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जीवन धारा: गुलाब के फूल जैसा बनने की कोशिश करें; सूत्र- दायरों में बंधकर न रहें
लुईस हे
Published by: Pavan
Updated Thu, 30 Apr 2026 07:57 AM IST
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सार
गुलाब का फूल जब नन्ही कली होता है, वह तब भी सुंदर होता है। पूरा खिलने पर उसकी सुंदरता और निखर आती है। जब उसकी आखिरी पंखुड़ी गिर रही होती है, तब भी उसकी खूबसूरती अपने आप में अनोखी और देखने लायक होती है।
गुलाब के फूल जैसा बनने की कोशिश करें
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
अक्सर जीवन की भागदौड़ में हम यह भूल जाते हैं कि हम स्वयं के लिए कितने अनमोल हैं और कभी-कभी हमें लगता है कि हमारे अंदर खुद से प्यार करने की कमी है। ऐसे में, यह समझना जरूरी है कि यह नकारात्मक विचार हमारे भीतर आया कहां से। हम एक खुशहाल और मासूम बच्चे से, जिसे खुद पर पूरा भरोसा था, एक ऐसे दुखी इन्सान कैसे बन गए, जो खुद को कमतर समझता है और जिसे लगता है कि उसमें कोई न कोई कमी है? एक गुलाब के बारे में सोचिए। जब वह एक नन्ही कली होता है, तब भी वह सुंदर होता है। जब वह पूरा खिल जाता है, तब उसकी सुंदरता और निखर आती है। जब उसकी आखिरी पंखुड़ी गिर रही होती है, तब भी उसकी अपनी एक अनोखी खूबसूरती होती है।
हमारे साथ भी कुछ ऐसा ही है। हम हमेशा पूर्ण, सुंदर और हर वक्त बदलते रहते हैं। हमारे पास जो समझ, जागरूकता और ज्ञान है, उसके आधार पर हम अपना सबसे अच्छा कर रहे होते हैं। जैसे-जैसे हमें और ज्यादा समझ, जागरूकता और ज्ञान मिलेगा, हम चीजों को अलग तरीके से और बेहतर करेंगे। अब समय आ गया है कि हम अपने अतीत को थोड़ा और गहराई से देखें, और उन मान्यताओं पर नजर डालें, जो अब तक हमें चला रही थीं। अगर आप किसी कमरे को अच्छी तरह से साफ करना चाहते हैं, तो आप उसमें रखी हर चीज को उठाकर देखेंगे और जांचेंगे। कुछ चीजों को आप प्यार से देखेंगे, और उन्हें पोंछकर नई सुंदरता देंगे। कुछ चीजें आपको ऐसी भी दिखेंगी, जिन्हें फिर से ठीक करने या मरम्मत की जरूरत है, और आप उन्हें ठीक करने के लिए एक नोट बना लेंगे। कुछ चीजें ऐसी भी होंगी, जिनकी अब आपको जरूरत नहीं रहेगी, तब उन्हें छोड़ देना ही सही रहेगा। ठीक यही प्रक्रिया हमारे मन के साथ भी लागू होती है। जो विचार और मान्यताएं अब हमारे काम की नहीं हैं, उन्हें छोड़ देना चाहिए। इसके लिए गुस्सा या संघर्ष करने की जरूरत नहीं है।
कुछ सीमित करने वाली मान्यताएं होती हैं, जैसे ‘मैं अच्छा नहीं हूं।’ यह अक्सर बचपन के अनुभवों से आती है-जैसे किसी का बार-बार यह कहना कि तुम पर्याप्त नहीं हो। ऐसे में, व्यक्ति जीवन भर किसी की स्वीकृति पाने के लिए संघर्ष करता रहता है, लेकिन भीतर का दर्द उसे बार-बार असफलता की ओर ले जाता है। कई बार हम किसी के प्रेम और स्वीकृति की चाह में खुद को ही खो देते हैं। आलोचना, तुलना और डर हमें यह विश्वास दिला देते हैं कि जीवन कठिन और खतरनाक है। पर सच्चाई यह है कि यह सब सीखी हुई धारणाएं हैं, और जो सीखा गया है, उसे बदला भी जा सकता है। अब समय है कि हम अपने मन को नए, सकारात्मक विचारों से भरें और खुद को उसी प्रेम और स्वीकृति के साथ देखें, जिसके हम हमेशा से हकदार रहे हैं। -यू कैन हील योर लाइफ के अनूदित अंश
सूत्र- दायरों में बंधकर न रहें
हम हमेशा से पूर्ण और योग्य हैं, लेकिन पुराने अनुभवों और मान्यताओं ने हमें सीमित कर दिया है, अब समय है उन्हें पहचानकर छोड़ देने का, खुद को स्वीकार करने का, और नए सकारात्मक विचारों के साथ अपने जीवन को प्रेम, आत्मविश्वास तथा सच्ची खुशी से भरने का, क्योंकि जो बदला जा सकता है, वही हमारी नई शुरुआत बन सकता है।
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हमारे साथ भी कुछ ऐसा ही है। हम हमेशा पूर्ण, सुंदर और हर वक्त बदलते रहते हैं। हमारे पास जो समझ, जागरूकता और ज्ञान है, उसके आधार पर हम अपना सबसे अच्छा कर रहे होते हैं। जैसे-जैसे हमें और ज्यादा समझ, जागरूकता और ज्ञान मिलेगा, हम चीजों को अलग तरीके से और बेहतर करेंगे। अब समय आ गया है कि हम अपने अतीत को थोड़ा और गहराई से देखें, और उन मान्यताओं पर नजर डालें, जो अब तक हमें चला रही थीं। अगर आप किसी कमरे को अच्छी तरह से साफ करना चाहते हैं, तो आप उसमें रखी हर चीज को उठाकर देखेंगे और जांचेंगे। कुछ चीजों को आप प्यार से देखेंगे, और उन्हें पोंछकर नई सुंदरता देंगे। कुछ चीजें आपको ऐसी भी दिखेंगी, जिन्हें फिर से ठीक करने या मरम्मत की जरूरत है, और आप उन्हें ठीक करने के लिए एक नोट बना लेंगे। कुछ चीजें ऐसी भी होंगी, जिनकी अब आपको जरूरत नहीं रहेगी, तब उन्हें छोड़ देना ही सही रहेगा। ठीक यही प्रक्रिया हमारे मन के साथ भी लागू होती है। जो विचार और मान्यताएं अब हमारे काम की नहीं हैं, उन्हें छोड़ देना चाहिए। इसके लिए गुस्सा या संघर्ष करने की जरूरत नहीं है।
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कुछ सीमित करने वाली मान्यताएं होती हैं, जैसे ‘मैं अच्छा नहीं हूं।’ यह अक्सर बचपन के अनुभवों से आती है-जैसे किसी का बार-बार यह कहना कि तुम पर्याप्त नहीं हो। ऐसे में, व्यक्ति जीवन भर किसी की स्वीकृति पाने के लिए संघर्ष करता रहता है, लेकिन भीतर का दर्द उसे बार-बार असफलता की ओर ले जाता है। कई बार हम किसी के प्रेम और स्वीकृति की चाह में खुद को ही खो देते हैं। आलोचना, तुलना और डर हमें यह विश्वास दिला देते हैं कि जीवन कठिन और खतरनाक है। पर सच्चाई यह है कि यह सब सीखी हुई धारणाएं हैं, और जो सीखा गया है, उसे बदला भी जा सकता है। अब समय है कि हम अपने मन को नए, सकारात्मक विचारों से भरें और खुद को उसी प्रेम और स्वीकृति के साथ देखें, जिसके हम हमेशा से हकदार रहे हैं। -यू कैन हील योर लाइफ के अनूदित अंश
सूत्र- दायरों में बंधकर न रहें
हम हमेशा से पूर्ण और योग्य हैं, लेकिन पुराने अनुभवों और मान्यताओं ने हमें सीमित कर दिया है, अब समय है उन्हें पहचानकर छोड़ देने का, खुद को स्वीकार करने का, और नए सकारात्मक विचारों के साथ अपने जीवन को प्रेम, आत्मविश्वास तथा सच्ची खुशी से भरने का, क्योंकि जो बदला जा सकता है, वही हमारी नई शुरुआत बन सकता है।
