। कई बार टैक्स देने के बाद मिलने वाला रिटर्न महंगाई से कम रह जाता है, खासकर तब, जब आपकी निवेश के अलावा भी दूसरी आमदनी हो।
जमा-पूंजी के निवेश की सही रणनीति
वरिष्ठ नागरिकों को दूसरी पारी (रिटायरमेंट) के पैसों के लिए सुरक्षित के बजाय ‘संतुलित रणनीति’ अपनानी चाहिए, जहां पूंजी की सुरक्षा, लिक्विडिटी के साथ ग्रोथ का भी इंतजाम हो। मतलब-तयशुदा (गारंटीड) ब्याज वाली योजनाओं के साथ इक्विटी भी हो, ताकि पैसा सुरक्षित रहे और बढ़ती हुई महंगाई को मात भी दे सके।
महंगाई को न करें नजरअंदाज
अगर आज आपके महीने का खर्च 50 हजार रुपये है, तो पांच साल बाद इसी जीवनशैली के लिए इतना पैसा काफी नहीं होगा। इसकी वजह है महंगाई। पांच साल बाद खर्च चलाने के लिए हर महीने करीब 67 हजार की जरूरत पड़ेगी। महंगाई को नजरअंदाज करने पर जमा की गई रकम कम पड़ सकती है।
सुरक्षा भी और ग्रोथ भी (बकेट रणनीति)
माईवेल्थग्रोथ डॉट कॉम के सह-संस्थापक हर्षद चेतनवाला बताते हैं कि रिटायरमेंट की पूंजी को अलग-अलग हिस्सों में बांटना ही बकेट रणनीति है। आमतौर पर तीन बकेट काफी हैं। किस बकेट में कितना निवेश करें, यह पूरी तरह व्यक्तिगत स्थिति, खासकर मौजूदा मासिक जरूरतों, आय के स्रोत और जोखिम क्षमता पर निर्भर करता है। अगर आपको पेंशन मिल रही है, तो इन बकेट पर बोझ कम हो जाता है। ध्यान दें कि पेंशन, महंगाई के साथ बढ़ने वाली है या नहीं। अगर नहीं है, तो महंगाई को ध्यान में रखकर योजना बनाएं। इक्विटी और हाइब्रिड बकेट में आमतौर पर ज्यादा निवेश रखना बेहतर होता है, क्योंकि नियमित खर्च का इंतजाम करने के बाद आपके पास पूंजी को बढ़ाने के लिए काफी साल बचे होते हैं।
निवेश ही नहीं, यह भी जरूरी
वरिष्ठ नागरिक स्वास्थ्य बीमा जरूर लें। इसकी किस्त ज्यादा होगी, पर चिकित्सा खर्च से बचाव करेगा। वसीयत बनवाएं, ताकि बाद में संपत्ति बंटवारे में कोई कानूनी पचड़ा न हो। समय-समय पर निवेश की समीक्षा करें और जरूरत पड़ने पर वित्तीय सलाहकार से परामर्श लें।
कहां और कितने समय का निवेश?
निवेश करते समय यह तय करना जरूरी है कि पैसा कहां और कितने समय के लिए लगाया जाए। शॉर्ट-टर्म या डेट बकेट उन नियमित और अचानक आने वाले खर्चों के लिए होता है, जिनकी जरूरत करीब दो साल तक पड़ सकती है। ऐसे पैसे को लिक्विड या ओवरनाइट डेट म्यूचुअल फंड, सीनियर सिटीजन सेविंग्स स्कीम, बैंक या कॉरपोरेट एफडी और बॉन्ड जैसे सुरक्षित विकल्पों में रखना बेहतर होता है। मिड-टर्म या हाइब्रिड बकेट का उपयोग उन खर्चों के लिए किया जाता है, जो अगले दो से पांच साल के भीतर सामने आ सकते हैं। इस अवधि के लिए मल्टी एसेट एलोकेशन और बैलेंस्ड एडवांटेज जैसे हाइब्रिड फंड उपयुक्त माने जाते हैं। अंत में लॉन्ग-टर्म या इक्विटी बकेट होता है, जिसमें बची हुई जमा-पूंजी को निवेश करना चाहिए। विशेषज्ञों के अनुसार, लंबे समय में हाइब्रिड फंड से टैक्स के बाद लगभग 7.5 से 8.5 प्रतिशत और इक्विटी से 10 से 12 प्रतिशत तक औसत रिटर्न मिलने की संभावना रहती है।
बचत ही नहीं, निकासी की भी रणनीति
व्यवस्थित निकासी योजना के अभाव में जमा पूंजी से ज्यादा खर्च का खतरा बना रहता है। इसमें सिस्टमैटिक विड्रॉल प्लान मदद करता है। ये नियमित आय के साथ निवेश की निरंतरता बनाए रखते हैं और कर-दक्षता प्रदान करते हैं। नियमित खर्च के लिए सबसे पहले डेट म्यूचुअल फंड से एसडब्ल्यूपी के जरिये निकासी करें। इस दौरान, हाइब्रिड व इक्विटी फंड में जमा पैसा बढ़ता रहेगा। जैसे-जैसे जरूरत नजदीक आए, इक्विटी/हाइब्रिड बकेट से पैसा शॉर्ट-टर्म बकेट में शिफ्ट करें, क्योंकि इनमें उतार-चढ़ाव का जोखिम कम है। आदर्श रूप से, निवेशक को हर साल अपने पोर्टफोलियो के कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट (सीएजीआर) से पांच फीसदी कम ही निकासी करनी चाहिए, ताकि जमा पूंजी लंबे समय तक बनी रहे।
- पवन पांडेय
Trending Videos
पारंपरिक निवेश पर भरपूर निर्भरता से नुकसान
रिटायरमेंट की बचत के लिए आमतौर पर बुजुर्ग ऐसे विकल्प चुनना पसंद करते हैं, जहां जोखिम कम हो। जैसे- बैंक एफडी, पोस्ट ऑफिस की मंथली इनकम स्कीम, पेंशन योजना और वरिष्ठ नागरिक बचत योजना (एससीएसएस)। हालांकि, सिर्फ इन पर ही निर्भर रहना जोखिम भरा है। इनमें अक्सर लिक्विडिटी (पैसे निकालने की आजादी) की कमी होती है, क्योंकि लॉक-इन पीरियड और समय से पहले निकासी पर जुर्माने जैसी शर्तें होती हैं। कई बार टैक्स देने के बाद मिलने वाला रिटर्न महंगाई से कम रह जाता है, खासकर तब, जब आपकी निवेश के अलावा भी दूसरी आमदनी हो।
विज्ञापन
विज्ञापन
जमा-पूंजी के निवेश की सही रणनीति
वरिष्ठ नागरिकों को दूसरी पारी (रिटायरमेंट) के पैसों के लिए सुरक्षित के बजाय ‘संतुलित रणनीति’ अपनानी चाहिए, जहां पूंजी की सुरक्षा, लिक्विडिटी के साथ ग्रोथ का भी इंतजाम हो। मतलब-तयशुदा (गारंटीड) ब्याज वाली योजनाओं के साथ इक्विटी भी हो, ताकि पैसा सुरक्षित रहे और बढ़ती हुई महंगाई को मात भी दे सके।
महंगाई को न करें नजरअंदाज
अगर आज आपके महीने का खर्च 50 हजार रुपये है, तो पांच साल बाद इसी जीवनशैली के लिए इतना पैसा काफी नहीं होगा। इसकी वजह है महंगाई। पांच साल बाद खर्च चलाने के लिए हर महीने करीब 67 हजार की जरूरत पड़ेगी। महंगाई को नजरअंदाज करने पर जमा की गई रकम कम पड़ सकती है।
सुरक्षा भी और ग्रोथ भी (बकेट रणनीति)
माईवेल्थग्रोथ डॉट कॉम के सह-संस्थापक हर्षद चेतनवाला बताते हैं कि रिटायरमेंट की पूंजी को अलग-अलग हिस्सों में बांटना ही बकेट रणनीति है। आमतौर पर तीन बकेट काफी हैं। किस बकेट में कितना निवेश करें, यह पूरी तरह व्यक्तिगत स्थिति, खासकर मौजूदा मासिक जरूरतों, आय के स्रोत और जोखिम क्षमता पर निर्भर करता है। अगर आपको पेंशन मिल रही है, तो इन बकेट पर बोझ कम हो जाता है। ध्यान दें कि पेंशन, महंगाई के साथ बढ़ने वाली है या नहीं। अगर नहीं है, तो महंगाई को ध्यान में रखकर योजना बनाएं। इक्विटी और हाइब्रिड बकेट में आमतौर पर ज्यादा निवेश रखना बेहतर होता है, क्योंकि नियमित खर्च का इंतजाम करने के बाद आपके पास पूंजी को बढ़ाने के लिए काफी साल बचे होते हैं।
निवेश ही नहीं, यह भी जरूरी
वरिष्ठ नागरिक स्वास्थ्य बीमा जरूर लें। इसकी किस्त ज्यादा होगी, पर चिकित्सा खर्च से बचाव करेगा। वसीयत बनवाएं, ताकि बाद में संपत्ति बंटवारे में कोई कानूनी पचड़ा न हो। समय-समय पर निवेश की समीक्षा करें और जरूरत पड़ने पर वित्तीय सलाहकार से परामर्श लें।
कहां और कितने समय का निवेश?
निवेश करते समय यह तय करना जरूरी है कि पैसा कहां और कितने समय के लिए लगाया जाए। शॉर्ट-टर्म या डेट बकेट उन नियमित और अचानक आने वाले खर्चों के लिए होता है, जिनकी जरूरत करीब दो साल तक पड़ सकती है। ऐसे पैसे को लिक्विड या ओवरनाइट डेट म्यूचुअल फंड, सीनियर सिटीजन सेविंग्स स्कीम, बैंक या कॉरपोरेट एफडी और बॉन्ड जैसे सुरक्षित विकल्पों में रखना बेहतर होता है। मिड-टर्म या हाइब्रिड बकेट का उपयोग उन खर्चों के लिए किया जाता है, जो अगले दो से पांच साल के भीतर सामने आ सकते हैं। इस अवधि के लिए मल्टी एसेट एलोकेशन और बैलेंस्ड एडवांटेज जैसे हाइब्रिड फंड उपयुक्त माने जाते हैं। अंत में लॉन्ग-टर्म या इक्विटी बकेट होता है, जिसमें बची हुई जमा-पूंजी को निवेश करना चाहिए। विशेषज्ञों के अनुसार, लंबे समय में हाइब्रिड फंड से टैक्स के बाद लगभग 7.5 से 8.5 प्रतिशत और इक्विटी से 10 से 12 प्रतिशत तक औसत रिटर्न मिलने की संभावना रहती है।
बचत ही नहीं, निकासी की भी रणनीति
व्यवस्थित निकासी योजना के अभाव में जमा पूंजी से ज्यादा खर्च का खतरा बना रहता है। इसमें सिस्टमैटिक विड्रॉल प्लान मदद करता है। ये नियमित आय के साथ निवेश की निरंतरता बनाए रखते हैं और कर-दक्षता प्रदान करते हैं। नियमित खर्च के लिए सबसे पहले डेट म्यूचुअल फंड से एसडब्ल्यूपी के जरिये निकासी करें। इस दौरान, हाइब्रिड व इक्विटी फंड में जमा पैसा बढ़ता रहेगा। जैसे-जैसे जरूरत नजदीक आए, इक्विटी/हाइब्रिड बकेट से पैसा शॉर्ट-टर्म बकेट में शिफ्ट करें, क्योंकि इनमें उतार-चढ़ाव का जोखिम कम है। आदर्श रूप से, निवेशक को हर साल अपने पोर्टफोलियो के कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट (सीएजीआर) से पांच फीसदी कम ही निकासी करनी चाहिए, ताकि जमा पूंजी लंबे समय तक बनी रहे।
- पवन पांडेय
जिंदगी की दूसरी पारी बहुत महत्वपूर्ण होती है। हर शुक्रवार इस पर आपको नया पढ़ने को मिलेगा। आप अपने विचार, अनुभव या समस्याएं edit@amarujala.com पर भेज सकते हैं, विशेषज्ञों की मदद से हम कोशिश करेंगे कि संवाद का पुल बन सके।