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Hindi News ›   Columns ›   Blog ›   Independence Day 2026: From Independence to Viksit Bharat 2047: India’s Journey and Youth Power

Independence Day 2026: आजाद भारत की युवा पीढ़ियों का राष्ट्र निर्माण में योगदान

Wed, 12 Aug 2026 10:21 AM IST
Dr.Naaz Parveen डॉ. नाज परवीन
Updated Wed, 12 Aug 2026 10:21 AM IST
सार

युवा लोकतंत्र को मजबूती देने में, युवा मतदान के प्रतिशत में वृद्धि करके देश हित में कार्य करने वाले योग्य व्यक्ति को संसद में पहुंचा सकते हैं ताकि युवाओं के आम जनमानस से जुड़े सवालों पर बहस हो और समाधान संभव हो। साथ ही लोकतंत्र को मजबूत करने में युवा अपनी भागीदारी निभा सके।

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Independence Day 2026: From Independence to Viksit Bharat 2047: India’s Journey and Youth Power
विकसित भारत 2047 - फोटो : AI

विस्तार

2047 तक भारत को विकसित भारत के रूप में देखने का सपना आजाद भारत ने देखा है। जिसे पूरा करने के संकल्प पर सरकार से समाज तक सभी अपने अपने स्तर से लगे हुए हैं। यकीनन 2047 एक यादगार वर्ष रहेगा। इसी वर्ष भारत की आजादी को 100 वर्ष  पूरे होने जा रहे हैं।

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कहते हैं तब आजाद भारत की युवा पीढ़ी की कमान अल्फ़ा और बीटा जनरेशन संभालेगी। जो आज की जैन जी जनरेशन से कहीं तेज और स्पष्टवादी होगी। अपने सपनों और मुद्दों को लेकर ये बाल शक्ति आज भी सोशल मीडिया पर छाई रहती है। अपने कंटेंट को लेकर लाइक और कमेंट तक की कमान अकेले ही संभाले हुए है। उन्हें देख लगता है भविष्य का भारत सुरक्षित हाथों पर है।
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एक सदी की यात्रा तय करना किसी भी राष्ट्र के निर्माण में अहम भूमिका रखती है। उससे भी ज्यादा यह कि उसका अतीत उसे सोने की पंखों वाली सोन चिड़िया के नाम से पुकारता हो। तब जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है।  इतिहास सदैव एक समान नहीं लिखा जा सकता बदलते समय के बदलाव उसमें देखे जा सकते हैं। अतीत की उन्हीं खुरदरी परतों के पीछे देखें तो हमारी कई सदियां गुलामी की जंजीरों में जकड़ी हुई नजर आएंगी।
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दुनिया की तेजी से आगे बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था बना भारत

15 अगस्त 1947 की सुबह भारत, ब्रिटिश हुकूमत की गुलामी से आजाद हुआ। अंग्रेजों ने तब जो भारत छोड़ा, वो ना तो 1600 ई. का भारत था, जहां मुगल बादशाह अकबर का सुनहरा युग झलक रहा था और न ही 1757 के पूर्व का सम्पन्न बंगाल , तब का भारत प्लासी, बक्सर से होते हुए 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम से होता हुआ उन तमाम आंदोलनों और संघर्षों से लड़ता, घायल होता, सीखता और निरंतर अपनी यात्रा को जारी रखता हुआ एक कमजोर, बीमार, दर्द से कराहता हुआ स्वाभिमानी भारत था। जिसे अपने ज़ख्मों पर खुद ही मरहम लगाना था और तेजी से बदलती दुनिया के सामने फिर अपने पहले जैसे वजूद को कायम करना था। उन तमाम मुद्दों पर भारत मजबूती से आगे बढ़ा और आज दुनिया की तेजी से आगे बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था के रूप में स्वयं को साबित कर पा रहा है।

स्वतंत्रता आंदोलन 

20वी सदी संघर्ष की सदी थी। हमारे पूर्वजों ने अपने जीवन का बलिदान भी सहजता से दिया। दुनिया के लिए शायद उन घटनाओं पर यकीन करना मुश्किल होगा जो भारत की स्वतंत्रता आंदोलन में घटित हुई। हमारे सामने मौजूद किताबों को भी चंद ही घटनाएं याद हैं। अनगिनत घटनाएं किस्से कहानियों में सिमटकर खो गई लेकिन जो खुद को दर्ज करा पाई उन्हें आज की पीढ़ी पढ़कर गर्व से कहती है कि हम उस विरासत से हैं जहां मातंगिनी हजारा जैसी बहादुर 73 वर्षीय शेरनी (बूढ़ी गांधी) भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान ब्रिटिश सरकार की पुलिस के हाथों गोली खाकर भी न खुद झुकीं न आखिरी सांस तक तिरंगे को झुकने दिया। हाथ में तिरंगा और जुबां पर वंदे मातरम् का नारा लगाते हुए शहीद हो गई।

संवैधानिक अधिकारों पर बहस कर रहीं जेन जी बेटियां

आज की जेनजी पीढ़ी की बेटियां जब संवैधानिक अधिकारों पर बहस करती हैं, अपने और दूसरे के अधिकारों की वकालत करती हैं, तो लगता है कि भविष्य सुरक्षित हाथों में है। जेन जी, जेन अल्फा और बीटा जनरेशन को इतिहास और भविष्य से तालमेल बनाते हुए वर्तमान की रणनीति तैयार करनी होगी। तभी युवा पीढ़ी राष्ट्र निर्माण में अपना वही योगदान स्थापित कर पाएगी जो हमसे पहले पीढ़ी ने किया था। यकीनन देश आजाद हो गया है हम प्रत्येक वर्ष की तरह इस वर्ष भी लाल किले से तिरंगा फहराते हुए पूरे देश में जश्न मनाएंगे, मिठाइयां बांटेंगे लेकिन राजनैतिक रूप से आजाद होने के बाद भी हम आज भी अनेक अदृश्य गुलामी की जंजीरों में जकड़े हुए हैं। जिसका आभास आज के युवा को हो चुका है संभवतः इसीलिए वो आज फिर अपने अधिकारों की वकालत करने के लिए सड़कों पर है और 20 वीं सदी के हथियार  सत्याग्रह का प्रयोग करके आगे बढ़ रहा है।

जेन जी हंगर स्ट्राइक

आज का जेन जी हंगर स्ट्राइक के माध्यम से उन भूख हड़तालियों की याद ताजा करा रहा है जिनके आगे पूरी अंग्रेजी फौज के हाथ- पांव फूल गए थे। आज का हंगर स्ट्राइक करने वाला जैन जी एच. एस. आर. ए. के महान क्रांतिकारी जतिन दास को फॉलो करने वाला है। जिन्होंने (13 सितंबर 1929 ई. को) साधारण अपराधियों के बजाय जेल में राजनीतिक बंदियों का दर्जा प्राप्त करने के लिए अपनी भूख हड़ताल के 64वें दिन महज 25 वर्ष की उम्र में शहादत हासिल कर ली थी। लेकिन अंग्रेजी हुकूमत के आगे अपने हथियार नहीं डाले थे। कहते हैं वो 'जी आई' जनरेशन थी। वो भारत माता की क्रांतिकारी जनरेशन थी और आज भारत के जैन जी भी उसी पीढ़ी के अंश हैं। जिन्हें देख लगता है अपनी सत्याग्रही विरासत को संरक्षित कर राष्ट्र निर्माण में अपना अहम योगदान निभाएंगे।  

युवा मतदान के प्रतिशत में हो वृद्धि

आजाद भारत की युवा पीढ़ी का राष्ट्र निर्माण में कई तरह से अहम योगदान हो सकता है। ये भारत की युवा शक्ति है जिसकी शक्ति का यदि सही उपयोग किया जाए तो उन तमाम मुद्दों पर न केवल चर्चा हो सकती है अपितु समाधान संभव हो सकते हैं। युवा लोकतंत्र को मजबूती देने में, युवा मतदान के प्रतिशत में वृद्धि करके देश हित में कार्य करने वाले योग्य व्यक्ति को संसद में पहुंचा सकते हैं ताकि युवाओं के आम जनमानस से जुड़े सवालों पर बहस हो और समाधान संभव हो साथ ही लोकतंत्र को मजबूत करने में युवा अपनी भागीदारी निभा सके।

आज भारत अपनी आजादी के 79 वर्ष पूरे करने का जश्न मना रहा है। 1951 की जनगणना में भारत में शिक्षा का प्रतिशत लगभग 18.33% था। हर भारतीय का सपना था कि शिक्षा पर सबका अधिकार हो और यह भारत के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचें। लेकिन विडंबना यह है कि शिक्षा की ज्योति समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचना अभी भी बाकी है। जिस दिशा पर युद्धस्तर का प्रयास होना चाहिए, हमें अभी भी प्रयास करना है कि शिक्षित युवा अंधविश्वास, रूढ़िवादी सामाजिक बुराइयों को दूर करके विज्ञान और तकनीकी में अपना ध्यान आकर्षित करे। ए आई की दुनिया में भारत की युवा पीढ़ी कमान संभाले।

युवा पीढ़ी आगे बढ़ कर नेतृत्व का झंडा थामे

हर साल आजादी का जश्न हमें अपनी जिम्मेदारी निभाने के लिए प्रेरित करता है हमें याद दिलाने की कोशिश करता है कि भले ही हम स्वतंत्रता के संघर्ष में मौजूद नहीं थे। भगत सिंह, राजगुरु, सुखदेव, बटुकेश्वर दत्त, अशफ़ाक़ उल्ला खां, रामप्रसाद बिस्मिल, चंद्रशेखर आजाद, जैसे महानायक युवाओं के कंधे से कंधा मिलाने के लिए तब मौजूद नहीं थे लेकिन आज भी देश जब अव्यवस्था, अशिक्षा, अशांति के खतरे से जूझ रहा है तो भारत की युवा पीढ़ी आगे बढ़ कर नेतृत्व का झंडा थाम सकती है। देश की मरणासन्न नदियां, कटते हुए जंगल, जहरीली होती हवा परिवर्तन की राह निहार रही हैं। कचड़े के पहाड़ों ने खाली पड़े मैदानों को अपनी गिरफ्त में ले लिया है। गाड़ियों से निकलने वाले धुएं से शहरों का दम घुटने लगा है। इन तमाम मुद्दों पर समाधान युवाओं को ही निकालना होगा।

आज का युग ए आई का है डिजिटल तकनीकी का है जहां नए-नए स्टार्टअप और नवाचार की अपार संभावनाएं है। शिक्षा का सही उपयोग करके आज के युवा न केवल खुद रोजगार पा सकते हैं अपितु रोजगार देने वाले उद्यमी भी बन सकते हैं। निःसंदेह स्वतंत्रता हमें हमारे पूर्वजों ने बड़े संघर्ष करके दी है। आजाद भारत को विकसित और मजबूत बनाने का दायित्व देश के युवाओं का है। भारत विश्व में समृद्ध, सशक्त और न्यायपूर्ण बने यह जिम्मेदारी युवाओं की है। किसी भी देश का युवा उस देश की शक्ति होता है युवा पीढ़ी जिस दिशा में आगे बढ़ेगी उसी दिशा में उस देश का भविष्य निर्धारित होगा। आजाद भारत में युवाओं का राष्ट्र निर्माण में अहम योगदान है। वही देश के असली सिपाही हैं।


जय हिंद!

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डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।

 

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