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टी-20 वर्ल्ड कप विशेष: टीम इंडिया को खल रही विराट कोहली की कमी!
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सार
दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ मुकाबले में भी यही अहसास बार-बार उभरा। भारत ने ऐसे क्षण देखे, जब मैच हाथ में लग रहा था, लेकिन क्रिकेट का खेल अक्सर उन्हीं पलों में पलटता है, जब संयम और स्पष्टता की जरूरत होती है। साझेदारियां बनते-बनते टूट गईं।
विराट कोहली।
- फोटो : PTI
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विस्तार
टीम इंडिया को अक्सर भावनाओं के आईने में देखा जाता है। शायद यही वजह है कि हालिया नतीजों ने सिर्फ आंकड़ों की चिंता नहीं बढ़ाई, बल्कि एक खालीपन का अहसास भी कराया। टी-20 वर्ल्ड कप के सुपर-8 मुकाबले में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ हार को अगर केवल एक मैच की तरह देखा जाए तो कहानी अधूरी रह जाएगी।
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यह हार दरअसल उस दौर का प्रतिबिंब है, जिसमें टीम अपने नए स्वरूप की तलाश कर रही है। इसी तलाश में एक नाम बार-बार याद आता है, वह है विराट कोहली।
कोहली की मौजूदगी का मतलब हमेशा सिर्फ शतक या बड़े स्कोर नहीं रहा। उनकी बल्लेबाजी में एक लय होती थी, जैसे पारी किसी अदृश्य धागे से बंधी हो।
जब वे क्रीज पर होते थे तो मैच की गति अचानक स्थिर लगने लगती थी, मानो उतावलापन खुद ही धीमा पड़ गया हो। मौजूदा टीम में प्रतिभा की कोई कमी नहीं, लेकिन वही भरोसा कि कोई है, जो पारी को संभाल लेगा। अक्सर टूटता हुआ सा लगता है।
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दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ मुकाबले में भी यही अहसास बार-बार उभरा। भारत ने ऐसे क्षण देखे, जब मैच हाथ में लग रहा था, लेकिन क्रिकेट का खेल अक्सर उन्हीं पलों में पलटता है, जब संयम और स्पष्टता की जरूरत होती है। साझेदारियां बनते-बनते टूट गईं।
रन गति का उतार-चढ़ाव यह बताता रहा कि टीम अभी अपनी धड़कन की सही रफ्तार खोज रही है। यह किसी कमजोरी से ज्यादा उस स्वाभाविक प्रक्रिया का हिस्सा है, जिससे हर नई पीढ़ी गुजरती है।
स्पिन की चुनौती ने इस कहानी को और गंभीर बना दिया है। बल्लेबाजों का संघर्ष सिर्फ तकनीक का नहीं, धैर्य का भी दिखता है। कुछ पलों में वे बहुत सतर्क दिखते हैं तो कुछ में जरूरत से ज्यादा जल्दबाज। यही उतार-चढ़ाव क्रिकेट को खेल से ज्यादा एक मानसिक यात्रा बना देता है। जब गेंद धीमी पड़ती है और रन आसान नहीं मिलते, तब असली परीक्षा कौशल की नहीं, धैर्य की होती है।
दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ ईशान किशन, अभिषेक शर्मा और तिलक वर्मा यही धैर्य नहीं दिखा सके। अभिषेक शर्मा का फॉर्म तो इस वर्ल्ड कप में चिंता में डालने वाला है। पहले तीन मैचों में वो खाता तक नहीं खोल सके थे।
दरअसल, भारतीय टीम इस समय एक संक्रमण से गुजर रही है। हर संक्रमण की तरह इसमें असहजता भी है और संभावना भी। यह टीम आक्रामक है, निडर है और कई बार यही उसकी सबसे बड़ी ताकत बनती है, लेकिन बड़े टूर्नामेंट अक्सर केवल ऊर्जा से नहीं, संतुलन से जीते जाते हैं। यही संतुलन अभी आकार ले रहा है।
विराट कोहली को मिस करना शायद इसी संतुलन को मिस करना है।ऑस्ट्रेलिया में टी-20 वर्ल्ड कप-2022 में पाकिस्तान के खिलाफ ऐसे ही फंसे मैच को विराट कोहली ने जीत में बदल दिया था। उनकी नाबाद 82 रनों की पारी आज भी क्रिकेट फैंस के जहन में ताजा है।
वह भरोसा कि खेल चाहे जैसे मुड़े, कोई उसे संभालने वाला है, लेकिन खेल की खूबसूरती यही है कि हर पीढ़ी को अपना नायक खुद बनाना पड़ता है। हारें, चुनौतियां और असमंजस उसी प्रक्रिया का हिस्सा हैं।
आगे का रास्ता कठिन जरूर दिखता है, लेकिन भारतीय क्रिकेट की कहानी हमेशा वापसी की रही है। यह टीम भी अपने अनुभवों से सीखते हुए वही संतुलन पाएगी, जिसकी झलक अभी-अभी दिखनी शुरू हुई है।
शायद आने वाले समय में यही दौर याद दिलाएगा कि परिपक्वता अचानक नहीं आती, वह धीरे-धीरे बनती है, मैच दर मैच, सीख दर सीख। शायद यही इस समय की सबसे सच्ची तस्वीर है। एक टीम जो अभी अधूरी नहीं, बल्कि निर्माणाधीन है।
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।