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IMA Parade 2026: आईएमए की परेड में इतिहास रचेंगी महिला जेंटलमैन कैडेट
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सार
भारतीय सेना में महिलाओं की भागीदारी कोई नई बात नहीं है। वर्ष 1992 में पहली बार महिलाओं को चिकित्सा सेवाओं के अतिरिक्त अन्य शाखाओं में शॉर्ट सर्विस कमीशन के माध्यम से अधिकारी बनने का अवसर मिला था।
इस बार की पासिंग आउट परेड में पहली बार महिला जेंटलमैन कैडेट पुरुष कैडेटों के साथ "अंतिम पग" पार कर भ
- फोटो : Indian Military Academy
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विस्तार
13 जून 2026 को देहरादून स्थित भारतीय सैन्य अकादमी (आईएमए) का ऐतिहासिक चेटवुड परेड ग्राउंड एक ऐसे क्षण का साक्षी बनेगा, जो भारतीय सेना के 93 वर्ष लंबे इतिहास में पहली बार घटित हो रहा है।
इस बार की पासिंग आउट परेड (POP) में पहली बार महिला जेंटलमैन कैडेट (अब आधिकारिक रूप से महिला कैडेट) पुरुष कैडेटों के साथ "अंतिम पग" पार कर भारतीय सेना में स्थायी कमीशन प्राप्त करेंगी। यह केवल एक सैन्य समारोह नहीं, बल्कि भारतीय समाज, सेना और महिलाओं की बदलती भूमिका का प्रतीकात्मक क्षण भी है।
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हालांकि, अखबारों में नौ महिला कैडेटों के भाग लेने की चर्चा है, विभिन्न आधिकारिक और मीडिया स्रोतों के अनुसार भारतीय सैन्य अकादमी में एनडीए से आई पहली महिला कैडेटों के बैच में आठ महिला कैडेट स्थायी कमीशन के लिए प्रशिक्षण प्राप्त कर रही थीं। ये वे कैडेट हैं जिन्होंने तीन वर्ष राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (एनडीए), खड़कवासला में और उसके बाद आईएमए में सैन्य प्रशिक्षण पूरा किया है।
तीन दशक पुराने सपने की पूर्ति
भारतीय सेना में महिलाओं की भागीदारी कोई नई बात नहीं है। वर्ष 1992 में पहली बार महिलाओं को चिकित्सा सेवाओं के अतिरिक्त अन्य शाखाओं में शॉर्ट सर्विस कमीशन के माध्यम से अधिकारी बनने का अवसर मिला था। लेकिन उन्हें स्थायी कमीशन तथा एनडीए और आईएमए जैसी प्रतिष्ठित सैन्य प्रशिक्षण संस्थाओं में पुरुषों के समान प्रवेश नहीं मिलता था।
वास्तविक परिवर्तन 2021 में आया, जब सर्वोच्च न्यायालय ने महिलाओं को एनडीए प्रवेश परीक्षा में शामिल होने की अनुमति देने का ऐतिहासिक निर्णय दिया। इसके बाद संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) ने महिलाओं के लिए एनडीए के द्वार खोल दिए। 2022 में पहली बार 17 महिला कैडेटों ने एनडीए में प्रवेश लिया और उन्होंने पुरुष कैडेटों के साथ समान सैन्य एवं शैक्षणिक प्रशिक्षण प्राप्त किया।
एनडीए से आईएमए तक का सफर
राष्ट्रीय रक्षा अकादमी को भारतीय सशस्त्र बलों का "क्रैडल ऑफ लीडरशिप" कहा जाता है। 2022 में प्रवेश लेने वाली 17 महिला कैडेटों ने तीन वर्षों तक कठोर प्रशिक्षण प्राप्त किया। मई 2025 में ये कैडेट एनडीए की 148वीं पासिंग आउट परेड में शामिल होकर इतिहास रच चुकी हैं।
उस समय पहली बार महिला कैडेट पुरुष कैडेटों के साथ एक ही टुकड़ी में मार्च करती हुई दिखाई दीं। इन 17 कैडेटों में से कुछ ने सेना, कुछ ने नौसेना और कुछ ने वायुसेना का चयन किया। सेना का चयन करने वाली महिला कैडेटों को अंतिम सैन्य प्रशिक्षण के लिए आईएमए भेजा गया, जहां उन्होंने पुरुष कैडेटों के समान प्रशिक्षण मानकों के अनुरूप एक वर्ष का अतिरिक्त प्रशिक्षण प्राप्त किया।
आईएमए का गौरवशाली इतिहास और नया अध्याय
1932 में स्थापित भारतीय सैन्य अकादमी ने अब तक हजारों अधिकारियों को भारतीय सेना को सौंपा है। यहां से निकले अधिकारियों ने द्वितीय विश्व युद्ध से लेकर 1947, 1962, 1965, 1971 और कारगिल युद्ध तक देश की रक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। लेकिन लगभग नौ दशक तक आईएमए का प्रशिक्षण केवल पुरुष कैडेटों तक सीमित रहा।
इस वर्ष पहली बार महिला कैडेटों का "अंतिम पग" पार करना आईएमए के इतिहास में एक नए युग की शुरुआत माना जा रहा है। सैन्य विशेषज्ञों का मानना है कि यह परिवर्तन केवल महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि भारतीय सेना की पेशेवर क्षमता और आधुनिक सोच का भी परिचायक है।
बदलती सेना, बदलता भारत
भारतीय सेना लंबे समय तक पुरुष प्रधान संस्था मानी जाती रही है। लेकिन पिछले एक दशक में परिस्थितियाँ तेजी से बदली हैं। आज महिलाएं लड़ाकू विमान उड़ा रही हैं, युद्धपोतों पर तैनात हैं, सीमा क्षेत्रों में सेवा दे रही हैं और विभिन्न कमांड जिम्मेदारियां निभा रही हैं।
महिलाओं को स्थायी कमीशन देने के सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय और उसके बाद एनडीए में प्रवेश की अनुमति ने इस बदलाव को संस्थागत स्वरूप प्रदान किया। अब सेना में महिला अधिकारी केवल सहायक भूमिका तक सीमित नहीं हैं, बल्कि नेतृत्व की मुख्यधारा का हिस्सा बन रही हैं।
केवल प्रतीक नहीं, क्षमता का प्रमाण
महिला कैडेटों की इस उपलब्धि को केवल "महिला सशक्तिकरण" के चश्मे से नहीं देखा जाना चाहिए। एनडीए और आईएमए का प्रशिक्षण विश्व के सबसे कठिन सैन्य प्रशिक्षण कार्यक्रमों में गिना जाता है। इन कैडेटों ने वही शैक्षणिक, मानसिक और नेतृत्व संबंधी मानक पूरे किए हैं जो उनके पुरुष साथियों पर लागू होते हैं।
एनडीए की पहली महिला बैच की कई कैडेटों ने प्रशिक्षण और अकादमिक प्रदर्शन में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल कीं। इससे यह धारणा भी मजबूत हुई कि अवसर मिलने पर महिलाएं सैन्य नेतृत्व की चुनौतियों का सफलतापूर्वक सामना कर सकती हैं।
आईएमए की यह ऐतिहासिक पासिंग आउट परेड आने वाले वर्षों में और बड़े परिवर्तनों की आधारशिला बन सकती है। आज जो महिला कैडेट पहली बार लेफ्टिनेंट बनकर सेना में प्रवेश कर रही हैं, उनमें से कोई भविष्य में ब्रिगेडियर, मेजर जनरल, लेफ्टिनेंट जनरल अथवा सेना की सर्वोच्च नेतृत्वकारी भूमिकाओं तक भी पहुंच सकती है। इस संभावना का उल्लेख कई सैन्य अधिकारियों ने भी किया है।
एक ऐतिहासिक क्षण
जब 13 जून को चेटवुड भवन की पृष्ठभूमि में महिला और पुरुष कैडेट एक साथ "अंतिम पग" पार करेंगे, तब वह केवल एक परेड नहीं होगी। वह भारतीय लोकतंत्र, संवैधानिक समानता और बदलते सामाजिक मूल्यों की विजय का प्रतीक होगी।
आईएमए के इतिहास में यह क्षण उसी प्रकार दर्ज होगा जैसे 2022 में एनडीए में महिलाओं का पहला प्रवेश और 2025 में एनडीए की पहली महिला बैच की पासिंग आउट परेड दर्ज हुई थी। यह भारतीय सेना के इतिहास में एक ऐसे अध्याय की शुरुआत है जिसमें नेतृत्व, साहस और देशभक्ति का कोई लिंग नहीं होगा।
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।